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कभी होते थे स्टार प्रचारक आज खुद बने बैठे हैं उम्मीदवार

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कुछ हार के बाद कर लेते हैं वापसी तो कुछ आज भी हैं सक्रिय
लखनऊ। अपनी शोहरत के बूते सियासी फलक पर छाने की तमन्ना भी फिल्मी सितारों में खूब रही है। बदलते दौर के साथ यह सितारे वक्तके साथ नेताओं के हमराह होते हुए एक दल से दूसरे दल में जाने से गुरेज नहीं करते और बड़ी ही आसानी से चुनाव का टिकट भी पा जाते हैं। एक वक्त था कि जब सितारे सिर्फ  नेताओं और उनकी नीतियों का प्रचार करते थे। इसके पीछे राजनीतिक विचारधारा तो होती ही थी साथ ही खास नेता से व्यक्तिगत रिश्ते भी होते थे। तमाम अभिनेताओं ने वक्त के साथ साथ एक दल से दूसरे दल का दामन थामना बेहतर समझा। सियासी दल भी उन्हें भीड़ खींचने वाले स्टार प्रचारक के तौर पर देखते थे। 
राजेश खन्ना से लेकर अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना से लेकर शत्रुघ्न सिन्हा, राजबब्बर और फिर गोविंदा ने चुनाव लड़ा और विजय पायी। केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि अभिनेत्रियां भी चुनाव मैदान में कूदी। जया प्रदा से लेकर नगमा और हेमा मालिनी से लेकर किरन खेर और नफीसा अली चुनावी मैदान में हिस्सा ले चुकी हैं। हालांकि नफीसा अली और नगमा को छोड़कर सभी ने चुनाव जीता भी है। इसके अलावा दक्षिण में एमजीआर से लेकर जयललिता भी सियासी शिखर तक पहुंचे। बॉलीवुड में सुनील दत्त, धमेन्द्र, जावेद जाफरी, शेखर सुमन, संजय दत्त, मुनमुन सेन, परेश रावल, जया बच्चन और छोटे पर्दे की बहु तुलसी यानि कि स्मृति ईरानी समेत बॉलीवुड और दक्षिण के कई कलाकार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमां चुके हैं। इस बार फिल्म जगत के कई सितारे चुनावी मैदान में हिस्सा ले रही हैं। जिसमें बॉलीवुड स्टार उर्मिला और भोजपुरी स्टार रवि किशन और दिनेश लाल निरहुआ चुनाव मैदान में हैं। हालांकि फिल्म स्टार्स का चुनाव लडऩा लोगों को पसंद नहीं है। आमतौर पर यह सुनने को भी मिलता है कि स्टार्स अपने निजी फायदे के लिए चुनाव लड़ते हैं तो कोई यह भी मानता है कि फिल्मी कैरियर खत्म होने के बाद इनको कुछ काम चाहिये और यह कलाकार से नेता बन जाते हैं। कुछ तो यह भी कहते हैं कि इनके अन्दर अचानक चुनाव लडऩे का शौक पैदा होता है और फिर हारने के बाद इनका शौक समाप्त भी हो जाता है। काफी हद तक यह बात सही भी है। अमिताभ बच्चन, गोविंदा, राजेश खन्ना, जावेद जाफरी, राखी सावंत, महेश मांजरेकर, दारा सिंह, राजू श्रीवास्तव, नफीसा अली और गुल पनाग समेत कई ऐसे नाम हैं जो कि चुनावी मौसम में निकले और हार का मुंह देखने के बाद वापस अभिनय करने लगे। लेकिन इन लोगों का चुनाव लडऩा कितना सही है और कितना गलत यह तो वो खुद ही जाने। माना यह भी जाता है कि कहीं न कहीं यह पार्टी की सीट बढ़ाने का स्टंट भी होता है। वैसे इस बार शत्रुघ्न सिन्हा, राजबब्बर, उर्मिला और भोजपुरी स्टार रवि किशन और दिनेश लाल निरहुआ के अलावा ज्यादातर फिल्मी कलाकारों ने के लोकसभा चुनाव से खुद को दूर रखा है। लेकिन अब देखना यह होगा कि जितने कलाकार चुनाव मैदान में हैं उनको अपनी शोहरत का कितना फायदा होगा। 

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