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श्री गांधी महाविद्यालय, सिधौली में साइबर सुरक्षा एवं समाज विषय पर कार्यशाला आयोजित

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डॉ. वहीद आलम ने एनएसएस स्वयंसेवकों को साइबर अपराधों के प्रति किया जागरूक
सिधौली, सीतापुर | 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार।
श्री गांधी महाविद्यालय, सिधौली, जनपद सीतापुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) द्वारा स्वयंसेवकों के लिए “साइबर सुरक्षा एवं समाज” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में डॉ. वहीद आलम, असिस्टेंट प्रोफेसर, विधि संकाय एवं कार्यक्रम अधिकारी, राष्ट्रीय सेवा योजना, शिया पीजी कॉलेज, लखनऊ उपस्थित रहे।
अपने व्याख्यान में डॉ. वहीद आलम ने साइबर सुरक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में इंटरनेट, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुके हैं। इनके बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना आवश्यक है।
उन्होंने स्वयंसेवकों को साइबर अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, जैसे ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, फिशिंग, फर्जी लिंक, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, पहचान की चोरी, साइबर बुलिंग तथा डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी या व्यक्तिगत विवरण साझा नहीं करना चाहिए। किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने अथवा अनजान स्रोत से ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।
डॉ. आलम ने साइबर अपराधों से संबंधित कानूनी प्रावधानों की चर्चा करते हुए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) की प्रमुख धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धारा 43 के अंतर्गत अनधिकृत कंप्यूटर संबंधी गतिविधियों के लिए क्षतिपूर्ति का प्रावधान है, जबकि धारा 66 के अंतर्गत बेईमानी या कपटपूर्ण तरीके से किए गए कुछ अनधिकृत कंप्यूटर कृत्यों पर तीन वर्ष तक का कारावास अथवा पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। धारा 66C के अंतर्गत पहचान की चोरी तथा धारा 66D के अंतर्गत कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से प्रतिरूपण करके धोखाधड़ी करने पर तीन वर्ष तक का कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने निजी तस्वीरों के अनधिकृत प्रकाशन तथा अश्लील सामग्री से संबंधित अन्य कानूनी प्रावधानों की भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने के बजाय तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए तथा आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर शिकायत करने से वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में धनराशि रोकने की संभावना बढ़ सकती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।
कार्यशाला के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने साइबर सुरक्षा से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. वहीद आलम ने सरल एवं व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उत्तर दिया।

कार्यशाला के प्रारंभ में एनएसएस स्वयंसेवक द्वारा डॉ. वहीद आलम को राष्ट्रीय सेवा योजना का बैज लगाकर तथा शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय शुक्ला एवं डॉ. गोपाल द्वारा संयुक्त रूप से अतिथि वक्ता को स्मृति चिह्न भेंट किया गया।
कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अजय कुमार वर्मा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय शुक्ला द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने सहभागिता की।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य युवाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना, डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग की जानकारी देना तथा समाज में साइबर सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

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