मझरा पूरब में बाघ को रोकने के लिए वन विभाग ने खोदी गहरी खाईं।
HTN ✍️ Live निघासन लखीमपुर
हाथियों की काबिंग से घबराया बाघ, नहीं आया जंगल से बाहर
देवेंद्र कुमार लखीमपुर खीरी
जनपद लखीमपुर खीरी के उत्तर निघासन रेंज के टाइगर प्रभावित मझरा पूरब में हिंसक बाघ की तलाश में दूसरे दिन रविवार को भी काबिंग जारी रही। लेकिन वन कर्मियों को काबिंग के दौरान पग चिन्ह के सिवाय बाघ की कोई लोकेशन नहीं मिली। एक तरफ बाघ को खदेड़ने के लिए हाथियों से काबिंग तो दूसरी तरफ बाघ को रोकने के लिए खाई खोदी जा रही है।
अधिकारियों ने हिंसक बाघ के मूवमेंट के लिए कर्तनिया घाट से आए दो मादा हाथी चंपाकली और जयमाला के द्वारा शनिवार को काबिंग शुरू कर दिया था। जो दूसरे दिन रविवार को भी जारी रही। वनरक्षक जगमोहन मिश्रा और वन दरोगा हरीलाल के साथ ही स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स की टीम भी दूसरे दिन रविवार को पूरा दिन भ्रमण करती रही लेकिन बाघ की कोई लोकेशन नहीं मिली। वन कर्मियों के मुताबिक बाघ को जंगल में रोकने के लिए हाथियों से काबिंग की जा रही है। शायद इसी वजह से वह घबराकर जंगल से बाहर नहीं आया है। वन अधिकारियों ने मझरा पूरब में शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए जंगल की तराई में खाई खुदाई का कार्य शुरू कर दिया है। वन कर्मियों के मुताबिक जंगल जाने वाले रास्तों पर खाई खुदने से ग्रामीणों का जंगल में आवागमन नहीं हो पाएगा। इससे मानव- बाघ संघर्ष की घटनाएं रोकी जा सकेंगी।

No comments