चरनदास चोर ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया
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लखनऊ (सं)। संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से मंगलवार को नाटक चरनदास चोर का मंचन किया गया। राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में हबीब तनवीर की लिखी कहानी को आदित्य कुमार शर्मा लिप्टन ने संजय त्रिपाठी के निर्देशन में पेश किया।
नाटक चरनदास चोर चरनदास और एक हवलदार से शुरू होता है। हवलदार और चरनदास के बीच चूहा बिल्ली का खेल जारी है। हवलदार कई दफा चरनदास को पकड़ भी लेता है, मगर वो कोई न कोई चकमा देकर भाग निकलता है। चरनदास कभी किसान को ठगता है तो कभी सेठानी के जेवर ले भागता है। लेकिन चोर होने के बाद भी चरनदास का दिल बहुत बड़ा होता है। वो सेठानी की मजबूरी सुनकर उसके जेवरात उसे वापस कर देता है। उधर हवलदार चरनदास की नाक में दम बना होता है। जिससे बचने के लिए चरनदास एक साधु की शरण में पहुंच जाता है। साधु चरनदास से कोई एक चीज छोडऩे को कहता है तो चरनदास चार चीजों को छोडऩे का प्रण लेता है। धीरे धीरे चरनदास अपनी सत्यवादिता से मशहूर हो जाता है। वो चोरी करके गरीबों को बांट देता है। वो अपनी आखिरी चोरी की इच्छा को पूरा करने के कारण राज्य की रानी के सामने पहुंच जाता है। रानी उसकी सत्यवादिता से प्रभावित होकर उसके सामने शादी करने का ्रप्रस्ताव रख देती हैं। लेकिन वो गुरु को दिये वचन की वजह से शादी से इंकार कर देता है। जिसपर रानी आक्रोश में आकर उसकी हत्या का आदेश दे देती है। अंत में रानी कहती हैं कि जो उसका आदेश नहीं मानेगा उसको इसी प्रकार सजा मिलेगी। नाटक में संजय त्रिपाठी, आदित्य कुमार लिप्टन, अनामिक शुक्ला, अरशद अली, मनोज वर्मा और ध्रुव तिवारी ने अभिनय किया।
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