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आवास विकास ने सीएम को भी नहीं बक्शा, भेजी झूठी रिपोर्ट





लखनऊ। सरकारी दफ्तरों के अधिकारी और बाबू अभी तक आम जनता की आंखों में धूल झोकने का काम कर रहे थे। अब हद यहां तक हो गयी कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने सीएम कार्यालय को भी झूठी रिपोर्ट भेज दी। मुख्यमंत्री के आइजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने वाले एक आंवटी की शिकायत बिना निस्तारण के ही विभाग के अधिकारियों ने निस्तारित की रिपोर्ट भेज दी। शिकायतकर्ता ने जब दोबारा सीएम के यहां शिकायत की तब आवास विकास ने माना कि उससे चूक हो गयी। फ्लैट की कमियां जल्दी दूर करा दी जायेंगी। आवास विकास के यह लिखने के 10 महीने हो गये लेकिन उसने किसी भी आवंटी के फ्लैट की कमियां दूर नहीं करायी। लखनऊ निवासी अनिल कुमार सचान ने आवास विकास परिषद की शिखर एनक्लेव वसुंधरा योजना गाजियाबाद में एक फ्लैट खरीदा था। उन्हें सी 302 नंबर का फ्लैट आवंटित हुआ था। इस फ्लैट मैं तमाम खामियां थी। घटिया निर्माण का भी आरोप है। परिषद ने तमाम आवंटियों को आधे अधूरे व घटिया फ्लैट दिये। कई आवंटियों ने


शिकायतें दर्ज कराई। अनिल कुमार सचान ने भी मुख्यमंत्री के यहां शिकायत दर्ज करायी। आइजीआरएस सेल पर उनकी शिकायत 6 नवंबर 2017 को दर्ज हुई। 5 दिसंबर 2017 को योजना का काम देख रहे अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने मुख्यमंत्री के यहां इस फ्लैट की कमियां दूर करा कर आवंटी को कब्जा हैंड ओवर करने की रिपोर्ट भेज दी। जबकि उन्होंने कोई कमियां दूर ही नहीं कराई। फ्लैट में तमाम कमियां बरकरार थी। अनिल जब मौके पर कब्जा लेने पहुंचे तो पता चला कि फ्लैट में कोई काम ही नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने दोबारा दिसंबर 2017 को मुख्यमंत्री व अन्य उच्च अधिकारियों से फिर शिकायत की। इसके बाद जब सीएम कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गयी तब इंजीनियर सकते में आये। अधिशासी अभियंता राजीव कुमार ने सीएम कार्यालय व आवंटी को पत्र लिखकर कहा कि उनके फ्लैट में जो कमियां रह गयी हैं उसे जल्दी दूर करा दिया जायेगा। इसके बाद 11 जनवरी 2019 को उन्होंने कमियां दूर कराने के लिए पत्र लिखा। बावजूद इसके आज तक कमियों को दूर नहीं कराया गया। फ्लैट के तमाम आवंटी परेशान हैं। आवास विकास परिषद ने दोबारा सीएम कार्यालय को कमियां शीघ्र दूर कराने की रिपोर्ट भेजकर मामले को निस्तारित दिखा दिया। अकेले यही नहीं फ्लैट में रहने वाले सैकड़ों लोग परेशान हैं। आवास विकास सुनवाई नहीं कर रहा। 
आवास विकास को करोड़ों रुपये देने के बावजूद आवंटी भटक रहे हैं। यहां के लोगों का फ्लैटों के निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगा रहे हैं। कई शिकायतकर्ताओं ने लिखा है की प्रोजेक्ट के निर्माण में भ्रष्टाचार किया गया है। इसकी गुणवत्ता बिल्कुल ठीक नहीं है। निम्न स्तर का काम हुआ है। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि इंजीनियरों ने ठेकेदारों से सांठगांठ कर अंतिम भुगतान करा कर उसकी जमानत राशि भी अवमुक्त कर दी है। आवंटी अनिल कुमार सहित कई लोगों ने बताया कि उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत निर्माण के बीओक्यू व इसकी कास्टिंग की सत्यापित प्रति मांगी थी लेकिन इंजीनियरों ने उसे भी नहीं दिया। इसमें उनका भ्रष्टाचार पकड़ा जाता

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