Breaking News

सैंया भये कोतवाल में भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद पर हुआ प्रहार

HTN Live


लखनऊ (सं)। भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद, सिफारिश आदि के चलते हमारे यहां पर कितने प्रतिभावान होते हुए भी योग्य पदों तक नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे ही मुददों को हास्य व परिहास के बीच कलाकारों ने पेश किया। मंगलवार को आस्था नाट्य कला रंगमण्डल समिति की नाट्य समारोह के दूसरे दिन नाटक सैया भये कोतवाल का मंचन राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में किया गया। 
कोतवाल ही निकला चोर संवाद से ही नाटक की शुरुआत हुई। सूरजपुर राज्य का राजा बेहद ही लापरवाह है। एक दिन राज्य के कोतवाल का देहांत हो जाता है। अय्याशी में डूबा राजा अपने अनपढ़ और गवार साले को कोतवाल बना देता है। जिससे हवलदार और सिपाही निराश हो जाते है। दिन ब दिन हालात बिगडऩे लगते है तो हवलदार अपनी प्रेमिका मैनाबाई के साथ योजना बनता है। मैना कोतवाल को अपने प्रेम जाल में फंसाकर उससे महल से कीमती सामान चुराने को कहती है। कोतवाल उसकी हर बात मानता है और एक दिन मैना राजा का छपरी पलंग मांगती है तो कोतवाल कहता है कि यदि मैं राजा का छपरी पलंग लाकर दूंगा तो तुम्हे मुझसे शादी करनी पड़ेगी, जिस पर मैना हां कर देती है। छपरी पलंग चोरी होने से परेशान राजा को हवलदार सारी बात बता देता है। भूत बंगले में शादी के दौरान राजा पंडित बनकर पहुंच जाता है और उनको रंगे हाथ पकड़ लेता है। राजा को अपनी लापरवाही का एहसास होता है वो हवलदार को कोतवाल बना देता है। बसंत सबनीस की लिखी कहानी को झरना श्रीवास्तव के निर्देशन में पेश किया गया। नाटक में धनराज बाजपेयी, अक्षय गौड़, मोहित यादव, अनुस्मिथ, अनुपम और हर्षित आदि ने अभिनय किया।

No comments