चुनावी महासमर में पूर्व मैंदानी खिलाडिय़ों की होगी जंग
HTN Live
मोहम्मद शानू
खिलाडिय़ों के लिए लोक सभा चुनाव ओलम्पिक से कम नहीं
ओलम्पियन राज्य वर्धन को कॉमनवेल्थ स्वर्ण विजेता पुनिया देंगी टक्कर
लखनऊ। 2019 का लोकसभा चुनाव काफी रोचक हो रहा है। जहां एक तरफ दिग्गज नेता एक से दूसरी पार्टियों में भरोसा करके अपना रुख बदल रहे हैं, वहीं खेल मैंदान में पहचान बना चुके खिलाड़ी भी चुनाव से अछूते नहीं दिख रहे। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि यह चुनाव पूर्व खिलाडिय़ों के लिए ओलम्पिक से कम नहीं है। यही वजह है कि देश के कई अलग-अलग राज्यों से खिलाड़ी भी पहले कि तरह मैंदान में उतारे जा रहे हैं। कुछ खिलाड़ी चुनावी मैंदान में हैं तो कुछ चुनावी प्रचार में लगे हैं।
अंतरराष्ट्रीय खेलों में देश का मान बढ़ाने वाले कई खिलाड़ी भी इस बार के लोकसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। 2004 में ओलंपिक रजत पदक जीतने वाले राज्यवर्धन सिंह राठौर 2014 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद केन्द्रीय खेल मंत्रालय की भी बागडोर देख रहे हैं। इस बार राज्यवर्धन सिंह राठौर को एक खिलाड़ी ही टक्कर देने जा रहा है।
राज्यवर्धन सिंह राठौर राजस्थान की जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके खिलाफ कांग्रेस ने 2010 के कॉमनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली कृष्णा पुनिया को प्रत्याशी बनाया है। कृष्णा पुनिया ने चक्का फेंक प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था जबकि राज्यवर्धन सिंह राठौर ने शूटिंग में रजत पदक अपने नाम किया था। कांग्रेस ने 9 उम्मीदवारों की जो लिस्ट निकाली है जिसमें 6 उम्मीदवार राजस्थान के हैं और इन्हीं 6 में से एक नाम कृष्णा पुनिया का भी है। कृष्णा पुनिया फिलहाल राजस्थान विधानसभा में विधायक हैं। कृष्णा पुनिया 2013 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुई थीं और राजस्थान की सादुलपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन 2013 में वह चुनाव हार गई थीं। वहीं राज्यवर्धन सिंह राठौर 2013 में सेना में कर्नल के पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे और जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। राज्यवर्धन सिंह राठौर चुनाव जीते थे और फिलहाल केंद्र सरकार में मंत्री हैं।
दिग्गज क्रिकेटर गौतम गंभीर भी राजनीति के मैदान में भी दिख सकते हैं। जानकारी के मुताबिक पिछले दो साल से टीम इंडिया से बाहर चल रहे गौतम गंभीर ने बीजेपी का हाथ थाम लिया है। जानकारी के अनुसार बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में गौतम गंभीर को दिल्ली से टिकट दिया है। इससे पहले मोहम्मद कैफ , मोहम्मद अजहरुद्दीन, प्रवीण कुमार, नवजोत सिंह सिद्धू और विनोद कांबली जैसे क्रिकेटर भी चुनाव लड़ चुके हैं। नवजोत सिंह सिद्धू अभी पंजाब सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं, वहीं एक और पूर्व क्रिकेटर चेतन चौहान यूपी सरकार में खेल मंत्री हैं। क्रिकेट और राजनीति का रिश्ता काफी पुराना है। कई बार ऐसा देखा गया है कि क्रिकेट के मैंदान पर शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी राजनीति के मैदान पर भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं लेकिन कई बार अच्छे खिलाडिय़ों ने भी राजनीति में अपना विकेट आसानी से गंवा दिया। टीम इंडिया के पूर्व गेंदबाज और रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की कप्तानी कर चुके प्रवीण कुमार चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के साथ दिख सकते हैं।
राजनीति में सफल होने वाले क्रिकेटरों में पहला नाम कीर्ति आजाद का है। एक खिलाड़ी के रूप में कीर्ति जितनी कीर्ति नहीं कमा पाये उसे ज्यादा उन्होंने राजनीति में कमाई। कीर्ति आजाद 1993 से 1998 तक दिल्ली विधानसभा में बीजेपी के विधायक रहे। साल 1999 में दरभंगा लोकसभा सीट पर बीजेपी की तरफ से चुनाव लड़कर वह सांसद बने। इसके बाद 2009 और 2014 में इस चुनाव क्षेत्र से उन्होंने जीत दर्ज की। जो कि इस बार भी चुनावी मैंदान में अपनी बादशाहत दिखाने उतर सकते हैं। कीर्ति आजाद के बाद नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में सफल होने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज रहे सिद्धू राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी माने जाते हैं। वह पंजाब के अमृतसर सीट से तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा सांसद रहे। मौजूदा समय में वह पंजाब के उप मुख्यमंत्री हें।
लक्ष्मी रतन शुक्ल टीम इंडिया के पूर्व ऑल राउंडर लक्ष्मि रतन शुक्ल भी राजनीति के मैदान पर सफल होते हुए नजर आ रहे हैं। इस साल वेस्ट बंगाल में शुक्ल चुनावी मैंदान में दिख सकते हैं। वैसे चुनावी प्रचार में उनका नाम सामने आने लगा है।
सचिन तेंदुलकर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर राजनीति के मैदान पर काफी सेफ खेलते हुए नजर आते हैं। वह 2013 से राज्यसभा के सांसद हैं लेकिन वह खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखते हैं। साल 2014 में कांग्रेस उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ाना चाहती थी लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया था। टेस्ट और एकदिवसीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले सचिन राज्यसभा के अंदर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये हैं।
टीम इंडिया के पूर्व कप्तान चेतन चौहान भी दो बार लोक सभा सांसद रह चुके हैं। वह 1991 और 1998 में अमरोहा लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में वह चुनाव जीत चुके हैं। मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश सरकार में खेल मंत्री हैं। इसके अलावा एस श्रीसंथ भी भाजपा के साथ चंनावी मैंदान में नजर आ सकते हैं। टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ भी राजनीति मे विफल हुए हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में मोहम्मद कैफ कांग्रेस की टिकट से उत्तर प्रदेश के फूलपुर सीट से चुनाव लड़ते हुए हार गये थे। मोहम्मद अजहरुद्दीन पूर्व भारतीय कप्तान ने खेल का मैदान छोड़ा तो हार का सामना करना पड़ा। वह 2014 के लोकसभा चुनाव में हार गये थे। उनके हारने की सबसे बड़ी वजह थी अपना मैदान छोड़कर दूसरे मैदान पर खेलना। साल 2009 में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद सीट से चुनाव जीतकर सांसद बनने वाले अजहरुद्दीन 2014 में राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर सीट से चुनाव लड़े थे और हार गये थे।
तेंदुलकर के दोस्त विनोद कांबली भी राजनीति के पिच पर फेल हो चुके हैं। उन्होंने 2009 में लोक भारती पार्टी की तरफ से महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव लड़ा था और हार गए थे। टीम इंडिया के पूर्व ऑल-राउंडर मनोज प्रभाकर भी राजनीति में सफल नहीं हो पाये। साल 1996 में मनोज प्रभाकर साउथ दिल्ली क्षेत्र से चुनाव लड़ते हुए बुरी तरह हार गये थे। मगर राजनीति के दिग्गजों की माने तो इस बार लोकसभा चुनाव में देश के कई पूर्व खिलाड़ी चुनावी मैंदान में उतर रहे हैं। वहीं कुछ वे खिलाड़ी जो चुनावी पारियां हार चुके हैं। वह चुनावी प्रचार में जनता के बीच जाकर वोट करने की अपील कर सकते हैं।

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