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नाले-नालियों के नाम पर पांच करोड़ खर्च, नहीं बदली सूरत नगर निगम पर कमीशन लेने का आरोप

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लखनऊ। शहर में अभी भी कई जगहों पर नाले व नालियां पुरानी हालत में पड़े हुए हैं। जबकि नाला सफाई की मियाद शनिवार को पूरी हो गई। लगभग पांच करोड़ रुपये खर्च हो गये। भुगतान की फाइलें भी बननी शुरू हो गईं। लेकिन नालों की हालत जस की बनी हुई हैं। बजबजाती नालियों से लोग डरे हुए हैं। बारिश कभी भी शुरू हो सकती हैं। चोक नालियों में पानी की निकासी मुश्किल है। लोगों की मुश्किलों से बेखबर नगर निगम के अफसर अपना कमीशन जोडऩे में जुटे हुए हैं।
यह हालत शहर के 83 बड़े, 509 मझले नाले तथा 978 छोटी नालियों का है। सफाई का काम अभी लगभग 60-70 प्रतिशत भी पूरा नहीं हो सका है। बारिश कभी भी शुरू हो सकती है। ऐसे में शहर के मोहल्लों का टापू बनना तय है। नगर निगम के अफसर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यह हाल तब है जब हाईकोर्ट व एनजीटी से नगर निगम को लगातार फटकार लग रही है। हर साल 31 मई तक नालों की सफाई पूरी करने का लक्ष्य रहता है। लेकिन इस बार 15 जून लक्ष्य निर्धारित किया गया। यह मियाद भी पूरी हो गई लेकिन सफाई का काम पूरा नहीं हो सका है।

शहर में स्थित 509 नालों की सफाई की जिम्मेदारी अभियंत्रण विभाग की है। यह नाले एक फुट से 1.5 मीटर की चौड़ाई के हैं। इनकी सफाई 15 अप्रैल से शुरू होनी चाहिए थी लेकिन एक माह बाद 15 मई के आसपास काम शुरू हो सका। अधिकारी आचार संहिता लागू होने का बहाना बता रहे हैं। आचार संहिता के कारण नाला सफाई का ठेका नहीं हो सका। लिहाजा नगर निगम खुद ही नालों की सफाई करा रहा है। नगर निगम के पार्षद इसे अधिकारियों की लापरवाही बता रहे हैं। उनका कहना है कि आचार संहिता अचानक नहीं लगी है। नाला सफाई हर साल होती है। आचार संहिता लागू होने से पहले ठेके की प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए थी। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा राजधानी की जनता को भुगतना पड़ेगा। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। यही हाल स्वास्थ्य विभाग के नालों का है। मोहल्लों, कालोनियों व गलियों में स्थित 978 नालियों की सफाई नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग कराता है। हर वार्ड में लगभग 25 से 30 किलोमीटर नालियां अधूरी पड़ी हुई है। आरआर विभाग के जिम्मे वाले 83 बड़े नालों की सफाई का काम भी अभी पूरा नहीं हो सका है।
इंदिरानगर क्षेत्र की हालत ज्यादा खराब है। आधे इंदिरानगर का पानी कुकरैल बंधे के बैरल नम्बर सात से बाहर निकाला जाता है। बंधा मार्ग बनने के कारण यह बैरल अभी बंद है। उधर एचएएल के पास का नाला मेट्रो निर्माण के कारण पटा पड़ा है। भूतनाथ व आसपास का पूरा पानी इसी नाले से निकलता है। इसके अलावा इंदिनानगर के डी-1082 से डी-1200 तक नाला पूरी तरह चोक है। बारिश से पहले ही नाले का पानी घरों में पहुंच रहा है। पिकनिक स्टपाट के पास नाले की सफाई नगर निगम के ही स्वास्थ्य व अभियंत्रण की लड़ाई में नहीं हो पाई है। इसके अलावा गोमतीनगर, जानकीपुरम, अलीगंज, विकासनगर, महानगर, निशातगंज, आलमबाग, कृष्णानगर, आशियाना, राजाजीपुरम, चौक, चौपटिया, नक्खास आदि इलाकों नाले भी इस बार मुसीबत के कारण बनने को तैयार हैं। अपर नगर आयुक्त अमित कुमार ने बताया कि नाला सफाई की मियाद पूरी हो गई है। अब निरीक्षण शुरू होगा। जहां नालियां जाम मिलेंगी उसे साफ कराया जायेगा। साथ ही जिम्मेदार के खिलाफ  कार्रवाई भी होगी। भुगतान भी जांच के बाद होगा।

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