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क्षेत्र की गर्भवतियों के लिए रीमा बनीं वरदान, कोरोनाकाल में सूझबूझ से बचाई कई माँ-बच्चों की जान
रिपोर्ट सुशील कुमार द्विवेदी
गोंडा -
महिला सशक्तिकरण के लिए शासन द्वारा मिशन शक्ति अभियान चलाकर महिलाओं को सशक्त बनाया जा रहा है । आज नारी शक्ति अपनी उपयोगिता हर क्षेत्र में साबित कर रही हैं । इसी कड़ी में ग्रामीण क्षेत्रों एवं दूर-दराज इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का जो कार्य नारी शक्ति द्वारा किया जा रहा है, वह किसी युग परिवर्तन से कम नहीं है ।
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाकर मां-बच्चों के स्वास्थ्य स्तर को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे सफल बनाने में गांव में काम करने वाली आशा, आशा संगिनी व अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं ।
जनपद गोंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काजीदेवर की आशा संगिनी रीमा सिंह भी उनमें से एक हैं जो अपने क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है ।
रीमा बताती हैं कि अप्रैल-मई 2020 में जब हर तरफ कोरोना की तबाही मची हुई थी और लॉकडाउन होने के नाते प्रवासी मजदूर बाहर से अपने घर आ रहे थे उस वक़्त हमारी ड्यूटी डोर टू डोर सर्वे में लगी हुई थी । इस दौरान पता चला कि गांव की एक महिला पहली बार गर्भवती हुई है और उसका तीसरा महीना चल रहा है । अगले हफ्ते जब वीएचएसएनडी सत्र आयोजित हुआ, तो उसे टीडी का टीका तो लग गया, लेकिन कोरोना और लॉकडाउन के कारण सत्र पर पर्याप्त लॉजिस्टिक्स नहीं थे जिस वजह उसकी पूरी एएनसी जांच नहीं हो पाई ।
मैंने उनको हर महीने 9 तारीख को होने वाले पीएमएसएमए दिवस के बारे में जानकारी दी और अगले महीने महिला अस्पताल जाकर सभी जरूरी जांच करवाने और चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए प्रेरित किया ।
अस्पताल में जब उस गर्भवती की जांच हुई, तो वह उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में थी । उसका हीमोग्लोबिन 6.4 ग्राम था । चिकित्सकों ने गर्भवती को आयरन-सुक्रोज चढ़वाने की सलाह दी, पर उसके पति और घर के अन्य सदस्य इसके लिए लिए तैयार नहीं हो रहे थे । उनका कहना था कि वह ठीक तो है खाये-पियेगी तो धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा ।
ऐसे में रीमा ने उच्च जोखिम वाली महिला के प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं और माँ-बच्चे के जान को होने वाले खतरों के बारे में उन्हें बहुत समझाया, फिर वो तैयार हुए और गर्भवती को आयरन-सुक्रोज की हर महीने एक डोज तथा कुल तीन डोज दी गयी ।
गृह भ्रमण के दौरान मैंने आयरन-फोलिक एसिड गोली के नियमित सेवन करने और खानपान पर विशेष ध्यान देने का नियमित रूप से फॉलोअप किया । 7वां महीना बीतते-बीतते वह उच्च जोखिम से सामान्य हो गयी । 9वें महीने में उसका हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 9.8 ग्राम हो गया । 9 दिसंबर को महिला अस्पताल में उसका प्रसव हुआ । आज जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं । उन्हें हंसते-मुस्कुराते देख मन में संतुष्टि और जिम्मेदारी पर गर्व महसूस करती हूँ ।


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