लखनऊ अग्नि कांड का जिम्मेदार कौन
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लखनऊ में पिछले 3 वर्षों (2023 से 2026 के मध्य) में आग लगने की कई छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें व्यावसायिक इमारतों, रिहायशी इलाकों और गोदामों में गंभीर अग्निकांड शामिल हैं। इनमें से सबसे प्रमुख और हालिया घटनाओं का विवरण नीचे दिया गया है:
1. अलीगंज अग्निकांड (जून 2026)
कहां: अलीगंज थाना क्षेत्र के पुरनिया चौराहे के पास (भवन संख्या MS/102, उषा मेहता मार्ग)।
क्या हुआ: हाल ही में 22 जून 2026 को एक तीन मंजिला अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लग गई। इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और ऊपरी मंजिलों पर एक 3D एनिमेशन व ग्राफिक ट्रेनिंग सेंटर संचालित हो रहा था।
प्रभाव: इस दर्दनाक हादसे में दम घुटने और झुलसने के कारण **15 विद्यार्थियों/युवाओं की असामयिक मृत्यु हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने पूरे शहर की सुरक्षा व्यवस्था और एलडीए (LDA) के तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
2. अमीनाबाद और लाटूश रोड के व्यावसायिक प्रतिष्ठान (2024 - 2025)
कहां:अमीनाबाद (प्रताप मार्केट) और लाटूश रोड के इलेक्ट्रॉनिक/कपड़ा बाजार।
क्या हुआ: लखनऊ के इन सबसे व्यस्त और संकरे व्यावसायिक क्षेत्रों में पिछले दो वर्षों में शॉर्ट-सर्किट के कारण आग लगने की दो से तीन बड़ी घटनाएं दर्ज की गईं। तंग गलियां होने के कारण दमकल की गाड़ियों को पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। करोड़ों रुपये का कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक सामान जलकर खाक हो गया था, हालांकि मुस्तैदी के कारण जनहानि टल गई थी।
3. चिनहट और देवा रोड के औद्योगिक गोदाम (2023 - 2024)
कहां: चिनहट औद्योगिक क्षेत्र और देवा रोड स्थित गोदाम।
क्या हुआ: इस क्षेत्र में स्थित कबाड़ के बड़े गोदाम, प्लास्टिक फैक्ट्री और केमिकल/पेंट के गोदामों में भीषण आग लगने की घटनाएं हुईं। इन हादसों में आसमान में कई किलोमीटर दूर तक काला धुआं देखा गया था। फायर ब्रिगेड की दर्जनों गाड़ियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था।
4. ट्रांसपोर्ट नगर और चारबाग के पास आगजनी (2023)
कहां:ट्रांसपोर्ट नगर के वाहनों के पार्ट्स के गोदाम और चारबाग के तंग रिहायशी इलाकों के पास स्थित व्यावसायिक दुकानें।
क्या हुआ:गर्मियों के महीनों में ओवरलोडिंग और शॉर्ट-सर्किट की वजह से दुकानों के बेसमेंट और गोदामों में आग भड़की थी।
अतीत के अन्य बड़े हादसे (जिनका संदर्भ आज भी दिया जाता है):
जब भी लखनऊ में अग्निकांड और एलडीए के भ्रष्ट तंत्र की बात आती है, तो पिछले 3 साल से थोड़े और पहले हुए दो सबसे बड़े हादसों को हमेशा याद किया जाता है, जिन्होंने लखनऊ के नियमों को बदलने पर मजबूर किया:
होटल लेवाना सुइट्स हादसा (सितंबर 2022): हजरतगंज जैसे पॉश इलाके में स्थित इस आलीशान होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में दम घुटने के कारण 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस बिल्डिंग में भी आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और सेटबैक के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई थीं।
होटल विराट और एसएसजे इंटरनेशनल हादसा (जून 2018):चारबाग क्षेत्र के इन दोनों सटकर बने होटलों में लगी भीषण आग में 7 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद अवैध निर्माण के खिलाफ बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई थी।
लखनऊ में अधिकांश घटनाओं में शॉर्ट-सर्किट, बेसमेंट का अवैध व्यावसायिक उपयोग, वेंटिलेशन (निकास) की कमी और नियमों के विपरीत 100% कवर्ड एरिया में निर्माण ही आग के फैलने और जान-माल के नुकसान के मुख्य कारण रहे हैं।

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