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अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग के द्वारा दिनांक 03 सितम्बर से 18 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन गया

                               HTN Live

अवध गर्ल्स डिग्री कॉलेज के हिंदी विभाग के द्वारा दिनांक 03 सितम्बर से 18 सितंबर तक हिंदी पखवाड़े का आयोजन गया, जिसके अंतर्गत दिनांक 3 सितंबर,2021 को हिंदी पखवाड़े के *उदघाटन सत्र* में हिंदी विभाग एवं अमर उजाला के संयुक्त तत्वावधान में *"हिंदी है हम" कार्यशाला* का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की संपादक डॉ अमिता दुबे जी उपस्थित थी वही विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के तकनीकी अधिकारी श्री पंकज प्रसून जी एवं अमर उजाला, लखनऊ के उप सम्पादक श्री अभिषेक सहज जी उपस्थित थे। 
   विशिष्ट अतिथि श्री पंकज प्रसून जी ने बड़ी ही सरल, सहज व रसमय भाषा में हास्य व्यंग्य के माध्यम से छात्राओं से हिंदी भाषा से सम्बंधित सारगर्भित बातें कही। डॉ अमिता दुबे ने हिंदी को सर्वाधिक समृद्ध भाषा बताते हुए छात्राओं से बड़ी ही लगन और मेहनत से आगे बढ़ने को प्रेरित किया। श्री अभिषेक सहज जी ने छात्राओं से कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, जैसे हम अपनी माँ की सेवा करते हैं वैसे ही हमें हिंदी की सेवा भी सम्पूर्ण गर्व के साथ करनी चाहिए। 

 

हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत दिनांक 6 सितम्बर, 2021 को *अनुवाद प्रतियोगिता* का आयोजन किया गया,जिसमें कुल 17 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार हैं -  

प्रथम पुरस्कार-आंशिका सिंह, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर 

द्वितीय पुरस्कार- खुशी सिंह, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर 

तृतीय पुरस्कार- सोनल यादव, बी.ए. पंचम सेमेस्टर

 

   इसके उपरांत दिनांक 8 सितंबर, 2021 को विभाग में *निबंध लेखन प्रतियोगिता* का आयोजन हुआ, जिसका विषय था - "सोशल मीडिया:नैतिकता के पतन का मूल कारण" अथवा "स्त्री मुक्ति का प्रश्न: मनुष्यता की सबसे बड़ी चुनौती"।प्रतियोगिता में कुल 15 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार रहा-

प्रथम पुरस्कार- किरण राज, बी.ए. पंचम सेमेस्टर

द्वितीय पुरस्कार- पारुल यादव,बी.ए. पंचम सेमेस्टर

तृतीय पुरस्कार- नैना कुमारी, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

  

पखवाड़े के अंतर्गत दिनांक 13 सितंबर, 2021 को विभाग में *भाषा सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता* का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कुल 21 छात्राओं ने भाग लिया ।  प्रतियोगिता में बी.ए. तृतीय सेमेस्टर की तीन छात्राओं को एक समान अंक प्राप्त हुए हैं, फलतः अंतिम परिणाम के लिये गूगल मीट पर ऑनलाइन माध्यम से प्रश्नोत्तरी के द्वितीय राउंड का आयोजन किया गया, जिसके उपरांत प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार रहा-

प्रथम पुरस्कार- श्रेया सिंह, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

द्वितीय पुरस्कार- अंशिका सिंह,बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

तृतीय पुरस्कार- कुलप्रीत कौर, बी. ए. तृतीय सेमेस्टर


दिनांक 14 सितम्बर, 2021 को विभाग में *श्रुत लेख प्रतियोगिता* का आयोजन हुआ, जिसमें छात्राओं को भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के यूनाइटेड नेशंस में दिए गए भाषण को सुनकर व्याकरणिक शुद्धता के साथ लिखना था। इस प्रतियोगिता में कुल 11 छात्राओं ने भाग लिया नाम - प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार रहा-

प्रथम पुरस्कार- खुशी सिंह, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

द्वितीय पुरस्कार- श्वेता सिंह,बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

तृतीय पुरस्कार- श्रेया सिंह,बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

इसके उपरांत दिनांक 15 सितंबर, 2021 को विभाग में *"सुनो कहानी"* श्रंखला के अंतर्गत हरिशंकर परसाई की "भोलाराम का जीव" कहानी का पाठ डॉ नेहा कपूर के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 20 छात्राओं ने भाग लिया। 

इसके उपरांत विभाग में *काव्य पाठ* प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिनमें अनेक छात्राओं ने विभिन्न कवियों के काव्य के अंश का पाठ किया।

ततपश्चात दिनांक 21 सितंबर,2021 को *वर्तनी शोधन प्रतियोगिता* का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में कुल 13 छात्राओं ने भाग लिया,जिनका विवरण इस प्रकार है-प्रतियोगिता का परिणाम इस प्रकार है-

प्रथम पुरस्कार- नीरा बाजपेयी, बी.ए.पंचम सेमेस्टर

द्वितीय पुरस्कार- किरण राज, बी.ए.पंचम सेमेस्टर

तृतीय पुरस्कार- पारुल यादव एवं कोमल, बी.ए.पंचम सेमेस्टर तथा श्रेया सिंह, बी.ए. तृतीय सेमेस्टर

कार्यक्रम का समापन समारोह 18 सितंबर को शासन के द्वारा अतिव्रष्टि के कारण अवकाश घोषित किये जाने के कारण दिनांक 27 सितम्बर, 2021 को किया गया। इस अवसर पर *मिशन शक्ति फेज 3* के अंतर्गत हिंदी विभाग एवं नाट्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में डॉ रेखा गुप्ता, डॉ प्रीति अवस्थी, डॉ नेहा कपूर, सुश्री देवांशी भटनागर एवं डॉ आलमी रजा के निर्देशन में जगदीशचंद्र माथुर की एकांकी *‘रीढ़ की हड्डी' का नाट्य मंचन* किया गया, जिसमें हुदा बेग,अरीबा,सदफ,तान्या केसरवानी,नियति आदि छात्राओं ने अभिनय किया। "रीढ़ की हड्डी" नाटक के माध्यम से लेखक ने समाज की उस कुप्रथा का खंडन किया है, जिसमें लड़कियों को शादी के लिये भेड़ बकरियों की तरह तौला जाता है।लेखक ने आज की लड़कियों को नाटक की नायिका उमा की भांति स्वावलंबी एवं आत्मनिर्भर बनने के लिये तो प्रेरित किया ही है साथ ही उन्हें खुलकर अपने विचार व्यक्त करने के लिये भी प्रोत्साहित किया है।मिशन शक्ति फेज 3 में जिस *"चुप्पी तोड़ो, खुलकर बोलो"* ध्येय वाक्य का प्रयोग किया जा रहा है, नाटक उसका पुरजोर समर्थन करता है।
 कार्यक्रम का समापन राष्ट्र गान के साथ हुआ।

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