गज फुट इंच से लेकर जोधा अकबर के लेखक को नमन स्वर्गीय केपी सक्सेना की जयंती पर उन्हें स्मृति
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लखनऊ (सं)। अपनी दमदार लेखनी और पटकथा में महारथ हासिल रखने वाले स्वर्गीय केपी सक्सेना लेखन, व्यंग्य के साथ साथ कवि व कई अन्य बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। केपी सक्सेना के दशकों पहले लिखे नाटक आज भी सार्थक नजर आते थे। वो व्यंग्य करने में माहिर थे। एकांकी नाटकों से शुरुआत करने वाले केपी सक्सेना के लिखे नाटक आज भी मंचित होते है।
ऋतिक रौशन और एश्वर्य राय की फिल्म जोधा अकबर के निर्माता आशुतोष गोवारिकर ने जब केपी को फोन करके डायलॉग लिखने को कहा तो केपी ने उनसे कहा कि आप लखनऊ आईये तब मैं डालॉग लिखूंगा। इसके बाद आशुतोष को फिल्म के डायलॉग लिखवाने के लिए लखनऊ केपी सक्सेना के पास आना पड़ा। उस महान लेखक और व्यंगकार केपी सक्सेना की शनिवार को पुण्यतिथि है। केपी सक्सेना ने अपनी लेखनी से शहर का नाम पूरी दुनिया में रौशन किया। इस महान लेखक को आज रंगमंच से लेकर फिल्मी जगत में याद किया जाता है। डॉ. अनिल रस्तोगी बताते है कि केपी सक्सेना ने मुझे फोन किया और कहा कि बहुत ही चैलेजिंग काम मिला है। जोधा अकबर के डायलॉग लिखने के लिए मेरे पास बम्बई से पाऊोन आया है। जिसमें शर्त यह है कि अकबर का किरदार निभा रहे ऋतिक के डायलॉग उर्दू में हो और जोधा का किरदार निभा रही ऐश्वर्या राय के डायलॉग हिन्दी में हो। इतना ही नहीं, दोनों के ही डायलॉग ऐसे होने चाहिये कि दर्शकों की समझ में असानी से आयें। तब मैंने उनसे कहा कि आप यह चैलेंज लिजिये और अगर आप नहीं कर पायेंगे तो यह काम कोई दूसरा कर भी नहीं पायेगा। केपी सक्सेना की कविताएं शुरू में तो लोगों को खूब हंसाती थी, मगर अंत में वो अंदर तक लोगों को झकझोर देती थी। उनके लिखे नाटक ताजमहल में जहां भ्रष्टाचार नजर आता था, वहीं एक वैज्ञानिक प्ले में उनकी सोच दिखती थी। इसके अलावा उनका नाटक गज फुट इंज पूरे देश में अब तक हजारों बार मंचित हो चुका है। हरिशंकर परसाई व शरद जोशी के बाद अगर किसी व्यंग्यकार का नाम लिया जाता है तो वो केपी सक्सेना का है। उन्होंने रेडियो के लिए करीब दो सौ नाटक लिखे उनके कई नाटक तो नेशनल लेवल पर प्रसारित हुए। 2000 में उनको पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। उनकी प्रमुख कृतियों में नया गिरगिट, कोई पत्थर से, मूंछ मूंछ की बात, रहिमन की रेलयात्रा, लखनवी ढंग से, बाप रे बाप आदि शामिल है।

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