निजीकरण के विरोध व पुरानी पेंशन बहाली के लिए बिजली इन्जीनियरों ने राजनीतिक दलों से चुनाव के पहले नीति स्पष्ट करने को कहा: प्रधानमंत्री के लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी मे हई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक मे हुआ निर्णय
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ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन
रिपोर्ट नागेश्वर सिंह✍️
ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन की फ़ेडरल एक्जीक्यूटिव की आज प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी मे हई मीटिंग मे पारित प्रस्ताव मे भाजपा , काँग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों से मांग की गई है कि वे बिजली सेक्टर और बिजली कर्मचारियों के हितों से जुड़े ज्वलन्त विषयों और निजीकरण के नाम पर बिजली के क्षेत्र मे चल रहे मेगा घोटालों को रोकने हेतु अपनी नीति स्पष्ट करें और चुनाव बाद की रणनीति बताएं।
आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन की आज यहाँ हई मीटिंग मे गुजरात,केरल,तेलंगाना,आन्ध्र प्रदेश,कर्नाटक,महाराष्ट्र,मप्र,छत्तीसगढ,उत्तराखंड,जम्मू कश्मीर,दिल्ली,पंजाब,हरियाणा,बिहार,झारखंड,ओडिशा,असम सहित 22 प्रांतों के बिजली इन्जीनियर प्रतिनिधियों ने वाराणसी में हुई मीटिंग मे भाग लिया।ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे,सेक्रेटरी जनरल रत्नाकर राव,मुख्य संरक्षक पद्म्जीत सिंह,संरक्षक अशोक राव,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जगताप,बी आर मिश्र,उपाध्यक्ष जी के मिश्र,सेक्रेटरी राजीव सिंह ,बी एल यादव,पवन जैन,प्रशांत चतुर्वेदी, वी के एस परिहार,एल रवि,ए एन जयराज,श्रीनिवासलू,जार्ज मैथू,वाई एस परमार,पीरजादा हिदायतु ल्ला,के डी बंसल,प्रीतम कीरो सहित कई प्रमुख पदाधिकारी इस अहम बैठक मे सम्मिलित हुए।फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने एचएमटी न्यूज़ को दूरभाष पर बताया कि उन्होने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह , काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और अन्य राजनीतिक दलो के अध्यक्षों को पत्र भेजकर बिजली के निजीकरण की नीति से हो रहे भारी नुक्सान और आम जनता पर पड़ रही महँगी बिजली की मार के साथ ही बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली और संविदा व् ठेके के कर्मचारियों को नियमित करने का सवाल भी उठाया है।आज पारित प्रस्ताव मे कहा गया है कि विगत वर्षों में बिजली और कोयला क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बिजली के क्षेत्र में निजी घरानों को मनमानी छूट देने का नतीजा यह है कि लगभग 02:40 लाख करोड़ रु के बिजली संयंत्र ठप्प पड़े हैं और स्ट्रेस्ड असेट हो गए हैं जिसका खामियाजा इन्हे कर्ज देने वाले सरकारी क्षेत्र के बैंकों को भी उठाना पड़ रहा है ।गलत ऊर्जा नीति के चलते बिजली कम्पनियों पर 10लाख करोड़ रु से अधिक का घाटा और कर्ज हो गया है।भ्रश्टाचार के चलते निजी घरानों द्वारा कोयला आयात और बिजली प्लाण्ट के आयात के नाम पर 50हजार करोड़ रु से अधिक का घोटाला सामने आया है जिस पर खुफिया रिपोर्ट आ चुकी है जिसे दबाया जा रहा है।
केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण को शक्ति देने की बात भी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में हो जिससे भविष्य में मनमानी परियोजनाएं न बनने पाएं।बिजली फेडरेशन ने मांग की है कि राजनीतिक दल यह वायदा करें कि वे एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर ( जिसमे बिजली कर्मचारी व् उपभोक्ता भी हों ) इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की समीक्षा करेंगे , खासकर जल्दबाजी में बिजली बोर्डों का विघटन कर कई कार्पोरेशन बनाये जाने के दुष्परिणामों और निजीकरण हेतु किये जाने वाले और संशोधनों विशेषतया इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 /2018 को पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करेंगे। उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य बिजली निगमों का एकीकरण कर बिजली बोर्ड निगम का पुनर्गठन करना होगा जिसमे बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण एक साथ हों ।फेडरेशन ने यह भी प्रस्ताव पारित किया है कि ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और पुरानी पेंशन बहाली का वायदा भी सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में करे जिससे समय रहते देश के 25 लाख बिजली कर्मी और उनके परिवार यह निर्णय ले सकें कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें वोट दें या न दें।
ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन
रिपोर्ट नागेश्वर सिंह✍️
ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन की फ़ेडरल एक्जीक्यूटिव की आज प्रधान मन्त्री नरेन्द्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी मे हई मीटिंग मे पारित प्रस्ताव मे भाजपा , काँग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों से मांग की गई है कि वे बिजली सेक्टर और बिजली कर्मचारियों के हितों से जुड़े ज्वलन्त विषयों और निजीकरण के नाम पर बिजली के क्षेत्र मे चल रहे मेगा घोटालों को रोकने हेतु अपनी नीति स्पष्ट करें और चुनाव बाद की रणनीति बताएं।
आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन की आज यहाँ हई मीटिंग मे गुजरात,केरल,तेलंगाना,आन्ध्र प्रदेश,कर्नाटक,महाराष्ट्र,मप्र,छत्तीसगढ,उत्तराखंड,जम्मू कश्मीर,दिल्ली,पंजाब,हरियाणा,बिहार,झारखंड,ओडिशा,असम सहित 22 प्रांतों के बिजली इन्जीनियर प्रतिनिधियों ने वाराणसी में हुई मीटिंग मे भाग लिया।ऑल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे,सेक्रेटरी जनरल रत्नाकर राव,मुख्य संरक्षक पद्म्जीत सिंह,संरक्षक अशोक राव,वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील जगताप,बी आर मिश्र,उपाध्यक्ष जी के मिश्र,सेक्रेटरी राजीव सिंह ,बी एल यादव,पवन जैन,प्रशांत चतुर्वेदी, वी के एस परिहार,एल रवि,ए एन जयराज,श्रीनिवासलू,जार्ज मैथू,वाई एस परमार,पीरजादा हिदायतु ल्ला,के डी बंसल,प्रीतम कीरो सहित कई प्रमुख पदाधिकारी इस अहम बैठक मे सम्मिलित हुए।फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने एचएमटी न्यूज़ को दूरभाष पर बताया कि उन्होने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह , काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और अन्य राजनीतिक दलो के अध्यक्षों को पत्र भेजकर बिजली के निजीकरण की नीति से हो रहे भारी नुक्सान और आम जनता पर पड़ रही महँगी बिजली की मार के साथ ही बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन बहाली और संविदा व् ठेके के कर्मचारियों को नियमित करने का सवाल भी उठाया है।आज पारित प्रस्ताव मे कहा गया है कि विगत वर्षों में बिजली और कोयला क्षेत्र के निजीकरण के प्रयासों के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बिजली के क्षेत्र में निजी घरानों को मनमानी छूट देने का नतीजा यह है कि लगभग 02:40 लाख करोड़ रु के बिजली संयंत्र ठप्प पड़े हैं और स्ट्रेस्ड असेट हो गए हैं जिसका खामियाजा इन्हे कर्ज देने वाले सरकारी क्षेत्र के बैंकों को भी उठाना पड़ रहा है ।गलत ऊर्जा नीति के चलते बिजली कम्पनियों पर 10लाख करोड़ रु से अधिक का घाटा और कर्ज हो गया है।भ्रश्टाचार के चलते निजी घरानों द्वारा कोयला आयात और बिजली प्लाण्ट के आयात के नाम पर 50हजार करोड़ रु से अधिक का घोटाला सामने आया है जिस पर खुफिया रिपोर्ट आ चुकी है जिसे दबाया जा रहा है।
केंद्रीय विद्युत् प्राधिकरण को शक्ति देने की बात भी राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में हो जिससे भविष्य में मनमानी परियोजनाएं न बनने पाएं।बिजली फेडरेशन ने मांग की है कि राजनीतिक दल यह वायदा करें कि वे एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर ( जिसमे बिजली कर्मचारी व् उपभोक्ता भी हों ) इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की समीक्षा करेंगे , खासकर जल्दबाजी में बिजली बोर्डों का विघटन कर कई कार्पोरेशन बनाये जाने के दुष्परिणामों और निजीकरण हेतु किये जाने वाले और संशोधनों विशेषतया इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2014 /2018 को पूरी तरह समाप्त करने पर विचार करेंगे। उच्च स्तरीय समिति का मुख्य उद्देश्य बिजली निगमों का एकीकरण कर बिजली बोर्ड निगम का पुनर्गठन करना होगा जिसमे बिजली उत्पादन , पारेषण और वितरण एक साथ हों ।फेडरेशन ने यह भी प्रस्ताव पारित किया है कि ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सभी संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और पुरानी पेंशन बहाली का वायदा भी सभी राजनीतिक दल अपने घोषणा पत्र में करे जिससे समय रहते देश के 25 लाख बिजली कर्मी और उनके परिवार यह निर्णय ले सकें कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में उन्हें वोट दें या न दें।

इलेक्ट्रिसिटी पर प्रस्तावित संशोधन देशहित के विरूध्द है।
ReplyDeleteप्रायवेट सेक्टर द्वारा जनता को लूटने का प्लान है यह।।
संघों ने पहले ही बिजली की कीमत बढ़ने की चेतावनी दी थी ।
Privatisation के प्रयास रोके जाएं और सभी के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू हो।