चौक के नक्खास मार्केट में लगी भीषण आग
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अस्थाई दुकानों में लगी आग, 23 दुकान जलकर राख
9 दमकल गाडिय़ों ने तीन घंटे में आग पर पाया काबू
22 लाख रुपये माल का बताया गया नुकसान
दमकल की गाड़ी को पहुंचने में लगी देर
लखनऊ, 12 अप्रैल।
चौक के नक्खास इलाके में बनी अस्थाई दुकानों में अचानक आग लग गयी। देखते ही देखते आग ने एक के बाद एक 23 दुकानों को अपने चपेट में ले लिया। दुकानों से आग की लपट देख लोगों ने सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को दी। मौके पर पहुंची दमकल की 9 गाडिय़ों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद किसी तरह आग पर काबू पाया, पर दुकानों में रखा हजारों का माल जलकर राख हो गया। सभी दुकानदारों ने करीब 22 लाख रुपये माल के जलने की सूची दी है।
सीओ चौक दुर्गा प्रसाद ने बताया कि चौक के नक्खास इलाके में रेडीमेट कपड़े, बर्तन, चूड़ी, क्रॉकरी और पर्स की दर्जनों दुकान हैं। यह सभी दुकानों ने अस्थाई है और बांस, बल्ली, और प्लास्टिक की पन्नियों से बनी हैं। बताया जाता है कि शुक्रवार की सुबह करीब चार बजे लोगों ने कुछ दुकानों में आग की लपट निकलती देखी। आग की लपेट देखते ही लोगों ने शोर मचा दिया। शोर होते ही आसपास के लोग जमा हो गये। कुछ लोगों ने पानी डालकर आग बुझाने की भी कोशिश पर पर देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने 4.36 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को आग की सूचना दी। सूचना मिलते ही मौके पर सबसे पहले चौक पुलिस और चौक फायर स्टेशन से दमकल की दो गाडिय़ां पहुंची। आग एक के बाद एक दुकान में लगती ही जा रही थी। आग का विकराल रूप देख दमकल कर्मियों ने मदद के लिए और गाडिय़ों को बुलाया। इसके बाद चौक फायर स्टेशन से एक, हजरतगंज और आलमबाग फायर स्टेशन से कुल 9 गाडिय़ों को मौके पर आग बुझाने के काम में लगाया गया। अस्थाई दुकान में रखा सामान भी ऐसा था कि आग पकड़ते ही धूं-धूं करके जल रहा था। दमकल कर्मियों ने इसके बाद दो तरफ से मिलकर आग बुझाने का काम शुरू किया। तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह साढ़े साते बजे दुकानों में लगी आग पर काबू तो पाया गया पर इस अग्निकाण्ड में 23 दुकानें और उनमें रखा माल जलकर राख हो गया।
आग देख दुकानदारों के छलके आंसू
चौक के नक्खास बाजार में इस तरह की सैकड़ो दुकाने हैं। इन दुकान के मालिकों की पूरी रोजी रोटी इन्हीं दुकानों से चलती है। दुकानों में लगी आग की खबर जैसे ही दुकान के मालिकों को मिली वह लोग सन्न रह गये। धीरे-धीरे दुकान मालिक मौके पर पहुंचने लगे। अग्निकाण्ड में जिन दुकानदारों की दुकान जली उनको गहरा सदमा लगा। मौके पर मौजूद कई दुकानदारों ने दुकान में लगी आग देख अंदर जाने की कोशिश भी की पर वहां मौजूद लोगों ने उनको पकड़ लिया। दुकानदार चौक निवासी इंतजार ने बताया कि उनकी रेडीमेड कपड़े की दुकान थी। दुकान में आग से ढाई लाख रुपये का माल और कागज जलकर राख हो गया। उन्होंने बताया कि दुकान पर वह और उनका बेटा बैठता था और इसी दुकान से उनका परिवार भी चलता था। इस अग्निकाण्ड ने उनका सब कुछ छीन लिया। अब उनके सामने आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है। इंतजार की तरह बाकी दुकानदारों का भी यही हाल है। मौके पर मौजूद कई दुकानदार तो अपनी जली हुई दुकान देख कर सिर पीट कर रो पड़े। माल के साथ हिसाब-किताब का लेखाजोखा सब कुछ जल गया था।
दमकल की गाड़ी को पहुंचने में लगी देर
अग्निकाण्ड के पीडि़त दुकानदारों का आरोप है कि अगर समय रहते हुए दमकल की गाड़ी पहुंच जाती तो शायद आग इतना भयानक रूप नहीं ले पाती। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि पुलिस को मदद के लिए फोन करने पर कई बार फोन ही नहीं लगा। कुछ देर के बाद जब फोन लगा तब सूचना दी गयी। सूचना के बाद भी चौक फायर स्टेशन से दमकल की गाड़ी को पहुंचने में समय लगा और सिर्फ दो गाड़ी ही मौके पर सबसे पहले आयीं। आग का विकराल रूप देखने के बाद दमकल कर्मियों ने मदद के लिए अन्य गाडिय़ों को बुलाया। दुकानदारों का आरोप है कि अगर समय रहते ही गाडिय़ोंं को बुलाया गया होता तो आग पहले ही बुझायी जा सकती थी।
फायर स्टेशन जाकर दी गयी सूचना
मौके पर मौजूद कुछ लोगोंं का आरोप है कि आग की लपटें देख पुलिस को फोन करने की कोशिश की गयी पर फोन नहीं लगा। इसी बीच कुछ लोग सूचना देने के लिए चौक फायर स्टेशन बाइक से भेजे गये। इस बीच कंट्रोल रूम को फोन लग गया, वहीं बाइक सवार युवक भी चौक फायर स्टेशन पहुंचे और आग की सूचना दी। वहीं इस आरोप को चौक फायर स्टेशन के एफएसओ ने गलत बताया है।
दमकल गाडिय़ों को नहीं मिला पानी
चौक फायर स्टेशन के एफएसओ जितेन्द्र सिंह ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल की गाडिय़ां मौके पर पहुंच गयी थीं। आग की स्थिति को देखते हुए बाकी फायर स्टेशन से भी गाडिय़ों को बुला लिया गया था। उहोंने बताया कि मौके पर पानी का कोई हाइड्रेंड नहीं था। इस वजह से गाडिय़ों को बार-बार पानी लेने के लिए चौक फायर स्टेशन, जल निगम और एवरेडी जाना पड़ रहा था। वहीं दुकान में रखा सामान भी ऐसा था कि मात्र एक चिंगारी भी दुकान जलाने के लिए काफी थी।
बिजली के तारों से निकली चिंगारी बनी वजह
दुकानों में आग कैसे लगी, फिलहाल इस बारे में किसी को कुछ सही से नहीं पता, पर मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस और दमकल कर्मियों को बताया कि दुकानों के ऊपर से बिजली के कई तार गये हैं। बिजली के तारों के आपस में टकराने से चिंगारियां निकली और नीचे गिरी, जिन्होंने दुकानों में आग लगा दी और देखते ही देखते आपस में सटी दुकानों में आग लगती चली गयी।
अग्निकाण्ड मेंं इनकी दुुकानें जली
वजीरगंज निवासी मतीन की होजरी की दुकान 55 हजार का नुकसान, चौक निवासी मंजूर की लेडीज पर्स की दुकान 75 हजार का नुकसान, वजीरगंज निवासी अनवर अली की चूड़ी की दुकान 80 हजार का नुकसान, सआदतगंज निवासी मोहम्मद आकिल की रेडीमेड कपड़े की दुकान 70 हजार का नुकसान, दुबग्गा निवासी मंजू लोधी की अंडर गारमेंट की दुकान 90 हजार का नुकसान, तकिया हाजी निवासी मोम्मद आसिफ की रेडीमेड कपड़े की दुकान 90 हजार का नुकसान, चौक निवासी मोहम्मद मुम्ताज की लेडीज पर्स की दुकान 2.5 लाख का नुकसान, आलमबाग निवासी रजिया बेगम की चूड़ी की दुकान 90 हजार का नुकसान, आलमबाग निवासी अन्नू की चूड़ी की दुकान एक लाख का नुकसान, सआदतगंज निवासी सलीम की दुकान 80 हजार का नुकसान, चौक निवासी मोहम्मद उस्मान की क्राकरी की दुकान 50 हजार का नुकसान, चौक निवासी मोहम्मद शेख की चूड़ी की दुकान 85 हजार का नुकसान, आलमबाग निवासी मोहम्मद फहीम की चूड़ी की दुकान एक लाख का नुकसान, ठाकुरगंज निवासी हशमत की चूड़ी की दुकान एक लाख का नुकसान, बजारखाला निवासी मोहम्मद आकिब की बर्तन की दुकान 90 हजार का नुकसान, ऐशबाग निवासी वसीम की चूड़ी की दुकान 90 हजार का नुकसान, चौक निवासी इंतजार की रेडीमेड कपड़े की दुकान 2.5 लाख का नुकसान, चौक निवासी मेराज अहमद की होजरी की दुकान एक लाख का नुकसान, ठाकुरगंज निवासी मोहम्मद सलीम की चूड़ी की दुकान 90 हजार का नुकसान, चौक निवासी इश्तियाक की चूड़ी की दुकान 70 हजार का नुकसान, चौक निवासी अजहर अली की चूड़ी की दुकान 90 हजार का नुकसान और चौक निवासी शौकत की कपड़े की दुकान में 75 हजार का नुकसान हुआ है।
मुआवेज की उठी मांग
विक्टोरिया स्ट्रीट फुटपथ व्यापारी समिति के अध्यक्ष मेराज ने बताया कि इस अग्निकाण्ड से कई दुकानदारों के घर प्रभावित होंगे। उन लोगों ने सरकार से पीडि़त दुकानदारों को मुआवजा दिये जाने की मांग की है, ताकि पीडि़त दुकानदार किसी तरह फिर से अपना कारोबार शुरू कर सकें।
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