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शशि भूषण बालिका विद्यालय डिग्री कॉलेज द्वारा विलुप्त होती संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुऐ हुआ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम

                                 HTN Live
शशि भूषण बालिका विद्यालय डिग्री कॉलेज लखनऊ में दिनांक 9 सितंबर 2025 को संस्कृत विभाग द्वारा रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
       कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन तथा सरस्वती वंदना से हुआ। सुश्री समृता ने सरस्वती वंदना पर नृत्य प्रस्तुति दी। सुश्री छवि ने महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र पर अत्यंत मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
साथ ही शिव तांडव स्त्रोत और रावण गीत का वाचन कर खूब वाहवाही बटोरी। सुश्री समृता और अंजलि ने "गीतानि दास्यामि" संस्कृत गीत पर अत्यंत सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम में उल्लास भर दिया। 
सुश्री शकुंतला ने संस्कृत गीत गा कर सभागार को ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। सुश्री राधिका ने संस्कृत भाषा के महत्व को बताते हुए अपने संस्कृत अध्ययन विषयक अनुभव को साझा किया तथा समृता ने भी संस्कृत के प्रति अपने अनुराग और संस्कृत की विशेषताओं को बताते हुए अपना अनुभव सबके समक्ष रखा और रंगारंग कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों के मध्य एक नवीन उत्साह भर दिया।
        कार्यक्रम में एक संस्कृत क्विज का भी आयोजन किया गया जो विभिन्न बर्तनों,रंगों को संस्कृत भाषा में क्या कहते हैं इस विषय पर आधारित थी। जिसमें शिक्षकों सहित छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुरस्कार प्राप्त किया। 
      कार्यक्रम में महाविद्यालय प्रबंधक-श्री पंकज भट्टाचार्य, प्राचार्य-प्रोफेसर अंजुम इस्लाम डॉ मधु चौहान,डॉक्टर चंदना बोस,प्रो.आरती कनौजिया, प्रोफेसर ऋचा मिश्रा, डॉ सौरभ मिश्रा, डॉ रंजीता राय, डॉ अंशुल सिंह,डॉ वंदना जायसवाल, डॉ रमा मिश्रा,डॉ अनामिका मौर्या ,श्रीमती नीतू शुक्ला,सुश्री रोशन जहां शिक्षक गण एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
     प्रबंधक महोदय ने देव वाणी के रूप में प्रतिष्ठित संस्कृत भाषा के महत्व को बताया। प्राचार्या महोदया ने आधुनिक युग में संस्कृत भाषा की उपादेयता पर प्रकाश डाला। डॉ चंदन बोस ने प्रातः स्मरण करने योग्य संस्कृत श्लोक का वाचन कर संस्कृत के प्रति अपने अनुराग को प्रकट किया।
        कार्यक्रम संयोजिका के रूप में डॉ.रागिनी श्रीवास्तव ने आए हुए सभी अतिथियों को धन्यवाद दिया। 
 मंच संचालन डॉ रागिनी श्रीवास्तव (विभागाध्यक्ष संस्कृत विभाग) तथा सुश्री परी श्रीवास्तव ने किया।

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