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आज उत्तर प्रदेश में क्या कुछ हुआ

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[31/01, 7:18 a.m.

*यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए शिक्षकों का मांगा सहयोग*

*अपर मुख्य सचिव ने बैठक कर यूपी बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन कराने की*

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने शिक्षकों से यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाएं करवाने के लिए सहयोग की अपील की है। उन्होंने बुधवार को शिक्षक संगठनों व प्रधानाचार्य परिषद के साथ एक बैठक की। श्री तिवारी ने कहा कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक का सम्मान सर्वोपरि है और इनके सम्मान में कोई कमी नहीं रहेगी।अपर मुख्य सचिव ने कहा कि शिक्षकों की जो भी समस्याएं हैं, उनका समाधान किया जाएगा।उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केन्द्र में रखकर शुचितापूर्ण परीक्षा का आयोजन किया जाए। शिक्षक संगठनों ने अपनी कठिनाइयों को साझा किया।शिक्षक संगठनों ने विशेष रूप से परीक्षा के दौरान सचल दलों व नियुक्त मजिस्ट्रेटों द्वारा केन्द्र व्यवस्थापकों और व्यवस्था में लगे अन्य शिक्षकगणों से सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा प्रकट की। शिक्षक संगठनों ने बीते वर्षों के परीक्षा व मूल्यांकन से जुड़े पारिश्रमिक आदि का भुगतान किए जाने की मांग रखी।सभी शिक्षक संगठनों ने पारिश्रमिक दरों को पुनरीक्षित करने की मांग भी की। अपर मुख्य सचिव ने शिक्षक संगठनों को आश्वस्त किया कि शासन स्तर पर जो प्रस्ताव लम्बित हैं उन्हें विशेष सचिव चन्द्र विजय सिंह द्वारा समयबद्ध तरीके से निस्तारित किया जाएगा।बैठक में माध्यमिक वित्त विहीन शिक्षक महासभा के अध्यक्ष व शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी , राजकीय शिक्षक संघ के पारस नाथ पाण्डेय, माध्यमिक शिक्षक संघ के शिव कान्त ओझा समेत विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

[31/01, 7:18 a.m.

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*मऊ के पूर्व डीआईओएस सुनील दत्त को तीन माह की सजा*

*अवमानना में हाईकोर्ट ने सुनाई सजा, दो हजार जुर्माना लगा*

प्रयागराज। हाईकोर्ट ने अदालत के आदेश की अवहेलना करने पर मऊ के पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक और वर्तमान में उपसचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद सुनील दत्त को तीन माह के कारावास की सजा सुनाई है। उन पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने सुनील दत्त को सजा भोगने के लिए एक माह के भीतर सीजेएम इलाहाबाद (प्रयागराज) के समक्ष समर्पण करने का आदेश दिया है।विश्वनाथ लाल की अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने दिया। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस ने हाईकोर्ट के आदेश को समझे बिना उससे ऊपर जाकर आदेश दिया है। ऐसा करके उन्होंने हाईकोर्ट की अवमानना की है। हाईकोर्ट ने याची विश्वनाथ लाल को 21 जुलाई 1977 से 2009 तक की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभों की गणना कर भुगतान का आदेश दिया था। तत्कालीन डीआईओएस सुनील दत्त ने याची का प्रत्यावेदन निस्तारित करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने 1977 से 1994 तक के याची के दावे को अस्वीकार कर दिया है। इस स्थिति में वह सेवा और पेंशन आदि पाने का हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे अवमानना मानते हुए कहा है कि डीआईओएस को अपने किए का कोई पक्षतावा भी नहीं है इसलिए वह सजा के हकदार हैं।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*शोधार्थियों की फेलोशिप में छह से सात हजार तक की बढ़ोतरी*

नई दिल्ली:चुनाव से पहले सरकार ने शोधार्थियों को एक बड़ा तोहफा देते हुए उन्हें मिलने वाली फेलोशिप की राशि को बढ़ा दिया है। इसके तहत उन्हें अब हर महीने छह से सात हजार रुपये ज्यादा मिलेंगे। इस बढ़ोतरी के बाद जूनियर रिसर्च फेलो को अब हर महीने 31 हजार रुपये मिलेंगे, जबकि सीनियर रिसर्च फेलो (एसआरएफ) को 35 हजार रुपये मिलेंगे। बढ़ी हुई यह राशि शोधार्थियों को एक जनवरी 2019 से मिलेगी।रिसर्च एसोसिएट को मिलने वाले मानदेय को भी बढ़ाया गया है। इसमें 11 से 14 हजार तक की बढ़ोतरी गई है। इसके तहत रिसर्च एसोसिएट को अब पहले साल में हर महीने 47 हजार मिलेंगे, जबकि दूसरे साल में 49 हजार और तीसरे साल में 54 हजार रुपये हर महीने मिलेंगे। अभी तक पहले साल में इन्हें 36 हजार ही मिलते थे, जबकि दूसरे साल 38 हजार और तीसरे साल 40 हजार रुपये मिल रहे हैं। इसका फायदा केंद्र के सभी विभागों और उनसे जुड़ी एजेंसियों की ओर से दी जाने वाली फेलोशिप से जुड़े शोधार्थियों को मिलेगी। इनमें सीएसआइआर, मानव संसाधन विकास मंत्रलय, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, डीआरडीओ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे सभी संस्थानों पर लागू होगा। शोध क्षेत्र में काम कर रहे दो लाख शोधार्थियों को सीधा फायदा मिलेगा।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*धरना देंगी चयनित नर्से*
   
 लखनऊ: लोकसेवा आयोग इलाहाबाद से 1635 नर्सो को ज्वाइनिंग नहीं मिल पाई है। इसे लेकर स्वास्थ विभाग ने 23 जनवरी का समय दिया था जो बीत गया है। आक्रोशित उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेज संघ स्वास्थ्य विभाग का घेराव करने की तैयारी कर रही हैं। लोकसेवा आयोग इलाहाबाद की ओर से 17 जनवरी 2017 में स्टाफ नर्सिग भर्ती परीक्षा हुई थी, जिसमें 1635 नर्सो का चयन अस्पतालों के लिए हुआ था। जबकि 550 अतिरिक्त चयनित नर्सो की ज्वाइनिंग चकित्सा संस्थान में बीते साल नवंबर में करा दी गई थी।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*परीक्षा में फंसी यूपी बोर्ड की कॉपियां*
   
 लखनऊ : बोर्ड की उत्तर-पुस्तिका व पेपर रिसीव करने में केंद्र हीलाहवाली कर रहे हैं। तीन दिन में आधा सैकड़ा केंद्र व्यवस्थापक ही स्ट्रांग रूम पहुंचे। वहीं तीन दिन कॉपियों का उठान बंद रहेगा। ऐसे में समय पर सभी केंद्रों पर कॉपी पहुंचाना चुनौती होगा।बोर्ड परीक्षा सात फरवरी से है। राजधानी में जेल समेत 113 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। सभी केंद्र व्यवस्थापकों को डीआइओएस ने गुरुवार तक कॉपी-पेपर उठाने के निर्देश दिए थे। वहीं सोमवार से उत्तर-पुस्तिका व पेपर का वितरण शुरू हुआ है। तीन दिनों में अब तक जहां 69 केंद्र ही जुबली इंटर कॉलेज से पेपर ले गए हैं। वहीं निशातगंज इंटर कॉलेज से सिर्फ 47 केंद्र ही कॉपियां ले गए हैं। इसके अलावा एक, दो फरवरी को प्रवक्ता व तीन फरवरी को आयोग की परीक्षा है। लिहाजा, निशातगंज इंटर कॉलेज जीआइसी के परीक्षा केंद्र होने की वजह से बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक रहेगी। कॉपियों का वितरण ठप रहेगा। ऐसे में परीक्षा केंद्रों को गुरुवार को हर हाल में उत्तर पुस्तिकाएं उठाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विद्यालयों में उनके सुरक्षित रखरखाव व सीरियल नंबर समेत तमाम व्यवस्थाएं पूरी की जा सकें।

*700 स्कूल के प्रवेश पत्र बटें*

विद्यालय प्रवेश पत्र व बोर्ड ड्यूटी रिसीव करने में सक्रिय दिख रहे हैं। बुधवार को सात विद्यालयों को प्रवेश पत्र दे दिए गए हैं। वहीं सौ के करीब शेष रह गए हैं।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*छात्रओं को बना दिया ‘श्रीमती’*
   
 लखनऊ : बोर्ड परीक्षा के प्रवेश पत्र में गड़बड़ियों की भरमार है। कई विद्यालयों की छात्रओं को ‘श्रीमती’ बना दिया। ऐसे में वह डीआइओएस कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।राजधानी में आठ सौ के करीब माध्यमिक स्कूल हैं। इसमें 153 राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालय हैं, शेष वित्तविहीन हैं। इन कॉलेजों के हाईस्कूल के 55,801 व इंटर के 44,277 के करीब विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा देंगे। वहीं सोमवार से शुरू हुए प्रवेश पत्र वितरण में गलतियों की भरमार मिली। छात्र-छात्रओं के हाथों में प्रवेश पत्र पहुंचते ही वह चकरा गए। इंटर की छात्रओं को श्रीमती बना दिया गया। वहीं छात्रों के नाम के आगे भी श्रीमती लिख दिया गया। अभी तक सात सौ स्कूलों को प्रवेश पत्र मिले हैं। उनमें करीब 80 से 85 विद्यालय के हजार से ऊपर छात्र-छात्रओं में यह गड़बड़ी पाई गई है।

*कई छात्रों के नहीं मिले प्रवेश पत्र :*

राजधानी के दो स्कूलों में आधे छात्रों के ही प्रवेश पत्र मिले हैं। उन्होंने डीआइओएस कार्यालय में गुहार लगाई है। डीआइओएस के मुताबिक छात्रों की समस्याओं को बोर्ड भेज दिया गया है।

[31/01, 7:18 a.m.

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*ईको गार्डन में एनएचएम संविदा कर्मियों का प्रदर्शन*
     उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के आह्वान पर बुधवार को ईको गार्डेन में प्रदेश भर के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) संविदा कर्मचारी हजारों की संख्या में जुटे। सुबह से ही विभिन्न जिलों से बसों के द्वारा संविदा कर्मचारी धरना स्थल पहुंचने लगे। सुबह 11 बजे तक हजारों की संख्या में एनएचएम संविदा कर्मचारी एकजुट होकर नारेबाजी करने लगे। संघ के अध्यक्ष मयंक प्रताप सिंह ने कहा कि समान कार्य समान वेतन, आउट सोर्सिग व ठेका प्रथा खत्म करने, निष्कासित किए गए कर्मचारियों की बहाली और आशा बहुओं को आंगनबाड़ी कार्यकत्री के बराबर दस हजार मानदेय देने सहित सात मांगें पूरी होने तक आंदोलन खत्म नहीं होगा।

*पुलिस ने लाठी पटककर खदेड़ा :*

आलमबाग व बंगला बाजार की ओर जाने वाले मार्ग पर जाम लग रहा था। पुलिस ने लाठी पटककर जाम हटाया।

[31/01, 7:18 a.

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*राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का धरना आठ को*
    लखनऊ: कर्मचारियों की विभिन्न मांगों को लेकर आठ फरवरी को लखनऊ के ईको गार्डेन में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद धरना प्रदर्शन करेगी। यह जानकारी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय अध्यक्ष जेएन तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि इस धरने में प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा विभाग, चिकित्सा शिक्षा डिप्लोमा लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन, माध्यमिक शिक्षक संघ, राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ सहित कई संगठनों ने समर्थन दिया है। आठ फरवरी को ही अगली रणनीति पर विचार कर निर्णायक संघर्ष की घोषणा की जाएगी। आज हुई बैठक में परिषद अध्यक्ष जेएन तिवारी, संयोजक सुरेश मिश्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जसवंत सिंह, उपाध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, महेंद्र पांडेय, रिंकू राय, हरगोविंद यादव मौजूद रहे।

[31/01, 7:18 a.m.

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*परीक्षा के तनाव का जिम्मेदार कौन*
   
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में देशभर से बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की चिंताओं पर चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने परिजनों को भी सलाह दी कि बच्चों पर अच्छे नंबर लाने का अनावश्यक दबाव न बनाएं, क्योंकि इससे ही परिस्थिति बिगड़ती है। प्रधानमंत्री ने ऑनलाइन गेम्स से लेकर सोशल मीडिया और परीक्षा में नंबरों पर टिप्स दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके पहले भी बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ इसी तरह की चर्चा कर चुके हैं। दरअसल यह पहली बार नहीं है जब परीक्षा से पहले बच्चों को तनाव से बचाने की कोई पहल हुई हो। बीते कुछ वर्षो से ऐसी तमाम कवायदें विभिन्न स्तरों पर होती रही हैं। जब भी परीक्षा के तनाव के बारे में चर्चा होती है तो एक साथ कई विचार बड़ी तेजी से हमारे जेहन में उठते हैं। एक विचित्र-सा डर, भ्रम, परेशानी, अफरा-तफरी, दुविधा, उदासी, चिड़चिड़ापन और न जाने कितनी मानसिक और भावनात्मक अवस्थाओं को अपने में समेटे हुए परीक्षा के तनाव विद्यार्थियों के जीवन के लिए किसी दु:स्वप्न से कम डरावने नहीं होते हैं।
दुनिया भर के मनोविश्लेषक और शिक्षाविद् परीक्षा के तनाव को दूर करने के लिए कई प्रकार के टिप्स और टिक्स की अनुशंसा करते आ रहे हैं। सब की अपनी-अपनी राय होती है और अपना-अपना नजरिया। कोई अपने अनुभव के आधार पर परीक्षा के तनाव के शमन के लिए उपाय बताता है तो कोई अपने किताबी ज्ञान के आधार पर तरकीब, लेकिन यहां पर आत्मचिंतन का एक प्रश्न यह उठ खड़ा होता है कि आखिर एक छात्र परीक्षा के तनाव का शिकार ही क्यों होता है? संजीदगी से विचार के लिए यह विषय भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि आखिर वे कौन-सी परिस्थितियां हैं जो किसी छात्र को मानसिक रूप से उद्वेलित करने के लिए जिम्मेदार होती हैं? ये वे सवाल हैं जिन पर गहन विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

पिछली सदी के आखिरी दशक में शुरू हुए आर्थिक सुधारों के उत्तर संक्रमण काल में, जबकि पूरी दुनिया उदारीकरण और वैश्वीकरण के अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है तब इस सच को झुठलाना आसान नहीं होगा कि इसके कारण मानव जीवन की सोच के ढंग और जीवन-शैली में भी बेशुमार अप्रत्याशित तब्दीलियां आई हैं। तिस पर जीवन में सूचना तकनीक की क्रांति के दखल ने तो आग में घी सरीखा काम किया है। सोशल नेटवर्किग साइट्स के विभिन्न उपादानों के रूप में फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्विटर और कई अनेक चमत्कारी और मनभावन खोजों से जीवन के संस्कार, मानवीय मूल्य और नैतिक मर्यादाएं भी अछूते नहीं रह पाए हैं। इन चाहे-अनचाहे परिवर्तनों के कारण कुल मिलाकर हर व्यक्ति के जीवन में रंगीनियां आई हैं और अंतत: हम अपने गंतव्य की राह से भटकते दिखते हैं। इतना ही नहीं उत्प्रेरक के रूप में कार्य कर रहीं सोशल नेटवर्किग साइट्स की जादुई दुनिया से एक किशोर छात्र का जीवन भी अछूता और महफूज नहीं रह पाया है और परिणामस्वरूप उसके मन में अजीबोगरीब भटकाव आया है।

उनके आगमन के साथ ही कुदरती जिस्मानी परिवर्तन के साथ मन की दशा प्रदूषित हुई है। इस सत्य से कदाचित ही कोई इन्कार कर पाए कि बदले समय की अनिवार्यता के साथ हाल के दशकों में विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन बढ़ा है। कोर्स और कक्षाओं के पाठ्यक्रम जटिल हुए हैं और इसने विद्यार्थियों के मानसिक सुकून छीने हैं। परिणामस्वरूप बच्चों को इन समस्याओं से मुक्त करने के लिए पाठ्य पुस्तकों की संख्या कम करने और पाठ्यक्रम को घटाने की दलीलों से शिक्षा बाजार गर्म है। प्राथमिक स्तर पर बच्चों के स्कूली बैग कम करने की तो एक पहल हुई है, लेकिन अभी यह पहल सीमित ही नजर आती है। इस पहल के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठ खड़ा होता है कि क्या महज स्कूल बैग का भार कम कर देने से या फिर पाठ्यक्रम का स्तर निम्न कर देने से छात्रों को परीक्षा के तनाव से महफूज रखा जा सकता है?

छात्र जीवन में स्वाध्याय यानी सेल्फ स्टडी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे एक छात्र कठिन मेहनत के बल पर खुद में अंतर्निहित कमियों की भरपाई करता है और एकलव्य की तरह अपनी विधा में महारत हासिल कर लेता है, लेकिन दुर्भाग्यवश पिछले दो-तीन दशकों में छात्रों के जीवन के स्व-निर्माण के इस रामबाण में काफी क्षरण आया है। छात्रों द्वारा घंटों वॉट्स एप पर अपने दोस्तों के साथ चैटिंग करने और यू-ट्यूब पर वीडियो देखने में जिस बहुमूल्य समय की बर्बादी की जाती है, आज उस पर गहनता से चिंतन की दरकार है।

प्राय: ऐसा माना जाता है कि यदि आप किसी कार्य के संपादन के लिए योजना बनाने में असफल रहते हैं तो आप असफल होने की योजना बना रहे होते हैं। किसी कार्य की व्यापकता को ध्यान में रखते हुए योजनाबद्ध तरीके से कामयाबी पाने की व्यूहरचना के अभाव में मन में चिंता फिर निराशा और अंतत: तनाव उत्पन्न होता है। अनियोजित और अव्यवस्थित जीवन शैली और बाहरी दुनिया से अत्यधिक एक्सपोजर के कारण मन-भटकाव का जो सिलसिला शुरू होता है वह फिर अंत में निराशा का कारण बन जाता है। सच पूछें तो परीक्षा के बारे में जब छात्रों की नींद खुलती है तब तक पीछे जाकर चीजों को फिर से सहेजने के लिए काफी देर हो चुकी होती है। तिस पर अभिभावकों द्वारा अपने बच्चों से जमीनी सच्चाई से परे उम्मीद रखने से भी मन एकाएक व्याकुल हो उठता है जिसकी परिणति हताशा और अवसाद में होती है। लिहाजा परीक्षा संबंधी तनाव को अपने जीवन से दूर रखने के लिए छात्रों की जीवन शैली में अहम परिवर्तन की दरकार है।

जीवन में इसके लिए एक लक्ष्य निर्धारित करके उसका शिद्दत से पीछा करने की जरूरत है। करत-करत अभ्यास ते जड़मति होत सुजान के आधार पर निरंतर अध्ययन करने और नया सीखने की आदत का विकास करना होगा। मोबाइल फोन और टेलीविजन के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए मन पर कठोर नियंत्रण अति आवश्यक है। तेजी से गुजरते समय और छात्र-जीवन की अहमियत को पहचानते हुए और मन को वश में करते हुए यदि स्वाध्याय के माध्यम से अपने और मां-बाप के सपनों को साकार करने की पूरी सच्चाई और लगन से कोशिश की जाए तो परीक्षा एक तनाव नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन यात्र का एक प्रतीक्षित और सुखद पड़ाव बन जाता है।

(लेखक मिजोरम स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के प्राचार्य हैं)

[31/01, 7:18 a.m.]

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*शिक्षक संघों ने उठाई मूल्यांकन दरों में संशोधन की मांग*
   
लखनऊ : बोर्ड परीक्षा में सहयोग के लिए माध्यमिक शिक्षक संघ के सभी धड़ों की बैठक में नेताओं ने मूल्यांकन व अन्य लंबित पारिश्रमिक के जल्द भुगतान की मांग उठाई। उन्होंने पारिश्रमिक दरों को पुनरीक्षित किए जाने की बात भी कही। बैठक की अध्यक्षता कर रहे अपर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने उनकी मांगों पर सार्थक कदम उठाने का आश्वासन दिया।उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा के निर्देश पर बुधवार को अपर मुख्य सचिव ने यह बैठक बुलाई थी। उन्होंने सभी संघों के पदाधिकारियों से बोर्ड परीक्षा में सहयोग का आग्रह किया। परीक्षा में नकल रोकने के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा सकते हैं, इस पर भी चर्चा की गई। शिक्षक नेताओं ने यह भी कहा कि परीक्षा में लगे मजिस्ट्रेट व अन्य अधिकारियों द्वारा कक्ष निरीक्षण व अन्य कार्यो में लगे शिक्षकों से र्दुव्‍यवहार न किया जाए। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इसके लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएंगे। शिक्षक संगठनों ने कहा कि कक्षा-नौ एवं कक्षा-11 के पंजीकरण में विद्यालयों को मिलनेवाले प्रति छात्र दस रुपये पर भी जल्द निर्णय लिया जाए। यह भी कहा कि अन्य सीबीएसई व अन्य बोर्ड मूल्यांकन का पारिश्रमिक अधिक दे रहे हैं जबकि यूपी बोर्ड का कम है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा राजेंद्र तिवारी ने कहा कि कहा कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक का सम्मान सवरेपरि है। उनके सम्मान में कोई कमी नहीं रहेगी।बैठक में विशेष सचिव चंद्र विजय सिंह, शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय, यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव के साथ ही विधान परिषद सदस्य उमेश द्विवेदी, शिक्षक नेता शिव कान्त ओझा, जगदीश पाण्डेय, अमर नाथ सिंह, ब्रजेश शर्मा, डा. वीरेन्द्र कुमार त्रिपाठी, पारस नाथ पाण्डेय उपस्थित रहे।

[31/01, 7:18 a.m.

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*कटऑफ अंक पर दो न्यायपीठों में आज एक साथ सुनवाई*
     लखनऊ: परिषदीय स्कूलों की 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा के लिए तय कटऑफ अंक पर गुरुवार को दो न्यायपीठों में सुनवाई होगी। लखनऊ खंडपीठ में दो दिन से इस मुद्दे पर बहस चल रही है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी कुछ अभ्यर्थियों ने कटऑफ को चुनौती दी थी, कोर्ट ने परीक्षा के रिजल्ट पर यथास्थिति बरकरार रखते हुए 31 को सुनवाई की तारीख तय की है।शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा छह जनवरी को कराई गई, अगले दिन शासन ने परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए कटऑफ अंक तय कर दिए। इसमें सामान्य को 65 व आरक्षित वर्ग को 60 प्रतिशत अंक लाने होंगे। परीक्षार्थियों ने इसी को चुनौती दी है, उनका कहना है कि इम्तिहान के बाद आखिर कटऑफ अंक क्यों तय किए गए और इतना अधिक उत्तीर्ण प्रतिशत निर्धारित करना उचित नहीं है। इस मामले में सरकार ने भी हलफनामा देकर स्पष्ट किया है कि परीक्षार्थियों व सीटों को देखते हुए यह निर्णय किया गया है। कुछ अभ्यर्थियों ने लखनऊ खंडपीठ तो कुछ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट मुख्य न्यायपीठ की ओर रुख किया। लखनऊ में 29 जनवरी से सुनवाई चल रही है, माना जा रहा था कि लखनऊ पीठ दो दिन पहले ही इस मामले में फैसला देगा और उस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट मुहर लगा देगा लेकिन, ऐसा नहीं हो सका है। घंटों बहस के बाद याचिकाओं पर अंतिम निर्णय अब तक नहीं हो सका है। इससे परीक्षा की संशोधित उत्तरकुंजी और परिणाम अधर में लटका है। ज्ञात हो कि संशोधित उत्तर कुंजी 19 जनवरी व परिणाम 22 जनवरी को जारी होना था। शिक्षा विभाग के अफसर व अभ्यर्थी कोर्ट पर निगाहें लगाए हैं कि आखिर निर्णय क्या होता है? इस केस में सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील प्रशांत चंद्रा ने अपनी बहस में लिखित परीक्षा के बाद सरकार द्वारा क्वालीफाइंग मार्क्‍स तय करने के निर्णय को सही करार दिया है।

 प्रयागराज : अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए हुई परीक्षा में प्रश्न और उत्तरों की गलतियों का अंबार मिला है। अभ्यर्थियों की ओर से बुधवार तक करीब चार हजार आपत्तियां दी गई हैं। आकड़े ही यह बताने के लिए काफी हैं कि उप्र उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग यानी यूपीएचईएससी ने कैसे विशेषज्ञों का चयन किया। दो चरण में हुई परीक्षा से संबंधित आपत्तियां लेने के बाद अब तीसरे चरण की उत्तरकुंजी के लिए अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र आउट होने के आरोप की न्यायिक जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करना होगा।यूपीएचईएससी ने विज्ञापन संख्या 47 के तहत 15 दिसंबर को पहले चरण में हुई परीक्षा की उत्तरकुंजी 19 को और पांच जनवरी को दूसरे चरण की लिखित परीक्षा की उत्तरकुंजी 21 को जारी की थी। इन दोनों ही उत्तरकुंजी के वेबसाइट पर अपलोड होते ही अभ्यर्थियों की ओर से विभिन्न प्रश्नों के उत्तर विकल्प पर अंगुली उठी थी। विषय के अलावा सामान्य अध्ययन के प्रश्नों में भी मॉडरेशन ठीक से न होने के आरोप लगे। हालांकि अभ्यर्थियों से 30 तक यूपीएचईएससी ने आपत्तियां मांगी थीं। कुल 35 विषयों के सापेक्ष दो चरण की परीक्षा के तहत 29 विषयों में करीब चार हजार आपत्तियां भेजी गई हैं। हालांकि इसमें एक ही सवाल पर आठ से 10 कॉमन आपत्तियां भी शामिल हैं।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*पदोन्नति के लिए दौड़ 24 फरवरी को*
   
लखनऊ : उपनिरीक्षक सशस्त्र पुलिस/प्लाटून कमांडर पीएसी के पदों पर पदोन्नति के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (दौड़) 24 फरवरी को 35वीं वाहिनी पीएसी लखनऊ में सुबह आठ बजे से होगी। उप्र पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार अभ्यर्थियों को 3.2 किलोमीटर की दौड़ 35 मिनट में पूरी करनी होगी। इससे जुड़ा ब्योरा भर्ती बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।

[31/01, 7:18 a.m.]

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*स्कूल से गायब रहने वालों की तैयार करें सूची*
   
 लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों से गायब रहने वाले शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और प्रधानाध्यापकों की सूची तैयार होगी। यह निर्देश अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. प्रभात कुमार ने बुधवार को योजना भवन में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिये जिला स्तर के विभागीय अधिकारियों को दिये। उन्होंने कहा कि यह भी सूची बनाई जाए कि इस दौरान स्कूल या कार्यालय से गायब रहने वाले कितने लोगों के वेतन की कटौती की गयी है। डॉ. प्रभात ने कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी खुद और खंड शिक्षा अधिकारियों के जरिये परिषदीय विद्यालयों का नियमित निरीक्षण सुनिश्चित कराएं। अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और स्कूल से गायब रहना कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

[31/01, 7:18 a.m.]

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*शिक्षकों ने ज्ञापन सौंपा, मांगी पदोन्नति*
   
सिद्धार्थनगर: बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने बुधवार को बीएसए राम सिंह को ज्ञापन देकर तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके शिक्षकों को पदोन्नति मांगा। बीएसए ने जल्द ही कार्रवाई की बात करते हुए बताया कि पूर्व माध्यमिक के तमाम विद्यालय एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय के तमाम शिक्षकों ने शाम को जिला बेसिक शिक्षा कार्यालय पर बीएसए के माध्यम से सचिव बेसिक शिक्षा को ज्ञापन भेजा। शिक्षक सुरेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि तमाम प्राथमिक विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हैं। साथ ही पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शिक्षकों के तमाम पद खाली हैं। बीएसए ने बताया कि सभी शिक्षक पूर्ण मनोयोग से शिक्षण कार्य करें। जल्द ही पदोन्नति दिया जाएगा। इस अवसर पर संदीप द्विवेदी, अल्पना सिंह, अमित द्विवेदी, हरिमोहन सिंह, पशुपति दूबे, संतोष पांडेय, सुरेन्द्र सिंह, कैलाश त्रिपाठी, नगीना राय, विक्रांत त्रिपाठी, अभिलाषा रानी, अंजली श्रीवास्तव, आनंद पांडेय, ब्रजेश पांडेय, मीरा, वंदना त्रिपाठी, शिखा गुप्ता, दीपिका निगम, प्रीति शर्मा, प्रवीण मिश्र, वंदना सिंह, संध्या कबीर, वर्षा, बबीता यादव, अनिल यादव, शिखा कुशवाहा सहित तमाम लोग उपस्थित रहे

[31/01, 7:19 a.m.]

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*स्कूल देर से आने पर टोका तो दो शिक्षिकाओं को पिता ने डंडे से पीटा*

हापुड़:उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में बाबूगढ़ क्षेत्र के गांव रसूलपुर बहलोलपुर स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय में बुधवार सुबह स्कूल देर से पहुंचे छात्र को टोकना दो शिक्षिकाओं को भारी पड़ गया। छात्र के पिता ने शिक्षिकाओं को डंडे से पीटकर घायल कर दिया, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी मच गई। स्कूल के स्टाफ ने आरोपी को पकड़कर कमरे में बंद कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। थाना बाबूगढ़ पुलिस ने शिक्षिकाओं की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बुधवार सुबह रसूलपुर बहलोलपुर गांव निवासी सतेंद्र शर्मा अपने बेटे को स्कूल लेकर पहुंचे। तभी शिक्षिकाओं ने बच्चे और उसके पिता को देर से आने पर टोक दिया। आरोप है कि इससे सतेंद्र भड़क गया और उसने डंडे से सहायक अध्यापिका सीमा रानी और आरती सिंह को पीटना शुरू कर दिया। मारपीट से मची अफरा-तफरी में कुछ फर्नीचर टूट गया और दो अन्य बच्चे कशिश और प्राची भी घायल हो गए। मारपीट में शिक्षिका आरती सिंह के सिर, आंखों में चोट आईं, जबकि सीमा रानी के बायें हाथ की अंगूठी में चोट लगी। इस दौरान शिक्षिकाओं ने साहस दिखाते हुए आरोपी को कमरे में बंद कर दिया और पुलिस बुलाकर सौंप दिया। इसके बाद शिक्षिकाओं ने कोतवाली में सतेंद्र के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने घायल बच्चों और शिक्षिकाओं का मेडिकल कराकर आरोपित सतेंद्र शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी बाबूगढ़ मुकेश कुमार ने बताया कि शिक्षिकाओं की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।

[31/01, 7:19 a.m.]

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*उर्दू अरबी फारसी विवि में 11 फरवरी से पीएचडी का साक्षात्कार*

ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू अरबी फारसी विश्वविद्यालय पीएचडी में दाखिले के लिए साक्षात्कार 11 फरवरी से शुरू होंगे और 14 फरवरी तक चलेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी प्रवेश परीक्षा का परिणाम 28 जनवरी को घोषित किया था। इसकी प्रवेश परीक्षा 20 जनवरी को आयोजित की गई थी।विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. माहरूख मिर्जा ने बताया कि विश्वविद्यालय वेबसाइट की अधिकृत वेबसाइट www.uafulucknow.ac.in पर साक्षात्कार का विस्तृत कार्यक्रम उपलब्ध है। साथ ही परीक्षा परिणाम एवं सम्बन्धित निर्देश भी मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि 11 फरवरी को अंग्रेजी विषय का सुबह आठ बजे से, गृह विज्ञान का सुबह 9.30 बजे से, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग का सुबह 11.30 बजे से, इतिहास का दोपहर दो बजे से और शारीरिक शिक्षा का शाम चार बजे से साक्षात्कार होगा। साथ ही 12 फरवरी को वाणिज्य विषय का सुबह 8.30 बजे से, कम्प्यूटर साइंस का दोपहर 12.30 बजे से, व्यवसाय एवं प्रबन्धन का दोपहर दो बजे से अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जाएगा। इसके अलावा 13 फरवरी को फारसी विषय का सुबह 8.30 बजे से, अरबी का सुबह 9 बजे से, उर्दू का सुबह 10 बजे से साक्षात्कार होगा। वहीं 14 फरवरी को भूगोल विषय का सुबह 8.30 बजे से और शिक्षा शास्त्र का सुबह 10.30 बजे तक साक्षात्कार चलेगा

[31/01, 7:19 a.m.]

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*यूपी बोर्ड में छह महीने के लिए हड़ताल पर रोक*

प्रदेश सरकार ने यूपी बोर्ड परीक्षाओं के मद्देनजर माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधीन सभी सेवाओं में हड़ताल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक छह महीने तक प्रभावित रहेगी। हड़ताल पर रोक का यह आदेश ‘उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम-1966 के तहत लगाया गया है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं फरवरी के पहले हफ्ते में शुरू हो रही हैं।

[31/01, 7:19 a.m.]

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*इग्नू ने शुरू किए चार नये शार्ट टर्म कोर्स*
,लखनऊ:इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) ने स्वास्थ्य से जुड़े चार नए कोर्स शुरू किए हैं। इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र के सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. विक्रम सिंह ने बताया कि यह सभी कोर्स छह माह के हैं। जिसकी न्यूनतम अर्हता 12 वीं है। जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सम्बंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर कर स्वास्थ्य क्षेत्र में स्किल्ड स्टॉफ तैयार करना है।जिसमें सर्टिफिकेट इन जनरल ड्यूटी असिस्टेंट (सीजीडीए), सर्टिफिकेट इन जीरियाटिक केयर असिस्टेंट (सीजीसीए), सर्टिफिकेट इन फिलेबॉटमी असिस्टेंट (सीपीएफए), सर्टिफिकेट इन होम हेल्थ असिस्टेंट (सीएचएचए) कोर्स शामिल हैं। सभी कोर्स में जनवरी 2019 सत्र के लिए नामांकन की अन्तिम तारीख 11 फरवरी है।

[31/01, 7:19 a

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*आश्रम पद्धति कालेज चित्रकूट के संविदाकर्मियों को राहत*

प्रयागराज। हाईकोर्ट ने राजकीय आश्रम पद्धति कॉलेज चित्रकूट के संविदाकर्मियों को राहत देते हुए उनको सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया है। डीएम चित्रकूट ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि जब उपनिदेशक समाजकल्याण ने संविदाकर्मियों का कार्यकाल बढ़ा दिया तो तथ्यहीन शिकायत पर उनकी सेवा समाप्त करने का औचित्य नहीं है। कोर्ट ने डीएम से कहा कि वह नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करते हुए नए सिरे से आदेश पारित करें।याचीगण ने काम किया है तो वह मानदेय पाने के हकदार हैं।आशुतोष शुक्ल और 23 अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने दिया है। याचीगण का कहना था कि उनका चयन नियमानुसार हुआ है। एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर नवीनीकरण का आदेश दिया गया। इस बीच किसी ने शिकायत की कि याचीगण पद की योग्यता नहीं रखते हैं। इस शिकायत पर डीएम ने एक पक्षीय आदेश देते हुए उनकी नियुक्तियां रद्द कर दीं। कोर्ट ने कहा कि डीएम ने जांच करते समय याचीगण को सफाई देने का मौका नहीं दिया, इसलिए आदेश नैसर्गिक न्याय के विपरीत और रद्द होने योग्य है।

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