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शिया पी.जी. कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, शिक्षाविदों ने साझा किए नवाचारी अनुभव

                      HTN Live
नवाचारी भौतिकी शिक्षण विधियों पर विचार विमर्श के साथ द्वितीय दिवस सम्पन्न
शिया पी० जी० कॉलेज, लखनऊ के भौतिकी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भौतिकी शिक्षण की नवाचारी विधियाँ: सहभागिता एवं समझ को बढ़ाना” का समापन भी आज शैक्षणिक उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। संगोष्ठी का संयोजन विभागाध्यक्ष प्रो. भुवन भास्कर श्रीवास्तव द्वारा किया गया तथा इस संगोष्टी को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग से वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है। 
इस अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
द्वितीय दिवस का शुभारंभ डॉ. अंशुल तिवारी वैज्ञानिक, वेंडरबिल्ट विश्वविद्यालय, टेनेसी, संयुक्त राज्य अमेरिका के ऑनलाइन व्याख्यान से हुआ। उन्होंने “व्हेन फिजिक्स मीट्स बायोलोजी: द साइंस ऑफ़ प्रेडिक्टिंग डिज़ीज़ विथ कम्प्यूटर्स” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करते हुए बताया कि किस प्रकार भौतिकी, जीवविज्ञान तथा कंप्यूटर तकनीक का एकीकरण रोगों की भविष्यवाणी और निदान में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रहा है। उनका व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और ज्ञानवर्धक रहा
द्वितीय दिवस पर कुल तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, द्वितीय दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. सादिक हुसैन अब्दी ने की। इस सत्र में आमंत्रित वक्ताओं के रूप में प्रो. इमरान अज़ीज़, डॉ. अर्शद कमाल तथा डॉ. सुहैल अहमद सिद्दीकी (भौतिकी विभाग, शिबली नेशनल कॉलेज, आजमगढ़ — ऑनलाइन) ने शोध पत्रों का वाचन एवं प्रस्तुतीकरण किया।
द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. सादिक हुसैन अब्दी ने की, जिसमें शोध पत्रों का वाचन एवं प्रस्तुतीकरण हुआ।
तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रो. टी० एस० नकवी ने की जिसमें शोध पत्रों का वाचन के पश्चात पोस्टर प्रस्तुतीकरण भी आयोजित किया गया।
इन सत्रों में भौतिकी शिक्षण को अधिक रुचिकर, छात्र-केंद्रित एवं तकनीक-एकीकृत बनाने हेतु विभिन्न नवाचारी शिक्षण विधियों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेष रूप से कहानी-कथन एवं प्रदर्शन-आधारित शिक्षण, मानव मॉडल्स का प्रयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) तथा सूचना प्रौद्योगिकी का शिक्षण में एकीकरण, तथा कक्षा में नवाचारी प्रयोगों पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एस.एस.आर. बाकरी ने भौतिकी विभाग को इस राष्ट्रीय स्तर की शैक्षणिक संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु बधाई दी।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए डा० सरवत तकी, सदस्य, बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टीज ने कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ न केवल शिक्षकों को नवीन शिक्षण तकनीकों से परिचित कराती हैं, बल्कि विद्यार्थियों को भी शोध एवं नवाचार की ओर प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षण को शोध एवं प्रयोगों से जोड़कर ही विद्यार्थियों की जिज्ञासा और रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस प्रकार दो दिनों तक चले विचार-विमर्श, शोध-पत्र वाचन एवं अनुभव साझा करने का यह शैक्षणिक उत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
समापन सत्र में संगोष्ठी संयोजक प्रो. बी.बी. श्रीवास्तव ने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों तथा सहयोगी संस्थानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस संगोष्ठी में साझा किए गए विचार एवं नवाचारी शिक्षण पद्धतियाँ निश्चित ही भौतिकी शिक्षण में अनुसंधान-उन्मुख एवं आधुनिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देंगी।
इस संगोष्ठी में कार्यक्रम सहसंयोजक प्रो० शाद हुसैन, आयोजन सचिव डा० के० सी० दुबे, डा० तनवीर हसन संयुक्त सचिव डा० सैयद असद अली, भौतिकी विभाग के संकाय सदस्य, विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविद्, शोधार्थी तथा विद्यार्थी बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

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