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चुनावी मौसम आते ही राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू

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लखनऊ (सं)। चुनावी मौसम आते ही राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है। सभी पार्टियां एक दूसरे पर तरह तरह के आरोप लगाना शुरू कर देती हैं। कोई विरोधी को भ्रष्टï साबित करने में जुटा होता है तो कोई कुर्सी का लालची और वगैरह वगैरह। सभी एक दूसरे को जनता के सामने नीचा दिखाने और खुद को साफ सुथरा और सच्चा हमदर्द बताने की कोशिशें करता है। हालांकि जनता वोटिंग करके उनको आईना भले ही दिखा देती है, लेकिन इन्हीं आरोप और प्रत्यारोप के दौरान राजनेताओं की भाषा मर्यादा के बाहर भी चली जाती हैं। नेताओं का काम है अपने को ऊपर दिखाना और विरोधी को नीचे। मगर इन सबके बीच नेताओं की जबान इस कदर अमर्यादित हो जाती है कि लगता ही नहीं कि वो चुनाव लडऩे के काबिल हैं। गालियों से लेकर पारिवारिक बातें तक इनकी जुबान से निकल आती हैं। साथ ही नेताओं द्वारा धार्मिक कटाक्ष भी खूब होने लगते हैं। लगता ऐसा है कि यह भूल जाते हैं कि इनको वोट चाहिये न कि किसी का दिल दुखाना है। नेताओं की इसी बदजुबानी का अक्सर उनको खुद खामियाजा भुगतना पड़ता है। जनता उनकी बदजुबानी की ही वजह से उनका किरदार पहचान लेती है और अपनी वोट की ताकत दिखाकर उनके सपनों को मिट्टी मिला देती है। नेताओं की अभद्र भाषा, बदजुबानी और मर्यादा के बाहर जाने वाली वाणी को लेकर जब गंगा जमुनी तहजीब वाले इस शहर के आम नागरिकों से पूछा तो उन्होंने अपनी राय अलग अलग तरीकों से बयां की।

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