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राजनीति की सीढ़ी, खीरी की सियासत में एक और पीढ़ी

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दादा-दादी और पिता की कर्मभूमि पर गठबंधन से पूर्वी की सियासी पारी का आगाज
मोहम्मद शानू 
लखनऊ। नेपाल सीमा से समेत राज्य के पीलीभीत, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर बहराइच जिलों लगा लखीमपुर खीरी का प्रदेश की नही देश के पर्यटन के क्षेत्र में खास स्थान है। दुधवा नेशनल पार्क का देश में ही नहीं दुनिया में विख्यात है। देश विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक दुधवा पहुंचते है। गर्मी से चढ़ते पारे के बीच इन दिनों लखीमपुर खीरी में भी चुनावी ताप उठान की तरफ है। खीरी में चौथे चरण में वोट डाले जाएंगे। लोकसभा सीट खीरी इस समय भारतीय जनता पार्टी के पास है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर में भाजपा के अजय मिश्र टेनी बड़े अंतर से जीतकर सांसद पहुंचे थे। भाजपा ने मिश्रा पर फिर भरोसा जताया है। लेकिन इस बार उनके सामने गठबंधन बड़ी चुनौती है। लखीमपुर खीरी में आजादी के बाद अब तक हुए कुल 16 चुनाव में से 10 चुनाव में एक ही परिवार का कब्जा रहा। पुराने कांग्रेसी रहे बाल गोविन्द वर्मा लखीमपुर खीरी से चार बार सांसद रहे। उनके बाद उनकी पत्नी उषा वर्मा भी कांग्रेस से तीन बार लोकसभा जींती। बाद में उनके पुत्र रवि प्रकाश वर्मा समाजवादी पार्टी से तीन बार लोक सभा चुनाव जीतकर सांसद पहुंचे। रवि प्रकाश वर्मा वर्तमान में समाजवादी पार्टी के राष्टï्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य है। रवि प्रकाश वर्मा 2009 और 2014 का लोकभा चुनाव पहले कांग्रेस से फिर भाजपा से हार गए। इस चुनाव में उनकी बेटी पूर्वी वर्मा दादा-दादी और पिता की विरासत पर कब्जा जमाने को चुनावी मैदान में है। पूर्वी वर्मा सपा-बसपा गठबंधन से सपा के टिकट पर चुनावी मैदान में है। वहीं कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद जफर अली नकवी पर फिर दांव लगाया है। खीरी के राजनैतिक इतिहास की बात करे तो रवि प्रकाश वर्मा के परिवार का लम्बे समय तक दबदबा रहा। रवि प्रकाश वर्मा के पिता बाल गोविन्द वर्मा 1962, 67, 71 और 1980 में चार बार चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। बाल गोविन्द वर्मा के निधन के बाद उनकी पत्नी 1980, 19984 और 1989 में कांग्रेस से चुनाव जीतकर सांसद पहुंची। बाद में रवि प्रकाश वर्मा ने लखीमपुर खीरी पर 1998, 99 और 2004 में सपा का झंडा लहराया। लखीमपुर खीरी में भाजपा 1991, 1996 और 2014 में जीत दर्ज कर चुकी है। इस चुनाव में जहां भाजपा के अजय मिश्रा टेनी और कांग्रेस के जफर अली नकवी दोबारा संसद पहुचंने के लिए संर्घर्र्ष कर रहे हैं वहीं पूर्व वर्मा अपने परिवारिक विरासत का वापस पाने के लिए मैदान में है। पिछले चुनाव में बसपा भी चुनावी मैदान में थी। गठबंधन में सीट सपा के पास आने से बसपा के नेता, कार्यकर्ता और समर्थक पूर्वी वर्मा के साथ खड़े है। चुनाव में सपा के कद्दावर नेता रवि प्रकाश वर्मा की प्रतिष्ठïा दांव पर है। लखीमपुर खीरी में पांच विधानसभा सीटें पलिया, निघासन, गोला गोकरननाथ, श्रीनगर और लखीमपुर है। 2017 के विधानसभा चुनाव में पाचों सीटों पर भाजपा का कब्जा है। लेकिन गठबंधन की गणित ने भाजपा के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा के अजय मिश्र टेनी का 3 लाख 98 हजार 538 वोट मिले थे। बसपा के अरविन्द गिरी दूसरे स्थान पर थे उन्हें 2 लाख 88 हजार 304 वोट मिले। सपा के रवि प्रकाश वर्मा को एक लाख 60 हजार 112 और कांग्रेस के जफर अली नकवी को एक लाख 83 हजार 944 मत मिले थे। खीरी मुस्लिम, कुर्मी और ब्राह्मïण बाहुल्य सीट मानी जाती है। यहां करीब 20 फीसदी मुस्लिम है। 

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