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कूड़ा बीनने वाले व मजदूरो के बच्चों के छोटे गुरु आनन्द ने मारी बाजी आईसीएसई की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक पाने पर गदगद हैं माता-पिता

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मोहम्मद शानू 

लखनऊ। बाल चौपाल के जरिये कमजोर वर्ग के बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने वाले  आनन्द कृष्ण मिश्रा आईसीएसई बोर्ड की क्लास 10 की परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक अर्जित करके अपने बाल साथियों के लिये रोल मॉडल बन गये हैं। राष्ट्र निर्माण का जज्बा और समाज सेवा का भाव संजोये आनन्द अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजन और ईश्वर को देते हैं।   
सिटी मोंटेसरी स्कूल, कानपुर रोड ब्रांच  में पढऩे वाले आनंद के पिता अनूप मिश्रा और मां रीना पांडेय उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं और दोनों ही आनंद की सफलता पर बहुत खुश हैं। आंनद ने वर्ष 2019 की राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा एनटीएसई के प्रथम चरण में 1.5 लाख बच्चों में 13 वीं रैंक प्राप्त की। इसके साथ साथ  इस वर्ष विभिन्न् ओलंपियाड परीक्षाओं में 6 स्वर्ण पदक  प्राप्त कर चुके हैं।
बचपन से ही आनंद ने अपनी शैक्षणिक प्रतिभा के बल पर कई सम्मान अर्जित किये हैं और इस वर्ष उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि आईवाईएमसी  में रही जब उन्होंने सभी देशों के मध्य भारत को तीसरा स्थान दिलाया। बचपन से ही शैक्षणिक प्रतिभा के बल पर सफलता के कई आयाम छूने वाले आनंद को समाज सेवा के क्षेत्र में भी देश-प्रदेश के कई संघटनों द्वारा सम्मानित किया गया है । बाल चौपाल सरोकार के लिये आनंद को आईवाईएफ 2015 में गोल्ड मैडल और वर्ष 2016 में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा सम्मानित किया गया। इंटरनेशनल चिल्ड्रेन पीस अवार्ड के लिए भी आनंद को दो बार भारत से नामित किया गया ।
छोटे मास्टर जी के नाम से मशहूर आनंद कृष्ण मिश्रा  बाल चौपाल के माध्यम से कच्ची बस्तियों और परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता एवं रुचि पूर्ण शिक्षा के उन्नयन के मकसदों से कई प्रकार के कार्यक्रम लखनऊ के कई विकासखंडों और प्रदेश के कई जिलों में समय-समय पर आयोजित कर बच्चों का प्रोत्साहन एवं उत्साहवर्धन करने का कार्य पिछले कई वर्षों से कर रहे हैं। आनंद कलिंदर खेड़ा बस्ती आलमबाग में प्रतिदिन जा कर बच्चों को एक घंटा पढ़ाते हैं। उनकी इस मुहिम से कूड़ा करकट बीनने, मजदूरी आदि कामों में लगे बच्चों की जिंदगी में बदलाव आया है। बच्चों और स्कूलों से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करवाने के  लिये आनंद द्वारा गांव प्रधान, पार्षद, विधायक, सांसद, प्रशासनिक अधिकारियों और जनसहयोग के माध्यम से प्रयास किया जाता है । बाल चौपाल की मदद से कई सार्थक शैक्षिक सरोकार किये गये हैं ।
बाल चौपाल अध्यक्ष आनंद ने बताया कि आज मेरा भी परिणाम घोषित हो गया। हाई स्कूल परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक से पूरी तरह संतुष्टï नहीं हूं, इसके लिए मुझे आगे शत-प्रतिशत अंक लाने होंगे। आनन्द ने कहा कि मेरा सपना है कि गरीबी या किसी भी अन्य कारण से कोई बच्चा शिक्षा से वंचित ना रह जाये यही उनकी मुहिम का मकसद है ।
15 वर्ष की उम्र के आनंद कृष्ण मिश्रा का सपना है कि देश में कोई भी बच्चा निरक्षर या अनपढ़ न रहे। इसलिए इन्होंने शिक्षा से वंचित  बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगाने का बीड़ा उठाया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के करीब 150 से अधिक गांवों के न जाने कितने बच्चे आज इस छोटे मास्टरजी और उनकी बाल चौपाल के प्रयासों के फलस्वरूप शिक्षित होने में कामयाब हो रहे हैं। आनंद ने वर्ष 2012 से झुग्गियों में रहकर जीवन व्यतीत करने वाले बच्चों को साक्षर बनाने के लिये प्रयास शुरू किया था। परिणाम घोषित होने के बाद आनन्द मिश्रा के वे शिष्य जो पढ़ते हैं और कूड़ा बीनते हैं सभी आनन्द की खुशाी में झूमे और मस्ती की

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