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फास्ट-फूड से लेकर दाल, सब्जी, गैस, डीजल और पेट्रोल पर भी बहस जारी गृहणियों ने दी रसोई में महंगाई की दुहाई

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मॉल और रेस्टोरेंट में भी महंगायी की मार पर चर्चा
मोहम्मद शानू 

लखनऊ। दोपहर के करीब 2 बजे थे। ठाकुरगंज के घासमण्डी स्थित घंटेवाला रेस्टोरेंट में कुछ युवा बर्गर और छोला-भटूरे का ऑर्डर देने बाद उसका इंतजार कर रहे थे।  खाने के बाद मोहम्मद यासीन बर्गर और छोला-भटूरा का बिल देख कहते हैं कि यह पिछली बार से कुछ ज्यादा हो गया है। उनके यह कहते ही शुरु हो गई महंगाई पर चर्चा। बगल में बैठी गृहणी अनुजा सिंह अपनी बेटी के लिए  आइसक्रीम इंतजार कर रही थीं, महंगाई पर बात सुन तो वो भी इस चर्चा का हिस्सा बन गईं। धीरे-धीरे बर्गर और छोले-भटूरे के बिल से शुरू हुई चर्चा चुनाव के मुद्दे तक जा पहुंची।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे मनीष सिंह बोले बीजेपी की सरकार बनने के बाद बदलाव तो आया है। पहले जॉब का तो कुछ पता ही नहीं चलता था। आज इंडस्ट्री पर इंडस्ट्री आ रही हैं। सरकारी जॉब भले ही कम हो लेकिन रोजगार तो है ही। इस बात का समर्थन करते हुए राजेश गुप्ता बोले स्वच्छ भारत अभियान, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया और न जाने क्या-क्या। ये ऐसे प्रयास हैं जो कभी पिछली सरकारों ने नहीं किये और खास बात है कि ये युवाओं को केंद्र में रखकर शुरू किये गये हैं।
इस बीच रितेश ने चर्चा का रुख ही मोड़ दिया। रितेश बोले यह सभी योजनाएं बस अखबारों और कागजों पर ही हैं। स्किल इंडिया पर करोड़ों खर्च लेकिन जो मकैनिक था वो आज भी मकैनिक ही है। अखिलेश सरकार में जो काम हुआ वो दिख रहा है फिर चाहे वो मेट्रो हो, आईटी सिटी हो, एक्सप्रेस-वे या फिर जनेश्वर मिश्र पार्क ही क्यों न हो। जनता इनसे लाभांवित हो रही है। अगर मौजूदा सरकार की बातें करें तो सब कागजों पर है।
रितेश बोल ही रहे थे कि आशिष वाजपेयी ने उनको रोकते हुए कहा भाई, मैं बैंक में हूं। पहले बैंको की हालत क्या थी सबको पता है। महज एक नोटबंदी से आज बैंक मालामाल हो गये हैं। आज कोई भी बैंक से लोन लेना चाहे तो आसानी से मिल जाता है। बैंक खुद लोन देने के लिए फोन कर रही है जबकि पहले दलाल के बिना लोन ही नहीं हो पाता था।
आशीष वाजपेयी की बात चुपचाप सुन रहीं गृहणी अनुजा सिंह बोलीं, सही कह रहे हो तुम लोग लगता है रसोई भी अब लोन लेकर चलानी पड़ेगी। मैं तो सामान्य गृहणी हूं, मुझे कहां कितने पैसे आये ये तो नहीं पता पर जो गैस सिलिंडर पहले तीन से चार सौ रुपये में मिलता था आज उसके लिए 700 रुपये से ज्यादा चुकाने पड़ते हैं। दाल, सब्जी से लेकर अनाज तक सब महंगा हो गया है। अगर बैंक मालामाल हैं तो ये दाम बढ़ क्यों रहे हैं, इनको तो अब घट जाने चाहिए। मैं तो उसे वोट दूंगी जो इन चीजों के दाम करने का वादा करे। 
साथ बैठी गृहणी मनीशा बोलीं ये जो भी दिया जा रहा है वो हमसे लेकर ही हमको दिया जा रहा है। सरकार खुद क्या दे रही है। नेता जी पांच साल में अरबपति हो जाते हैं जबकि उनकी सैलरी पांच साल में कुल एक करोड़ भी नहीं होती। ये पैसे कहां से आते हैं उनके पास इसकी जांच नहीं होती। नेताओं की संपत्तियों की भी जांच होनी चाहिए।

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