छावनी के लोगों को चुनाव बाद मिलेगी सीवेज की सौगात
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आचार संहिता हटते ही 48 करोड़ की योजना पर शुरु होगा काम
पांच एसटीपी का निर्माण व सिविल एरिया में बिछेगी सीवर लाइन
लखनऊ। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के साथ ही छावनीवासियों की सीवेज की सुविधा मुहैया करने का सपना सच हो सकेगा। वैसे यह सपना छावनी के नागरिकों को कई दशकों से दिखाया जा रहा है। इस बार बनी करीब 48 करोड़ की कार्ययोजना का क्रियान्वित होना इसलिए तय हो चुका है कि क्योंकि काफी मंथन के बाद इसे रक्षा मंत्रालय की मंजूरी मिलने के साथ ही अनुदान की दो किस्तों के रूप में दस करोड़ रुपये भी कैण्ट बोर्ड की तिजोरी में आ चुके हैं। मंजूर कार्य योजना के तहत छावनी के सिविल एरिया में पांच एसटीपी, सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लांट बनने हैं। एसटीपी व सीवर लाइन के लिए कौन सी फर्म काम करेगी इसको लेकर करीब नौ माह तक खासी उठापटक चली। छावनी परिषद सदन की कई बैठकों में यह मामला आया और निर्वाचित सदस्यों के साथ ही प्रशासन की ओर से भी अपने-अपने तर्क रखे गये। निजी संस्था की जगह अनुभवी संस्था या फिर किसी सरकारी एजेन्सी से भी यह काम कराने पर खासा मंथन हुआ। ऐसे में कार्ययोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए मेरठ की फर्म आरसीसी डेवलपर्स लिमिटेड की निविदा को उचित मानते हुए इसे मंजूर कर एग्रीमेन्ट हुआ। फर्म को वैसे तो कार्य का वर्क आर्डर दे दिया गया है पर इसी बीच चुनाव आचार संहिता लगी होने के कारण अब चुनाव बाद ही काम शुरू कराने की तैयारी पूरी कर चुकी है। सम्बन्धित फर्म के साथ कैण्ट बोर्ड का जो एग्रीमेन्ट हुआ है उसके तहत संस्था को पांच वर्ष के भीतर ही चयनित पांचों स्थलों पर निर्धारित क्षमता वाले एसटीपी का निर्माण कराने के साथ ही समूचे सिविल एरिया में सीवर लाइन बिछवाकर सीवेज व्यवस्था की सुविधा का संचालन सुनिश्चित कराना होगा। ताकि क्षेत्रीय नागरिक सीवर लाइन से अपने कनेक्शन जुड़वा सकें। सीवेज की कार्य योजना को छावनी मे अमलीजामा पहनाने वाली फर्म को जहां पांच वर्ष में अपना काम शुरू कर सीवर लाइन और एसटीपी का संचालन शुरू कराना होगा वहीं इसके अगले पांच वर्ष तक उसे इन सभी का मेन्टेनेन्स का जिम्मा भी उठाना होगा। इस दौरान यदि इस कार्ययोजना में किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलती है या फिर कोई व्यावधान इत्यादि आता है तो इसे दूर कराने की जिम्मेदारी सम्बन्धित फर्म की ही रहेगी। दशकों से सीवेज सुविधा के लिए तरस रहे छावनी क्षेत्र को इस बार सीवेज की इस महत्वाकांक्षी योजना की अनौपचारिक मंजूरी रक्षा मंत्रालय से पिछले वर्ष में ही मिल चुकी थी। असल में कैण्ट बोर्ड लखनऊ के तत्कालीन उपाध्यक्ष प्रमोद शर्मा के नेतृत्व में निर्वाचित सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल मई-2018 में नयी दिल्ली जाकर राजधानी के सांसद के साथ ही केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह व केन्द्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से मिला था। जिसमें लखनऊ सहित अन्य छावनियों में सीवेज की सुविधा मुहैया कराने की मांग उठायी गयी थी और रक्षा मंत्री ने इसके लिए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया था। यही आश्वासन अब रंग लाता दिख रहा है।

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