अब पॉलिथीन बैन के लिए निशाने पर फैक्ट्रियां
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लखनऊ। एक साल पहले उत्तर प्रदेश में पॉलिथीन इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को प्रभावी करने के लिए सरकार ने फैक्ट्रियों पर छापेमारी के आदेश दिए हैं। सभी मंडलायुक्त, जिला अधिकारी, नगर आयुक्त और पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को आदेश दिये गये हैं कि वे फैक्ट्रियों को चेक करें और अगर कहीं पर प्रतिबंधित पॉलिथीन बनती पाई जा रही है तो उसे सील किया जाये। यही नहीं, जहां पहले कार्रवाई की जा चुकी है, वहां दोबारा इन्हें चेक किया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि सील के बाद फिर से चोरी छुपे उत्पादन तो नहीं हो रहा है।
बीते साल सरकार ने प्रदेश में पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया था। तीन चरणों में लगे पॉलिथीन प्रतिबंध में हर तरह के पॉलिथीन इस्तेमाल पर रोक है। थर्माकोल और प्लास्टिक के उत्पाद भी प्रतिबंधित हैं। हालांकि प्रतिबंध के बावजूद अब भी पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। लगातार हो रहे इस्तेमाल पर सरकार ने आदेश जारी किये हैं कि पॉलिथीन का इस्तेमाल करने वाली दुकानों और होलसेलरों पर तो कार्रवाई की ही जाये लेकिन जिन फैक्ट्रियों में इनका निर्माण जारी है, उनपर ज्यादा सख्ती हो। हालांकि नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों से कहा है कि अगर किसी फैक्ट्री की एक यूनिट में पॉलिथीन बन रही है जबकि अन्य यूनिट्स में दूसरे उत्पादन बनाये जा रहे हैं तो केवल पॉलिथीन वाली यूनिट पर ही कार्रवाई हो, न कि पूरी फैक्ट्री सील की जाये। पॉलिथीन बनाने से संबंधित जितनी भी इकाइयां चल रही हैं या पूर्व में बंद की गई हैं तो उनका निरीक्षण समय से हो और सुनिश्चित किया जाये कि इनका उत्पादन नहीं हो रहा है।
नगर विकास विभाग ने सभी अधिकारियों को आदेश दिये हैं कि हर रोज की कार्रवाई से शासन को अवगत कराया जाये। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदेशों का कड़ाई से पालन हो रहा है।
सरकार ने आदेश दिये हैं कि दूसरे प्रदेशों से पॉलिथीन के आयात पर भी प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाये। सभी अधिकारियों को आदेश दिये गये हैं कि प्रदेश के बॉर्डर एरिया पर जीएसटी अधिकारियों की तरफ से चेकिंग तेज की जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि पैकेजिंग आइटम के नाम पर आयात हो रही वस्तुओं वाले वाहनों की चेकिंग
लखनऊ। एक साल पहले उत्तर प्रदेश में पॉलिथीन इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंध को प्रभावी करने के लिए सरकार ने फैक्ट्रियों पर छापेमारी के आदेश दिए हैं। सभी मंडलायुक्त, जिला अधिकारी, नगर आयुक्त और पालिका परिषद व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को आदेश दिये गये हैं कि वे फैक्ट्रियों को चेक करें और अगर कहीं पर प्रतिबंधित पॉलिथीन बनती पाई जा रही है तो उसे सील किया जाये। यही नहीं, जहां पहले कार्रवाई की जा चुकी है, वहां दोबारा इन्हें चेक किया जाये और यह सुनिश्चित किया जाये कि सील के बाद फिर से चोरी छुपे उत्पादन तो नहीं हो रहा है।
बीते साल सरकार ने प्रदेश में पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगा दिया था। तीन चरणों में लगे पॉलिथीन प्रतिबंध में हर तरह के पॉलिथीन इस्तेमाल पर रोक है। थर्माकोल और प्लास्टिक के उत्पाद भी प्रतिबंधित हैं। हालांकि प्रतिबंध के बावजूद अब भी पॉलिथीन का इस्तेमाल हो रहा है। लगातार हो रहे इस्तेमाल पर सरकार ने आदेश जारी किये हैं कि पॉलिथीन का इस्तेमाल करने वाली दुकानों और होलसेलरों पर तो कार्रवाई की ही जाये लेकिन जिन फैक्ट्रियों में इनका निर्माण जारी है, उनपर ज्यादा सख्ती हो। हालांकि नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी अधिकारियों से कहा है कि अगर किसी फैक्ट्री की एक यूनिट में पॉलिथीन बन रही है जबकि अन्य यूनिट्स में दूसरे उत्पादन बनाये जा रहे हैं तो केवल पॉलिथीन वाली यूनिट पर ही कार्रवाई हो, न कि पूरी फैक्ट्री सील की जाये। पॉलिथीन बनाने से संबंधित जितनी भी इकाइयां चल रही हैं या पूर्व में बंद की गई हैं तो उनका निरीक्षण समय से हो और सुनिश्चित किया जाये कि इनका उत्पादन नहीं हो रहा है।
नगर विकास विभाग ने सभी अधिकारियों को आदेश दिये हैं कि हर रोज की कार्रवाई से शासन को अवगत कराया जाये। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आदेशों का कड़ाई से पालन हो रहा है।
सरकार ने आदेश दिये हैं कि दूसरे प्रदेशों से पॉलिथीन के आयात पर भी प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाये। सभी अधिकारियों को आदेश दिये गये हैं कि प्रदेश के बॉर्डर एरिया पर जीएसटी अधिकारियों की तरफ से चेकिंग तेज की जाये। यह सुनिश्चित किया जाये कि पैकेजिंग आइटम के नाम पर आयात हो रही वस्तुओं वाले वाहनों की चेकिंग

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