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संतानविहीन जोड़ों मेंOvary ka poor responsiएक बड़ी चुनौती

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लखनऊ। संतानविहीन जोड़ों को संतान का सुख देने में बाधक स्‍त्री की ovary में होने वाली खराब प्रतिक्रिया को रोकना बांझ दम्‍पतियों का इलाज करने वाले विशेषज्ञों के लिए एक बड़ी चुनौती है।



यह कहना है अजंता हॉस्पिटल एंड आईवीएफ सेंटर की जानी-मानी आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ गीता खन्‍ना का। संतान उत्‍पन्‍न करने वाले अंडे को तैयार करने के लिए बांझपन की विशेषज्ञ डॉक्‍टर स्‍त्री को हार्मोन्‍स दवायें देते हैं, इन दवाओं का सभी महिलाओं पर एक जैसा असर नहीं आता है जो कि चिंता का विषय है। किस हार्मोनल दवा का किस महिला पर क्‍या असर आयेगा, चिकित्‍सक के लिए यह जानना एक बड़ी चुनौती होती है।




डॉ गीता खन्‍ना ने बताया कि इसी विषय पर अजंता होप सोसाइटी ऑफ ह्यूमन रिप्रोडक्‍शन एंड रिसर्च के तत्वावधान में आज यहां होटल क्‍लार्क्‍स अवध में एक सतत चिकित्‍सा शिक्षा (सीएमई) का आयो‍जन किया गया। इसमें देश की जानी-मानी स्‍त्री रोग विशेषज्ञों ने लखनऊ और आसपास के करीब 250 प्रसूति एवं महिला रोग विशेषज्ञों से चर्चा करते हुए उन्‍हें जानकारी दी। उन्‍होंने बताया कि अंडाशय के विफल होने की दो स्‍टेज होती हैं। यह प्रारंभिक जीवन में विफल हो सकता है, जिसे premature ovarian failure प्कहा जाता है या देर से जीवन में जिसे रजोनिवृत्ति कहा जाता है।



उन्‍होंने बताया कि एएमएच और एएफसी जैसे विभिन्न मार्करों से ovarian reserve के बारे में जाना जाता है। लेकिन कुछ महिलाओं की अनपेक्षित कमजोर ovarian response के कारणों का इससे पता नहीं चलता है। इसके कारणों के बारे में उन्‍होंने बताया कि operations of ovarian cysts और एंडोमेट्रियोसिस, मधुमेह, धूम्रपान करने वालों, थैलेसीमिया, गुणसूत्र दोष, कुछ संक्रमणों, पोस्ट कीमो रेडियोथेरेपी, मोटापा, जीवन शैली और देर से विवाह पाया गया है।



डॉ गीता ने बताया कि इस सीएमई का उद्घाटन मुख्‍य अतिथि महापौर संयुक्‍ता भाटिया और आरएमएल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक प्रो दीपक मालवीय द्वारा संयुक्‍त रूप से किया गया। दिल्ली के विभिन्न विशेषज्ञों जैसे प्रोफेसर सुधा प्रसाद, डॉ गौरी देवी, डॉ पंकज तलवार, डॉ रूपाली बस्सी और मणिपाल के प्रोफेसर प्रताप कुमार ने इस मुद्दे पर बात की। इसमें भाग लेने वाले विशेषज्ञ प्रतिष्ठित संस्‍थान संजय गांधी पीजीआई, लोहिया संस्‍थान, कमांड हॉस्पिटल और केजीएमयू जैसे संस्‍थानों से हैं। उन्‍होंने बताया कि सीएमई में शामिल सभी विशेषज्ञों ने सलाह दी कि सही उम्र में शादी करें और परिवार को पूरा करने की जिम्‍मेदारी निभाना न भूलें, ऐसा न हो कि ovary की सक्रियता समाप्‍त हो जाये क्‍योंकि स्‍त्री के शरीर में कुदरती रूप से एक निश्चित संख्‍या में ही अंडे मिले हैं जो कि बढ़ती उम्र के साथ समाप्‍त हो जायेंगे। विशेषज्ञों ने युवा जोड़ों को सलाह दी कि इस बात का ध्‍यान रखें यदि उनकी गर्भधारण करने की 12 माह की कोशिश के बाद भी गर्भधारण न हो पाये तो उन्‍हें बांझपन विशेषज्ञ से सम्‍पर्क करना चाहिये। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि यदि विवाहित जोड़ों की उम्र 35 वर्ष से अधिक है और वे अपनी जीवन शैली और मोटापे पर नियंत्रण रखे हैं तो छह माह तक गर्भधारण की कोशिश सफल न होने की स्थिति में ऐसे जोड़ों को ऐसे लोगों को बांझपन विशेषज्ञ से मिलना चाहिये।

प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों के साथ खराब ovary प्रतिक्रिया (POR) के लिए नवीनतम रणनीतियों पर सत्र के अंत में एक पैनल चर्चा हुई।

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