हाय हैंडसम नाटक का हुआ मंचन
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लखनऊ (सं)। उम्र इंसान की होती है, उसकी ख्वाहिशों की नहीं। जमाना कितना भी बदले लेकिन इंसान का दिल कभी आउटडेटेड नहीं होता और ये बात कर्नल कपूर पर बखूबी लागू होती है। कर्नल कपूर नौकरी से रिटायर हो चुके हैं लेकिन जिदंगी से नहीं। जमाने के साथ कदम मिलाकर कैसे चलना है, जिंदगी को भरपूर कैसे जीना है कर्नल कपूर ने लोगों को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में मंचित नाटक हाय हैंडसम में बताया।
आस्था नाट्य कला रंगमण्डल समिति की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नाट्य समारोह में नाटक हाय हैंडसम का मंचन हुआ। जिसकी कहानी आर्मी से रिटायर कर्नल कपूर की जिंदगी के इर्द गिर्द घूमती है। नाटक के लेखक जयवर्धन हैं और निर्देशन रत्ना अग्रवाल ने किया। कहानी की बात करें तो कर्नल कपूर बिंदास तरीके से जिन्दगी जी रहे हैं। लेकिन उनका बेटा सीधा साधा और पूजा पाठ करने वाला लड़का है। वहीं बहू मॉर्डन जमाने की लड़की है। कर्नल अकेलेपन की वजह से ज्यादातर वक्त अपने दोस्तों के साथ गुजारते हैं। इसी बीच उनकी बहु मंदा की मां सीता देवी उनके घर आती हैं। बस यहीं से कर्नल की जिंदगी में उथल पुथल शुरू हो जाती है। तमाम उठा पटक के बाद कर्नल और सीता देवी शादी कर लेते हैं। जिससे उनके बच्चे बिल्कुल खुश नहीं हैं। मगर कर्नल कहते हैं कि जब बच्चे अपने हिसाब से जी रहे हैं तो हमें ऐसा करने का हक क्यों नहीं है। बात में बच्चे उनकी शादी से राजी हो जाते हैं। कुल मिलाकर नाटक ढेर सारे हंसी ठहाकों के बीच यह संदेश दे गया कि जीवन का कोई भी दौर अकेले काटना मुश्किल होता है और अगर घर के बुजुर्ग अकेले हैं तो इस बात का ध्यान उनके बच्चों को रखना चाहिये कि उन्हें अकेलापन महसूस न हो। नाटक में मुस्तकीम सुलेमानी, रत्ना अग्रवाल, आदित्य विश्वकर्मा, पावनी और विमलेन्द्र आदि ने अभिनय किया।

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