राणा प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी : महापौर संयुक्ता भाटिया
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आज दिनाँक 08/05/2019 को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री राम नाईक एवं महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने हुसैनगंज चौराहे स्थित महाराणा प्रताप की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस मौके पर महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता विश्व विख्यात है। उन्होंने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपने सिंहासन को छोड़ दिया और जंगलों में अपना जीवन बिताया लेकिन मुग़ल बादशाह अकबर के सामने मरते दम तक अपना शीश नहीं झुकाया। देश की सर्वोच्चता एवं स्वतंत्रता के प्रति संकल्पित वीर शासक एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है।
महापौर ने आगे कहा कि जब पूरे हिन्दुस्तान में अकबर का साम्राज्य स्थापित हो रहा था, तब वे 16वीं शताब्दी में अकेले राजा थे जिन्होंने अकबर के सामने खड़े होने का साहस किया। वे जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन कभी भी स्वंय को अकबर के हवाले नहीं किया। जब मेवाङ की सत्ता राणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाङ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाङ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था। राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे और अकबर के सामने आत्मसर्मपण नही किये और जंगल-जंगल भटकते हुए तृण-मूल व घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी व बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया।
आज भी महाराणा प्रताप का नाम असंख्य भारतीयों के लिये प्रेरणा स्रोत है। राणा प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी है। वह अजर अमरता के गौरव तथा मानवता के विजय सूर्य है। राणा प्रताप जी की देशभक्ति पत्थर की अमिट लकीर है।
इस मौके पर मा० राज्यपाल जी ने भी सम्बोधित किया।
इस मौके पर मा० राज्यपाल श्री राम नाईक जी, महापौर संयुक्ता भाटिया , अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर उमाशंकर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।
आज दिनाँक 08/05/2019 को महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर माननीय राज्यपाल श्री राम नाईक एवं महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने हुसैनगंज चौराहे स्थित महाराणा प्रताप की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस मौके पर महापौर श्रीमती संयुक्ता भाटिया ने कहा कि महाराणा प्रताप की वीरता विश्व विख्यात है। उन्होंने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए अपने सिंहासन को छोड़ दिया और जंगलों में अपना जीवन बिताया लेकिन मुग़ल बादशाह अकबर के सामने मरते दम तक अपना शीश नहीं झुकाया। देश की सर्वोच्चता एवं स्वतंत्रता के प्रति संकल्पित वीर शासक एवं महान देशभक्त महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है।
महापौर ने आगे कहा कि जब पूरे हिन्दुस्तान में अकबर का साम्राज्य स्थापित हो रहा था, तब वे 16वीं शताब्दी में अकेले राजा थे जिन्होंने अकबर के सामने खड़े होने का साहस किया। वे जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन कभी भी स्वंय को अकबर के हवाले नहीं किया। जब मेवाङ की सत्ता राणा प्रताप ने संभाली, तब आधा मेवाङ मुगलों के अधीन था और शेष मेवाङ पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिये अकबर प्रयासरत था। राजस्थान के कई परिवार अकबर की शक्ति के आगे घुटने टेक चुके थे, किन्तु महाराणा प्रताप अपने वंश को कायम रखने के लिये संघर्ष करते रहे और अकबर के सामने आत्मसर्मपण नही किये और जंगल-जंगल भटकते हुए तृण-मूल व घास-पात की रोटियों में गुजर-बसर कर पत्नी व बच्चे को विकराल परिस्थितियों में अपने साथ रखते हुए भी उन्होंने कभी धैर्य नहीं खोया।
आज भी महाराणा प्रताप का नाम असंख्य भारतीयों के लिये प्रेरणा स्रोत है। राणा प्रताप का स्वाभिमान भारत माता की पूंजी है। वह अजर अमरता के गौरव तथा मानवता के विजय सूर्य है। राणा प्रताप जी की देशभक्ति पत्थर की अमिट लकीर है।
इस मौके पर मा० राज्यपाल जी ने भी सम्बोधित किया।
इस मौके पर मा० राज्यपाल श्री राम नाईक जी, महापौर संयुक्ता भाटिया , अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर उमाशंकर सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहें।



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