शहर की चुनावी चर्चाओं से गरीब व फुटपाथ दुकानदार दूर लखनऊ में कोई सपा को तो कोई भाजपा को बता रहा विकास पुरुष
HTN Live
मोहम्मद शानू
लोकसभा चुनाव को लेकर लखनऊ में अन्य लोग भले ही चुनावी चर्चाओं में रुचि ले रहे हों, मगर पटरी दुकानदार और गरीब तबके के लोग चुनावी जंग और चर्चाओं से दूर नजर आ रहे हैं। हालांकि कालेज से लेकर विश्वविद्यालय, अस्पताल से लेकर रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, सरकारी विभागों, यहां तक कि शहर के चौराहों तक चुनावी चर्चाएं जोरों पर है। ऐसे में चुनावी चर्चाओं की एक पेश है एक रिर्पोट ........
लखनऊ। 6 मई को लोकसभा चुनाव को लेकर लखनऊ के लोगों में कौन जीतेगा, कौन हारेगा। यहां तक कौन सी पार्टी दूसरे, तीसरे और चौथे नम्बर पर रहेगी की चर्चाएं तेजी से चल रही हैं। गुरुवार को संवाददाता ने शहर के विभिन्न इलाकों में जायजा लिया तो चुनावी जंग की कुछ तस्वीरें उभरती हुई दिखायी दीं। हालांकि इन तस्वीरों को अभी कोई मायने नहीं है, दरअसल लखनऊ में चुनाव 6 मई को होना है। सबसे पहले डालीगंज पुल पर लगने वाली फल मण्डी का रुख किया तो गर्म मौसम के चलते लोग खरीदारी तो कर रहे थे, मगर चुनावी चर्चाओं से दूर नजर आ रहे थे। ऐसे में पुल के करीब छाया में बैठे कुछ दुकानदार ग्रहकों का इंतिजार कर रहे थे। उनके करीब गया पहले तो गर्मी की दुहाई दी इसके बाद चुनावी रंग के बारे में फुटपाथ दुकानदारों से पूछा तो बेबाक भड़क उठे, बोले वोट मांगने आये तब बताऊंगा। छोटा मोटा रोजगार भी फुटपाथ दुकानदारों से छीन लिया है सरकार ने। हालांकि उन लोगों में शामिल एक उम्र दराज आदमी बोला सपा-बसपा सरकार में कम से कम हम लोग धंधा तो कर लेते हैं। दुकानें कभी हटानी जरूर पड़ती हैं मगर नगर निगम और पुलिस को पैसा नहीं देना पड़ता था। इसलिए यूपी में तो सपा और बसपा ही बेहतर है। इसके बाद संवाददाता ने चौक इलाके का रुख किया।
चौक चौराहे पहुंचा तो देखा कि कुछ खिलाड़ी स्टेडियम से निकल कर खाने पीने की तलाश में एक रेस्टोरेंट और चाय नाश्ते की दुकान पर खड़े हैं। इन लोगों के बीच जाकर एक कोने में कुर्सी पर बैठ गया। एक खिलाड़ी ने इशारे से सबकी मर्जी पूछी तो किसी ने चाय के साथ समोसे तो किसी ने बन-मक्खन, तो किसी ने कोल्ड ड्रिंक तो किसी ने लस्सी की चाह जतायी। कुछ ही देर में चाय, समोसे और बन-मक्खन से भरी प्लेटें हर साथी के सामने थीं। चाय की चुस्कियों के बीच मैच में एक-दूसरे के प्रदर्शन को लेकर हंसी मजाक का दौर शुरु हो गया। इसी बीच चुनाव पर चर्चा छिड़ गई। देखते ही देखते एक दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हंसी मजाक कर रहे युवा दो धड़ों में बंट गये। एक धड़ा राष्ट्रवाद और आंतरिक सुरक्षा को लेकर मतदान की बात कर रहा था, वहीं दूसरा धड़ा रोजगार, भ्रष्टाचार और विकास के मुद्दे पर सरकार की नाकामी पर खफा दिखा।
संवाददाता ने वहां युवाओं से बात करके शहर का मिजाज समझने की कोशिश की। बहस शुरु होते ही वहां मौजूद अमन ने राष्ट्रवाद और देश की आंतरिक सुरक्षा को लोकसभा चुनावों का मुख्य मुद्दा बताया। उनके मुताबिक देश सुरक्षित रहेगा तभी देश का विकास संभव है और नौकरियां भी तभी मिलेंगी। सतीश वर्मा की बात का समर्थन करते हुए मोहम्मद रियाज ने लखनऊ से लेकर इलाहाबाद और बनारस समेत प्रदेश के छोटे-छोटे इलाकों तक में विकास कार्य तेजी से होने की बात कही। इन दोनों की बात चुपचाप सुन रहे विवेक ने पहले तो कुछ बोलने से ही इनकार कर दिया, लेकिन कुछ देर बाद सपा सरकार में हुए विकास कार्य गिनाये। विवेक के मुताबिक लखनऊ में मेट्रो से लेकर सीजी सिटी में एचसीएल और अमूल जैसी कई बड़ी कंपनियों की स्थापना हुई, जिससे हजारों युवाओं को नौकरी भी मिली। ऐसे में महागठबंधन के प्रत्याशी को इसका लाभ जरूर मिलेगा।
अजय सिंह के मुताबिक, कोई भी सरकार नौकरियों को लेकर गंभीर नहीं है। बीजेपी सरकार की नीतियों का समर्थन करने के बावजूद युवाओं के खाली हाथों को कोई काम नहीं मिला। महेश प्रताप भी अजय सिंह की बातों से सहमति जताते हुए नोटबंदी के कारण छोटे उद्यमियों को नुकसान होने की बात कही। उनके मुताबिक, मोदी की नीतियों से मध्यम वर्ग को न तो कोई खास फायदा हुआ और न ही नुकसान लेकिन एक तबका ऐसा है जिसके रोजगार पर बुरा असर पड़ा। बहस अभी चल ही रही थी कि पास में खड़े जितेन्द्र मिश्रा बीच में कूद पड़े और बोले-पांच साल में सारा काम नहीं हो सकता, मोदी सरकार को पांच साल और मिलना चाहिए। विकास का प्लेटफॉर्म तैयार हो चुका है, दोबारा सरकार बनी तो नौकरियां भी मिलेंगी और विकास भी रफ्तार पकड़ेगा।

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