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नगर निगम व एलडीए मनमाने तरीके से नहीं खर्च कर सकेंगे विकास का बजट

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लखनऊ। शासन के अवस्थापना निधि के बजट के खर्च में अब नगर निगम, आवास विकास व एलडीए की मनमानी नहीं चलेगी। शासन के दिशा निर्देश के हिसाब से ही अब यह विभाग अवस्थापना निधि से विकास कार्य करा सकेंगे। अपने चहेते अफसरों नेताओं, वकीलों, मंत्रियों व विधायकों के घरों के बाहर न तो सड़क बनवा पायेंगे न उनके पार्क संवार पायेंगे। अवस्थापना निधि का पैसा शासन के बताये कामों के हिसाब से ही खर्च होगा। इसकी निगरानी के लिए शासन ने पांच अधिकारियों की कमेटी बना दी है। सपा सरकार में अवस्थापना निधि का काफी दुरुपयोग हुआ था।

प्रदेश सरकार शहर के विकास के लिए अवस्थापना निधि के तहत बजट देती है। इसे शहर के विकास पर खर्च किया जाता है। नगर निगमए एलडीए व आवास विकास परिषद को यह बजट मिलता है। पिछले सपा व बसपा सरकार में अवस्थापना की रकम का काफी दुरुपयोग हुआ था। सपा शासन में एलडीए ने अवस्थापना के लगभग 40 करोड़ रुपये लमार्टीनियर कालेज में स्वीमिंग पूल व आडीटोरियम बनाने पर खर्च कर दिये थे। जबकि यह स्कूल मिशनरी का है। इसी तरह नगर निगम ने तत्कालीन एक मंत्री के शापिंग काम्प्लेक्स के बाहर के नाले को कवर्ड कराने पर बड़ी रकम खर्च की। गोमतीनगर में कई वीआईपी लोगों के घरों के पार्कों को पांच साल में तीन तीन बार संवारा गया। लेकिन अब शासन ने इस पर अंकुश लगा दिया है। लिहाजा अब विशेष सचिव आवास की अध्यक्षता वाली कमेटी अवस्थापना निधि के बारे में दिशा निर्देश देगी।
शासन ने अवस्थापना निधि के विकास कार्यों के दिशा निर्देश के लिए विशेष सचिव आवास राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कमेटी बनायी है। कमेटी में मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक तथा एलडीए, आवस विकास व नगर निगम के मुख्य अभियन्ताओं को भी शामिल किया गया है। इस सम्बंध में शासन ने तीन जनवरी को आदेश जारी कर दिया है।

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