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_जानिए FIR दर्ज करने से संबंधित कानून, नियम और जानिए FIR दर्ज की सम्पूर्ण प्रक्रिया_

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जागरूक नागरिक उज्ज्वल भविष्य भारत का
अजीत सिंह ब्यूरो चीफ

जैसा कि आप सभी जानते है कि किसी भी आपराधिक घटना की कानूनी रूप से जांच के लिए FIR दर्ज कराना सबसे पहले कदम होता है. FIR दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच करती है. लेकिन, कुछ मामले ऐसे भी होते हैं जहां सुनने में आता है कि पुलिस ने FIR नहीं दर्ज की या किसी व्‍यक्ति ने इसे दर्ज नहीं कराया. दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1973 में एफआईआर के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. ऐसे में जरूरी है कि आपको इस बारे में आपको जानकारी हो. आपको पता होना चाहिए कि एफआई दर्ज कराने का प्रोसेस क्‍या है, किन बातों को ध्‍यान देना चाहिए, इसे लेकर आपके क्‍या अधिकार हैं और अगर पुलिस FIR दर्ज करने से मना कर दे तो आपको क्‍या करना चाहिए. जानिए नियम और प्रक्रिया क्या हैं.

FIR क्या है?
प्रथम सूचना रपट अर्थात जब पुलिस को किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) की जानकारी मिलती है, उसके बाद वो जो सबसे पहली लिखित डॉक्‍युमेंट तैयार करते हैं, उसे ही फर्स्‍ट इन्‍फॉर्मेशन रिपोर्ट (FIR) कहते हैं. इसके नाम से ही पता चल रहा है कि जब पुलिस को किसी वारदात की सबसे पहली जानकारी मिलती है, FIR उसकी पहली रिपोर्ट होती है. यह आमतौर पर किसी पीड़‍ित द्वारा शिकायत के बाद लिखी गई रिपोर्ट होती है. कोई भी व्‍यक्ति पुलिस से अपने साथ या करीबियों के साथ हुए अपराध की शिकायत मौखिक या लिखित में कर सकता है. पुलिस से कॉल के जरिए भी शिकायत की जा सकती है.

FIR पर पुलिस की क्रियाशीलता
संज्ञेय अपराध में पुलिस के पास किसी व्‍यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता है. वे मामले की जांच करने के लिए भी अधिकृत होते हैं. इसके लिए उन्‍हें कोर्ट से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती है. यहां ध्यान दीजियेगा कि असंज्ञेय अपराध में पुलिस के पास न तो किसी व्‍यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता और न ही वे मामले की जांच कर सकते हैं.

FIR क्यो की जाए दर्ज?
किसी भी अपराध या वारदात की जांच में FIR सबसे जरूरी डॉक्‍युमेंट होता है क्‍योंकि आगे की कानूनी कार्रवाई इसी के आधार पर की जाती है. एफआईआर लिखने के बाद ही पुलिस मामले की जांच शुरू करती है.

FIR दर्ज कराने का अधिकार?
अगर किसी भी व्‍यक्ति के पास किसी संज्ञेय वारदात की जानकारी है, वो नजदीकी पुलिस स्‍टेशन में FIR दर्ज करा सकता है. ऐसा जरूरी है कि जिसके साथ वारदात हुई है, वही व्‍यक्ति FIR दर्ज कराएगा. अगर किसी पुलिस अधिकारी को संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलती है तो वो भी खुद FIR फाइल कर सकता है. अगर आपके साथ कोई वारदात हुई है, अगर आपको पता है कि आपने न चाहते हुए भी कोई अपराध कर दिया है, वारदात के मौके पर वहां मौजूद थे, तो भी आप FIR दर्ज करा सकते हैं.

FIR दर्ज कैसे कराई जाती है?
दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के सेक्‍शन 154 में FIR का जिक्र है. जब कोई व्‍यक्ति किसी वारदात/घटना/अपराध की जानकारी मौखिक रूप से देता है तो पुलिस उसे लिखती है. शिकायतकर्ता या जानकारी देने वाले नागरिक के तौर पर यह आपका हक बनता है कि आपने जो मौखिक जानकारी दी है, पुलिस उसे लिखने के बाद आपको पढ़कर सुनाए. आपके द्वारा दी गई जानकारी को पुलिस द्वारा लिखने के बाद इसपर आपका साइन किया जाना जरूरी है.

क्या FIR पर हस्ताक्षर अनिवार्य है?
जी हां आप द्वारा दर्ज FIR हस्ताक्षरित होना आवश्यक है। पर आपको इस रिपोर्ट तभी साइन करना चाहिए, जब आपको लगे कि पुलिस ने आपके द्वारा दी गई जानकारी ठीक लिखा है, आपके कथन या तथ्‍यों को तोड़-मरोड़कर नहीं लिखा गया है. जो लोग ल‍िख या पढ़ नहीं सकते हैं, वे इस रिपोर्ट पर अंगूठे का निशान लगा सकते हैं. 

FIR की कॉपी ली जा सकती है?
FIR दर्ज कराने के बाद उसकी एक कॉपी जरूर प्राप्‍त करनी चाहिए. FIR की कॉपी ब‍िल्‍कुल मुफ्त में प्राप्‍त करना आपका अधिकार है.

FIR में क्या जानकारी चाहिये?
FIR में आपका नाम, पता, तारीख, समय, रिपोर्टिंग की जगह आदि के बारे में जानकरी होनी चाहिए. वारदात/घटना/अपराध की सच्‍ची जानकारी व तथ्‍य, शामिल व्‍यक्तियों के नाम व अन्‍य जानकारी और अगर कोई चश्‍मदीद है तो उनकी जानकारी भी FIR में देनी चाहिए.
FIR दर्ज कराते समय आपको कोई भी गलत जानकारी या तथ्‍यों को तोड़-मरोड़कर नहीं बतानी चाहिए. भारतीय दंड संहिता, 1860 के सेक्‍शन 203 के तहत इसके लिए आप पर कार्रवाई की जा सकती है. इसमें कोई बयान ऐसा बयान भी नहीं होना चाहिए, जिसके बारे में आपको कोई स्‍पष्‍ट जानकारी नहीं हो.

FIR दर्ज करने से पुलिस मना कर दे तो?
अगर आपकी शिकायत दर्ज नहीं किया जा रहा तो क्‍या करना चाहिए
अगर पुलिस स्‍टेशन में आपका FIR दर्ज नहीं किया जा रहा है तो आप पुलिस सुपरिटेंडेंट (SP) या इससे ऊपर डिप्‍टी इंस्‍पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस (DIG) और इंस्‍पेक्‍टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) से शिकायत कर सकते हैं. आप इन अधिकारियों को अपनी शिकायत लिखित रूप में पोस्‍ट के जरिए भेज सकते हैं. वे अपने स्‍तर पर से इस मामले की जांच करेंगे या जांच का निर्देश देंगे.

 FIR दर्ज नही होने या देरी होने पर अन्य उपाय
अगर पर्याप्त सूचना के बावजूद पुलिस आपकी शिकायत दर्ज नही करती है या अनावश्यक देरी करती है तो विकल्प के तौर पर आप अपने अधिकार क्षेत्र के न्यायालय की शरण ले सकते है। आप चाहें तो धारा 156(3) के तहत  अधिकार-क्षेत्र में आने वाले कोर्ट में भी इसकी शिकायत कर सकते हैं.

क्या FIR दर्ज होने पर पुलिस जांच शुरू करेगी
FIR दर्ज कराने के बाद भी पुलिस कब मामले की जांच नहीं कर सकती है?
आपके द्वारा FIR दर्ज कराने के बाद पुलिस मामले की जांच तब नहीं करती है, जब केस बहुत गंभीर न हो या पुलिस को लगे कि उक्‍त मामले के जांच के लिए कोई पर्याप्‍त कारण नहीं है. हालांकि, इसके लिए पुलिस को रिकॉर्ड करना होता है कि वो क्‍यों इस मामले की जांच नहीं कर रहे हैं. उन्‍हें इस बारे में आपको जानकारी भी देनी होती है.

🇮🇳वन्दे मातरम 🇮🇳
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