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अयोध्या के श्री राम मंदिर दान धनराशि कैसे हुई चम्पत

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अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की एसआईटी जांच में सुरक्षा व्यवस्था की कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि दान पात्र खोलने और नकदी गिनने के दौरान सीसीटीवी कैमरों में ऐसे ब्लाइंड स्पॉट थे, जहां हाथों की गतिविधियां रिकॉर्ड नहीं हो पा रही थीं।
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की चोरी करने वाले जानबूझकर कैमरों के सामने इस तरह खड़े हो जाते थे कि उनके हाथों की हरकतें दिखाई न दें। हाईटेक कैमरों और सर्विलांस सिस्टम के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था इन गतिविधियों को पकड़ने में नाकाम रही। कंट्रोल रूम में तैनात कर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि चढ़ावे के नोटों की छंटनी और गिनती का काम निजी एजेंसी को सौंपा गया था। स्थानीय स्तर पर सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती की गई और कई रिश्तेदारों को भी इस व्यवस्था में शामिल कर लिया गया। भरोसे के नाम पर उनकी निगरानी नहीं की गई, जिससे जवाबदेही कमजोर पड़ गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि मंदिर जैसे संवेदनशील स्थल पर तैनात कर्मचारियों का समुचित सत्यापन तक नहीं कराया गया। बिना बैकग्राउंड चेक के लोगों को सीधे कैश काउंटर और दान प्रबंधन से जोड़ दिया गया। आरोप है कि भाई-भतीजावाद ने सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी सेंध लगा दी।
जांच में मुख्य आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी बेहद प्रभावशाली बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार उसके पास सुरक्षा पास, वायरलेस सिस्टम और सीसीटीवी तक की पहुंच थी। मंदिर की व्यवस्था में उसकी दखल इतनी अधिक थी कि उसकी बात को ही नियम माना जाता था, जिससे अनियमितताओं को बढ़ावा मिला।
एसआईटी अब महाकुंभ 2025 के दौरान आए चढ़ावे की भी जांच कर रही है। उस समय अयोध्या में रोजाना लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे थे और चढ़ावे की राशि भी रिकॉर्ड स्तर पर थी। आशंका जताई जा रही है कि भीड़ का फायदा उठाकर चढ़ावे में हेराफेरी की गई।
आपकी नजर में इस पूरे मामले में सबसे बड़ी जिम्मेदारी किसकी बनती है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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