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42 सालों से लोगों के दिलों पर राज कर रहा है यह महा उत्सव



खानपान से लेकर झूलें समेत विभिन्न आयोजन होते हैं महोत्सव में
लखनऊ (सं)। जश्ने विरासत की थीम से शहर में चल रहा लखनऊ महोत्सव 42 साल का हो गया है। 



लखनवी खानपान, पहनावे, संस्कृति और तहज़ीब को दुनिया के सामने पेश करता हुआ यह लखनऊ महोत्सव पिछले 42 सालों से शहरवासियों के दिलों पर राज करता चला आ रहा है। इस महा उत्सव ने पिछले दस सालों में कई उतार चढ़ाओ और बदलाओ भी देखे।




 मगर हर किसी के दिल पर यह आज भी उतना ही राज कर रहा है जितना पिछले 42 सालों से कर रहा था। सार्क देशो ने मिलकर 42 साल पहले पर्यटन वर्ष मनाया था। जिससे प्रेरित होकर उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने 1976 में लखनऊ की गंगा जमुनी तहज़ीब को सबके सामने लाने के मकसद से लखनऊ महोत्सव शुरू किया। 1976 में सबसे पहले फरवरी माह में इसका आयोजन हजऱतगंज स्तिथ बेगम हजऱत महल पार्क में किया गया। 


इसके बाद जगह छोटी पडऩे और इस स्थान पर अदालत की रोक के बाद महोत्सव को गोमती तट पर बने लक्ष्मण मेला मैदान पर लगाया। जहां बीते एक साल कुछ हंगामा होने के कारण जेल रोड स्तिथ आम्बेडकर मैदान पर लगाया गया और फिर यह रमाबाई मैदान में लगाया गया। अब यह पिछले कुछ सालों से आशियाना के सेक्टर एल के क्षेत्रीय पार्क में आयोजित किया जाने लगा है।


 महोत्सव में आने वाले लोगो के लिए यहां कई जानकारियों को प्राप्त करने के अलावा विभिन्न राज्यों के सामान, वस्त्र, खान पान, कृषि से जुड़ी जानकारी आदि दी जाती है।



 साथ ही बॉलीवुड के कलाकारों की प्रस्तुति इसे और यादगार बना देती है। वहीं महोत्सव के ही तहत नाट्य समारोह का आयोजन और पतंग, इक्का तांगा, राइफल, विंटेज कार रैली प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है। पिछले 42 सालों में महोत्सव के आयोजन की तारीखों में भी कई बार बदलाओ हुआ। मगर मुख्यता इसको नवम्बर और दिसम्बर माह में ही आयोजित किया जाता है।



 इस बार अपनी वी सालगिरह मना रहा लखनऊ का यह महाउत्सव लोगों के दिलों पर बीते सालों की तरह आज भी राज करने में कामयाब रहा है। लखनऊ महोत्सव हमेशा से ही शहरवासियों के लिए घूमने फिरनें के मकसद से बेहद अहम स्थान और मौज मस्ती की दृष्टि से चर्चित और पसंदीदा जगह रही है।



यहां शहर के लोग घूमने और खरीदारी की नियत के अलावा गंगा जमुनी तहज़ीब और नवाबों द्वारा बनायी खूबसूरत इमारतो के निर्माण के पीछे छुपी दास्तान को जानने के उद्देश्य से आते है। मगर इस साल महोत्सव पिछले सालों के मुकाबले काफी अधूरा अधूरा दिखायी दे रहा है। महोत्सव में पिछले साल की तरह इस बार बहुत सारी चीजे गायब है। उनमे मुख्य रूप से नवाबों कि बनवाई एतिहासिक इमारते है।







पहले महोत्सव स्थल पर छोटा इमामबाड़ा, घंटाघर सफेद बारादरी, कैसरबाग गेट आसिफी मस्जिद के अलावा कई महत्वपूर्ण इमारतों की डमी बनायी जाती थी। लेकिन इस साल महोत्सव में केवल रूमी दरवाज़ा और आलमबाग के चंदरनगर गेट के सिवा यहां किसी भी ऐतिहासिक ईमारत कि डमी नहीं बनायी गयी है। 
इससे यह प्रतीत होता है के महोत्सव को आयोजित करने वाले लोग इस मामले में कितने सुस्त और लापरवाह है। 

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