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नाटक बेुजुबान बीवी ने दर्शकों को जहां खूब गुदुगुदाया

HTN Live


लखनऊ (सं)। महमिल वेलफेयर सोसायटी की ओर से शनिवार को नाटक बेजुबान बीवी का मंचन किया गया। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में मंचित नाटक की कहानी तकी रौशन की थी जबकि इसका निर्देशन रहमान खान ने किया। नाटक बेुजुबान बीवी ने दर्शकों को जहां खूब गुदुगुदाया तो वहीं महिलाओं की इज्जत करना भी सिखायी।
किसी ने ठीक ही कहा है कि काजी साहब दुबलेक्यों, शहर के अंदेशे से। लेकिन नाटक के मुख्य पात्र शहर काजी अपनी बीवी से परेशान हैं क्योंकि वो गूंगी है। काजी साहब चाहते हैं कि किसी भी तरह वो बोलने लगे। वो डाक्टर और हकीम सभी को दिखाते हैं। आखिरकार उनकी परेशानी दूर होती है और उनकी बीवी बोलने लगती है। मगर काजी साहब की परेशानी तो अब शुरू होती है। वो इतना बोलती है कि काजी साहब की परेशानी बढ़ जाती है। अब एक बार फिर से काजी साहब हकीम के पास जाते हैं ताकि उनकी बीवी पहले जैसे गूंगी हो जाये। लेकिन यह नामुमकिन है। हकीम काजी साहब का मना कर देते हैं लेकिन साथ ही कहते हैं बीवी दोबारा गूंगी नहीं हो सकती है मगर आप जरूर बहरे हो सकते हैं। काजी के कहने पर हकीम उनको बहरा कर देते हैं। इसके बाद शहर के जो मुकदमे काजी साहब के पास आते हैं वो बिना कुछ कहते सुने उसका फैसला सुना देते हैं। नाटक का अंत इस संदेश से होता है कि महिला को बोलने दो, उसे बोलने का अधिकार है। इस हास्य नाटक में इमरान कुरैशी, अहमद निसार, विनीता सिंह, कबीर खान, शंशाक पाण्डेय और सोहेल अख्तर ने अभिनय किया। 

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