मेहंदी से हथेली पर तुम्हारा नाम लिखती हूं. आकाशवाणी में बसंत ऋतु पर हुयी काव्यगोष्ठïी
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लखनऊ (सं)। आकाशवाणी लखनऊ की आरे से बसंत ऋतु के मौके पर काव्यगोष्ठी बसंत बहार का आयोजन सोमवार को आकाशवाणी लखनऊ केन्द्र में किया गया। इस मौके पर कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सबसे पहले मालविका ने काव्यगोष्ठी की शुरुआत सरस्वती वंदना हमे तू ज्ञान का उपहार दे मां, सुनाकर कार्यक्रम का आगाज किया। शायरा मालविका हरिओम ने सुनाया कि वक्त के साथ एहतराम बदल जाते है, आदमी देखकर सलाम बदल जाते हैं। इसके बाद कवि सर्वेश अस्थाना रिश्तों में तकरार बहुत है, लेकिन इनमें प्यार बहुत है। कवि मुकुल महान ने कोई दोहा बनाता है कोई चौपाई लिखता है कोई गीतो में रमता है, कोई रुबाई लिखता है सुनाकर वाहवाही लूटी। कवयित्री शिखा श्रीवास्तव ने मैं राधा की कहानी में अगर घनश्याम लिखती हूं तो मेहंदी से हथेली पर तुम्हारा नाम लिखती हूं सुनायी। पंकज प्रसून ने पढ़ा कि जिसको अपना ही न पाया उसको फिर मैं छोड़ू क्यूं, जिसको जां से जोड़ लिया है उसको दिल से जोड़ूं क्यूं। कुसुम वर्मा ने लोक सहित्य पर आधारित कविता आये हाए फूलन लागे फूल बसंत ऋतु आई। कवयित्री सरला शर्मा और आकाशवाणी के
पूर्व केन्द्र निदेशक पृथ्वीराज चौहान ने भी यहां अपनी रचनाएं सुनाकर तारीफ बटोरी। कार्यक्रम में प्रसिद्ध व्यंग्यकार कमलकांत अस्थाना और शहनाज ने भी अपनी अपनी रचनाओं को सुनाकर कार्यक्रम का यादगार बना दिया।
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