अंतरराष्ट्रीय अवधी भाषा पत्रिका का हुआ विमोचन
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मारीसन नार्वे चीन सहित तमाम देशवक अवधी आराधक एवं प्रशासनिक अफसरों ने लिया हिस्सा
सुभाष गिरी ब्यूरो प्रमुख सीतापुर
सीतापुर - अवधी हिन्दी के वैश्विक प्रगति का मूल आधार है इसके बिना हिन्दी की उन्नति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है इसलिए अवधी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए ।
यह बात उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की पूर्व उपनिदेशक व जानी मानी साहित्यकार डॉ विद्या विन्दु सिंह व पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषाएँ लखनऊ विश्वविद्यालय व संस्थापक अध्यक्ष अवधी अध्ययन केंद्र लखनऊ प्रोफेसर कैलाशा देवी सिंह द्वय ने अवधी के धुरंधर कवि बलभद्र प्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस' की जयन्ती के पावन मौके पर अवधी दुनिया केरि प्रतापी पत्रिका'भाखा' क्यार मंगल विमोचन करते हुए एक विश्वस्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम में कही । उन्होंने आशीर्वाद देते हुए कहा कि 'भाखा' पत्रिका अवधी उत्थान के लिए दुनिया में एक नई मिसाल कायम करे ऐसी हमारी अशेष शुभकामनाएँ हैं । विशिष्ट वक्ता के रूप में अमर उजाला के पूर्व प्रधान सम्पादक व निर्वान टाईम्स के कर्ताधर्ता शम्भूनाथ शुक्ल ने कहा कि विश्व में हिंदी का समादर भाव रामचरित मानस की बदौलत ही है और रामचरित मानस अवधी भाषा में लिखी गई इसलिए अवधी को विश्व व्यापी सम्मान दिलाने के लिए जो बीड़ा भाखा के सम्पादक डॉ गंगा प्रसाद शर्मा'गुणशेखर' ने उठाया है वह निश्चित ही श्लाघनीय कदम है । अवधी के चाहने वालों की संख्या मारीशस, नार्वे, चीन, नेपाल, पाकिस्तान सहित तमाम देशों में आज भी बड़ी तादाद में मौजूद है । उन्होंने एक संस्मरण साझा करते हुए कहा कि जब रहमत अली भारत से पाकिस्तान गए तो साथ में रामचरित मानस पुस्तक ले गये।वहाँ वे इसी इसी पुस्तक के बल पर लोगों को राम कथा सुनाया करते थे। थोड़े दिन बाद ही जनमानस ने उन्हें पण्डित रहमत अली कहकर विभूषित किया। यह है अवधी भाषा का प्रबल प्रभाव व प्रताप जिसने जाति, धर्म की बेड़ियों को तोड़कर भारत का मान बढ़ाया है । डा योगेन्द्र प्रताप सिंह विभागाध्यक्ष लखनऊ विश्वविद्यालय आधुनिक हिन्दी साहित्य ने बतौर अतिथि वक्ता कहा कि हिन्दी के साथ अवधी का मणिकांचन संयोग देखते ही बनता है और यही काम भाखा पत्रिका भी करेगी इसलिए भाखा पत्रिका को अग्रिम से नयी नयी ऊचाईयाँ छूने के लिए ढ़ेरों शुभकामनाएँ देता हूँ । मारीशस के विश्व विश्रुत साहित्यकार मुख्य अतिथि हेमराज सुन्दर ने भारत भूमि को नमन करते हुए अपनी मातृभाषा अवधी के उत्थान के लिए लेखन प्रवाह में श्रीवृद्धि करने की जरूरत पर बल दिया है फिर उन्होंने भारत और मारीशस के सम्बन्धों को प्रगाढ़ करने के बाबत एक कविता सुनाकर सभी लोगों का दिल जीत लिया ।आशीष कन्धवे सम्पादक गगनांचल ने अवधी को गाँव गरीब मजदूर की भाषा बताया और कहा जब तक गाँव गरीब मजदूर किसान की भाषा मजबूत नहीं हो सकती तब तक देश उन्नति के नये आयाम नहीं तय कर सकता । प्रवासी संसार के सम्पादक राकेश कुमार पाण्डेय ने अवधी के महत्त्व पर विश्व व्यापी चिंतन प्रस्तुत कर अवधी के विविध पक्षों को उभारा और जिम्मेदारों का अवधी के प्रति किये जा रहे रवैय्या के प्रति असन्तोष प्रकट किया। मुख्य वक्ता डा भारतेन्दु मिश्र जी ने 'भाखा' पत्रिका को शुभाशीष देते हुए सम्पादक डॉ गंगा प्रसाद शर्मा 'गुणशेखर' को हृदय तल से शुभकामनाएँ दीं और कहा कि 'भाखा' अवधी के फूल से पूरी दुनिया महक़ेगी । राज्य लोक सेवा आयोग के अधिकारी व साहित्यकार अशोक कुमार शुक्ल ने 'भाखा' पत्रिका के दीर्घजीवी होने के लिए मंगलाशीष प्रेषित किया । नार्वे से विश्व विख्यात साहित्यकार सुरेश कुमार शुक्ल ने अवधी अंचल को वन्दन करते हुए अवधी उत्थान पर अपने सार गर्भित विचार प्रस्तुत किए । चीन से आशीष गोरे ने हिन्दी के प्रति अपने समर्पण भाव को लोगों के बीच साझा किया । दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ सत्य प्रिय पाण्डेय ने 'अवधी जैसी सीधी सरल भाषा से भारतीय संस्कृति को बल मिलता है' की बात कहकर अवधी की सुग्राह्यता पर प्रकाश डाला । तकनीकी सहयोगी व 'भाखा' के प्रमुख आधार स्तम्भ विनय शुक्ल ने लोगों को ढाँढस दिलाया कि हम इस पत्रिका को नया मुकाम दिलाने के लिए हर सम्भव प्रयास करेंगे । कार्यक्रम का सन्तुलित संचालन करते हुए शिक्षक व साहित्यकार आराध्य शुक्ल ने अवधी परिपथ बनाये जाने की पुरजोर वकालत की । इससे पूर्व पत्रिका के सम्पादक सीतापुर की माटी से जुड़े अवधी माँ के आराधक व वरदपुत्र डॉ गंगा प्रसाद शर्मा ' 'गुणशेखर' ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि नीयत ठीक होगी तभी नीति फलदायी होगी। गुणशेखर ने गंगा जमुनी साहित्य के प्रतीक व अवधी के अनन्य भक्त वाहिद अली वाहिद से माँ वाणी वन्दना करवायी फिर अभिनन्दन सत्र के साथ ही कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया और सत्रारम्भ मे यह भी कहा कि अवधी हमारी रक्त शिराओं में प्रवाहित हो रही है जिसे जीवनपर्यन्त तक थमने नहीं दूँगा । अन्त में डॉ रश्मि शुक्ल ने अतिथियों, वक्ताओं, कवियों व अवधी आराधकों का धन्यवाद देते हुए आभार व अभिनन्दन किया फिर कार्यक्रम के विराम होने की उद्घोषणा की ।
इस साहित्यिक अनुष्ठान के पावन मौके पर आलोक सीतापुरी,प्रोफेसर अनुराधा तिवारी,डॉ भास्कर शर्मा राममिलन दीक्षित, केदारनाथ शुक्ल, देवेन्द्र कश्यप 'निडर' सहित तमाम साहित्यानुरागी उपस्थित रहे ।

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