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हिन्दी संस्थान में मतदान की अपील के लिए कवि सम्मेलन
लखनऊ (सं)। चुनाव के चलते मतदाता जागरूकता अभियान के तहत सोमवार 8 अप्रैल को शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के यशपाल सभागार में कवि सम्मेलन और लोक संगीत संध्या का आयोजन किया जायेगा। हिन्दी संस्थान के निदेशक शिशिर ने बताया कि इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव भाषा एवं संस्कृति जितेन्द्र कुमार मुख्य अतिथि होंगे। यह कार्यक्रम मुख्य निर्वाचन अधिकारी एल वेंकटेश्वर लू के निर्देशन में हिन्दी संस्थान, संस्कृत संस्थान, भाषा संस्थान, उर्दू अकादमी, सिन्धी अकादमी, पंजाबी अकादमी, दूरदर्शन एवं आकाशवाणी तथा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से आयोजित किया गया है। इस काव्य संध्या एवं लोकरंग कार्यक्रम में प्रख्यात कवि और शायर अपनी रचनाएं पेश करके लोगों से वोट करने की अपील करेंगे।
कहानी संग्रह 'मेरी जनहित याचिका एवं अन्य कहानियांÓ का लोकापर्ण
लखनऊ (सं)। भारतीय जर्नलिस्ट परिषद और अनुभूति संस्थान एवं जन संघर्षी रचनाकार मंच के संयुक्त तत्वाधान में प्रदीप श्रीवास्तव के कहानी संग्रह 'मेरी जनहित याचिका एवं अन्य कहानियांÓ का लोकापर्ण हुआ। यूपी प्रेस क्लब में आयोजित इस अवसर पर परिचर्चा भी आयोजित की गयी। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार शिवमूर्ति ने की। इस अवसर पर हरिचरण प्रकाश, प्रतुल जोशी, राम किशोर एवं पवन कुमार सिंह ने पुस्तक पर अपनी राय रखी। अध्यक्षीय भाषण में शिवमूर्ति ने कहा कि सारे नियम कानून से ऊपर है मानवता। प्रदीप श्रीवास्तव ने पुस्तक के जरिये इस मानवता की प्रबल वकालत की है। मगर प्रदीप अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों पर कहीं कहीं वसुधैव कुटुम्बकम की मान्यता को पीछे छोड़ दिये हैं। पुस्तक लेखन की यात्रा के बारे में रचनाकार प्रदीप ने अपने साहित्यिक अनुभव शेयर किये। प्रदीप श्रीवास्तव ने अपनी कहानियों के बारे में बताया कि ये कहानियां शहरी निम्न मध्यवर्गी जिन्दगी की मुख्यत नकारात्मक स्थितियों का बयान है। उन्होंने कहा कि दरअसल भूमंडलीकरण ने हिन्दुस्तानी समाज को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। विकास और बौद्वकिता की आंधी में मानव मूल्य तिरोहित हुए है। प्रतुल जोशी ने कहा कि प्रदीप की कहानियों में चित्रात्मकता है। पवन सिंह ने इस पुस्तक के माध्यम से यह कहा कि यह समय जनहित याचिकाओं का मौसम है। हरि चरण प्रकाश ने कहा कि भूमण्डलीकरण के पूंजीवाद के व्याभिचार को बढ़ाया है। प्रदीप श्रीवास्तव की कहानियां नव उदारवाद, बाजारवाद और भूमण्डलीकरण की कहानियां है। कार्यक्रम का संचालन डा. अमिता दूबे ने किया।
अभिव्यक्ति पर खतरे बढ़े तो कलाकार भी बन जाये कार्यकर्ता
लखनऊ (सं)। उदयगंज स्थित कैप्टन लक्ष्मी सहगल भवन में जनवादी लेखक संघ ने बैठक की। इस अवसर पर संगठन अध्यक्ष नलिन रंजन सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में लेखकों के सामने चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्हें इन चुनौतियां से मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कहा कि जब अभिव्यक्ति पर खतरे बढ़ गये हों तो कलाकार को भी कार्यकर्ता बन जाना चाहिए। ऐसे में असहमतियों के बाद भी जो साथ चल सके उसे साथ लेकर चलने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया का मंच मिलने के बाद लेखक संगठनों को नये सिरे से पुनर्सृजित होने की जरूरत है जो अपनी सक्रियता से लेखकों को मंच और पहचान दिलाने में सहयोग कर सकें। इस मौके पर जनवादी लेखक संघ लखनऊ इकाई की नई कार्यकारिणी गठित की गयी। इसमें अध्यक्ष नलिन रंजन सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष संध्या सिंह, उपाध्यक्ष सुशीला पुरी, तरुण निशान्त के अलावा संरक्षक मंडल में अवधेश श्रीवास्तव समेत कई लोग मौजूद रहे।

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