कोरोना व लॉकडॉउन ने नर्सरी हॉकी खिलाडिय़ों को बना दिया स्किल मास्टर
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दानिश, हुजैफा व अदनान ने लॉकडॉउन में हासिल की शोहरत
प्रतापगढ़ की अनवर हाकी सोसाइटी के खिलाडिय़ों की मच रही धूम
दानिश, हुजैफा व अदनान ने लॉकडॉउन में हासिल की शोहरत
अमन मिश्रा ब्यूरो चीफ
लखनऊ। कोरोनाकाल व लॉकडॉउन में जहां एक तरफ खेल और खिलाडिय़ों को काफी नुकसान हुआ। खेल मैदानों पर ताला लगने से खेल पूरी तरह बाधित हुए। वहीं प्रतापगढ़ की अनवर हाकी सोसाइटी जो कि हाकी नर्सरी है की बात की जाये तो यहां के खिलाडिय़ों ने लम्बे कोरोनाकाल में खुद को घर पर सुरक्षित रखते हुए न सिर्फ हाकी का अभ्यास किया बल्कि अपने स्किल को इतना तराशा कि सोशल मीडिया पर इन छोटे-छोटे खिलाडिय़ों ने धूम मचा दी। सोसाइटी के संस्थापक मोहम्मद अनवर, कोच मोहम्मद जसीम और मोहम्मद खुर्शीद से ऑनलाइन हाकी के गुर सीख रहे ये छोटी उम्र के खिलाडिय़ों की हर कोई प्रशंसा कर रहा है।
सोसाइटी के मोहम्मद दानिश घर पर स्किल करने के अलावा विदेशी खिलाडिय़ों को
यूट््यूब पर देखकर मदद ले रहे हैं। दानिश बताते हैं कि आस्ट्रेलिया व नीदरलैण्ड के खिलाडिय़ों को देखकर भी स्किल सीखने का मौका मिला है। ये छोटी उम्र का खिलाड़ी न सिर्फ खेल में बादशाहत कायम करना चाहता है बल्कि एक पुलिस अधिकारी बनकर मां- बाप का सपना पूरा करने की ललक रखता है।
प्रतापगढ़ की अनवर हाकी सोसाइटी में 120 से अधिक बच्चे नि:शुल्क अभ्यास करते हैं। गौरतलब है कि इन बच्चों को सोसाइटी के संस्थापक व अन्तर्राष्टï्रीय हाकी खिलाड़ी खेल की पूरी किट नि:शुल्क उपलब्ध कराते हैं। मोहम्मद अनवर का कहना है कि हाकी को जिंदा रखने के लिए मेरा प्रयास जारी है। कोरोनाकाल में मैदान पर ताला लगने के चलते सोसाइटी के जिम्मेदार लोगों ने एक वाट्सएप ग्रुप बनाकर बच्चों को घर पर ही तराशने का जिम्मा संभाल लिया। वहीं बच्चों और उनके अभिभावकों ने भी कमर कसते हुए ऑनलाइन अभ्यास कर खुद को तराश कर इन दिनों सोशल मीडिया पर धूम मचायी है।
मोहम्मद दानिश, हुजैफा और अदनान की बात करें तो ये आसपास के ही रहने वाले हैं। ये तीनों उदीयमान खिलाड़ी हाकी स्किल में फस्र्ट टच, लीडि़ंग, पासिंग, हिट, फ्लैट स्टिक टैकल, फ्लोर स्टिक टैकल, बोनस टिप, रिजर्व, वी ड्रैग, स्कूप, टैकलिंग, बैक पास व बॉल कन्ट्रोल की कड़ा अभ्यास कर खुद को मैदान पर वापसी के लिए बेहतर बना रहे हैं। दानिश बताते हैं कि उन्होंने दो साल पहले हाकी खेलना शुरू किया। इन दो सालों में करीब 18 महीने कोरोनाकाल में बीत गया। मगर घर पर रहकर कोच ने उम्दा प्रशिक्षण देकर हम खिलाडिय़ों के हौसले को बरकरार रखा। दानिश, हुजैफ व अदनान जैसे सोसाइटी के अनेक बच्चों का सपना है कि वे एक दिन देश की टीम में जरूर शामिल होंगे। बताते चले कि सालों से लोग यही मानते आ रहे हैं कि अनवर हॉकी की नर्सरी है। लेकिन ये हॉकी की बगिया है और भविष्य में हॉकी की यूनिवर्सिटी कही जा सकती है। हॉकी यहां की अंडर करंट है। इस करंट को महसूस करना है तो हर किसी को प्रतापगढ़ के अनवर हाकी नर्सरी आना होगा। जीआईसी मैदान पर चलने वाली अनवर हाकी नर्सरी के छोटे-छोटे खिलाड़ी मैदान में अपने हॉकी स्टिक से सफेद बॉल का पीछा करते नजर आयेंगे। इन बच्चों में जुनून और जज्बा देखने का मौका मिलेगा। मगर इसके लिए मैदान खुलने का इंतजार करना होगा।
हैरत की बात है कि प्रतापगढ़ जैसे छोटे से शहर में जब साल भर बच्चे इतनी सारी टूर्नामेंट में व्यस्त रहते हैं तब आप अनुमान लगा सकते हैं कि अनवर हॉकी सोसाइटी के लिए नर्सरी है या कोई यूनिवर्सिटी है।



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