इंजन के 57 डिग्री में भी लोको पायलट नहीं छोड़ते रोजा
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ड्यूटी के साथ साथ रोजा रखकर कर रहे हैं अल्लाह की इबादत
लखनऊ (सं)। 15 घंटे का लम्बा रोजा, 57 डिग्री रेल इंजन का तापमान, लम्बा सफर और समय के साथ नमाज की अदायगी। कुछ इस तरह से रेलवे में तैनात लोको पायलट अपने फर्ज के साथ अल्लाह की इबादत कर रहे हैं। उनका कहना है कि लोको में गर्मी तो बहुत होती है लेकिन माहे मुबारक में रोजे का सवाब कैसे छोड़ दें।
इस गर्म में जहां रोजेदार सड़क पर चलने फिरने में गुरेज कर रहे हैं। वहीं उससे ज्यादा गर्मी में लोको पायलट रोजा रख कर अल्लाह की इबादत कर रहे हैं और अपना फर्ज भी अदा कर रहे हैं।
उत्तर रेलवे मंडल में तैनात लोको पायलट मोहम्मद मुस्लिम खान काफी समय से रोजा रख रहे हैं। वह बताते हैं कि बाहर के तापमान से लोको गर्मी बहुत ज्यादा होती है लेकिन रमजान भी बस तीस दिन का होता है। कई बार ऐसा हुआ कि रात को ट्रेन लेकर जाना है। जल्दी में सहरी का सामान रखना भूल गये तो लोको में ही दो गिलास पानी पीकर रोजा रख लिया। पूर्वोत्तर रेलवे के लोको पायलट मुर्शीद अख्तर बताते हैं कि कभी कभी तो लोको का तामपान 57 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऐसे में रोजे में सिर पर पानी से भीगे गमछे रख कर ट्रेन चलानी पड़ती है। इफ्तार के लिए घर से खाने पीने का सामान लेकर ही रवाना होता हूं।
सिग्नल और क्रासिंग पर पढ़ते हैं नमाज
लोको पायलट आले मोहम्मद जैदी व सहायक लोको पायलट मेहदी अब्बास बताते हैं कि कल ट्रेन थोड़ा जल्दी आ गयी। इफ्तार छोड़कर स्टेशन पहुंच गये और ट्रेन में इफ्तार किया। क्रासिंग या फिर सिग्नल पर ट्रेन रूकने पर जल्दी से लोको पर ही नमाज पढ़ लेता हूं।

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