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हैदर कैनाल का बदलेगा रूप, नाले पर बनेगा सोलर पार्क

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एसटीपी योजना में होगा बदलाव, मलेशिया जायेगा दल 
लखनऊ। हैदर कैनाल नाले पर सोलर पार्क बनाया जायेगा। नाले के पानी के शोधन के लिए बन रहे 120 मिलीयन लीटर डेली (एमएलडी) क्षमता के एसटीपी को कवर करने का प्रस्ताव है। हैदर कैनाल नाले के ऊपर बन रहे एसटीपी में इस बड़े बदलाव के अध्ययन के लिए एक विशेषज्ञों का दल मलेशिया जायेगा। दल मलेशिया में बने एक कर्वड एसटीपी का अध्ययन करेगा। सबुकछ ठीक रहा तो हैदर कैनाल के नाले की गंदगी न केवल साफ  होगी बल्कि बिजली उत्पादन का भी केन्द्र्र बनेगी। गोमती नदी में फिलहाल करीब आठ सौ मिलीयन लीटर डेली (एमएलडी) गंदगी नाले उड़ेल रहे हैं। राजधानी में 56 एमएलडी के दौलतगंज एसटीपी के साथ ही 345 एमएलडी का भरवारा एसटीपी है। इनकी कुल क्षमता ही नालों के पानी के मुकाबले आधी है। गोमती नदी की डाउन स्ट्रीम में गिर रहा हैदर कैनाल फिलहाल गोमती नदी को स्वच्छ बनाने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। मुख्यमंत्री आवास से कुछ फासले पर स्थित हैदर कैनाल नाला करीब 180 एमएलडी गंदा पानी सीधे गोमती में उड़ेलता है। नाले का साठ एमएलडी पानी तो शोधन के लिए भरवारा एसटीपी ले जाया जाता है पर बाकी 120 एमएलडी के शोधन का कोई प्रबंध नहीं है। राज्य सरकार ने कुछ समय पहले हैदर कैनाल नाले के किनारे 120 एमएलडी क्षमता के एसटीपी बनाने को मंजूरी दी थी। मुम्बई की शपूरजी पलूनजी को इसका जिम्मा दिया गया था। एसबीआर तकनीक पर बन रहे एसटीपी के दौरे पर आये विशेषज्ञ दल ने मलेशिया मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया गया था। मलेशिया में एसटीपी को कवर करके सोलर पार्क अथवा पौधारोपण किया गया है। लखनऊ की परिस्थितियों में इस मॉडल को अपनाने के लिए दल अपनी रिपोर्ट देगा। मलेशिया पैटर्न अपनाने के लिए फिलहाल एसटीपी का काम भी रोका गया है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर एसटीपी पर छत बनाकर सोलर पार्क बनाया गया तो उससे न केवल एसटीपी के संचालन में लगने वाली बिजली को बचाया जा सकेगा बल्कि बिजली बेचकर मुनाफा भी कमाया जा सकेगा। हैदर कैनाल एसटीपी पर सीवर से बिजली भी बनायी जायेगी। जल निगम के विशेषज्ञों के अध्ययन में साफ हुआ कि अगर सीवरेज का (बीओडी) बायोलॉजीकल आक्सीजन डिमाण्ड अधिक रहा तो उसकी मदद से बिजली बनायी जा सकती है। एसटीपी के डिजाइन में बदलाव करके बिजली बनाने की योजना को शामिल किया गया है। 

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