सामाजिक शोध में तकनीकी महत्व पर प्रशिक्षण देने की पहल
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भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद (Indian Sociological Society) के तत्वावधान में 24 जून से 30 जून 2025 तक एक सात दिवसीय ऑनलाइन राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका विषय था SPSS (Statistical Package for Social Sciences)। इस कार्यशाला का उद्देश्य सामाजिक विज्ञान के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को SPSS सॉफ्टवेयर के बुनियादी और व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देना था। कार्यशाला में तकनीकी विषयों को हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में सरल भाषा में समझाया गया, जिससे यह दोनों माध्यमों के प्रतिभागियों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध हुई।
यह आयोजन देश की विभिन्न समाजशास्त्रीय संस्थाओं जैसे नॉर्थ वेस्ट इंडियन सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन, राजस्थान, मध्यांचल, मराठी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश की समाजशास्त्र परिषदों के सहयोग से संपन्न हुआ। कार्यशाला के संरक्षक प्रो. मैत्रेयी चौधरी (अध्यक्ष, ISS) और प्रो. श्वेता प्रसाद (सचिव, ISS) रहे, जबकि संयोजक की जिम्मेदारी प्रो. अंशु केडिया ने निभाई।
प्रत्येक दिन विशेषज्ञों द्वारा विशिष्ट विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उद्घाटन सत्र में प्रो. श्वेता प्रसाद ने स्वागत भाषण दिया। प्रो. मैत्रेयी चौधरी ने शोध पद्धति और फील्ड डेटा के संतुलित उपयोग पर प्रकाश डाला। डॉ. प्रमोद गुप्ता (समाजशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) और प्रो. अर्चना सिन्हा (एनकेएमवी, लखनऊ) ने SPSS के टूल्स और सांख्यिकीय विधियों जैसे वर्णनात्मक आंकड़े और परिकल्पना परीक्षण को समझाया। डॉ. शांभवी मिश्रा (सांख्यिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने SPSS इंटरफेस, सामान्यता परीक्षण (Tests of Normality), t-test और ANOVA जैसे पैरामीट्रिक परीक्षणों को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत किया। डॉ. प्रफुल्ल स्वैन (उत्कल विश्वविद्यालय, ओडिशा) ने बाइवेरिएट विश्लेषण, सहसंबंध (Correlation) और सहयोग (Association) और डेटा विज़ुअलाइज़ेशन सिखाया।
डॉ. नागा राजीव एल (डॉ. डी वाय पाटील मेडिकल कॉलेज, पुणे) ने नॉन-पैरामीट्रिक परीक्षणों जैसे साइन टेस्ट, रन टेस्ट, मान-व्हिटनी यू टेस्ट आदि पर सत्र लिया। डॉ. अशोक कुमार (सांख्यिकीय विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय) ने रैखिक प्रतिगमन (Linear Regression) और प्रतिगमन निदान (Regression Diagnostics) पर विस्तृत सत्र लिया, जबकि अंतिम दिन डॉ. आशीष के. यादव (काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी) ने घटक विश्लेषण (Factor Analysis) तथा केस स्टडी आधारित चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों को जटिल आँकड़ों के सरलीकरण एवं विश्लेषण की विधियों से अवगत कराया। समापन सत्र में शोधछात्रा आशना वर्मा ने कार्यशाला की रिपोर्ट प्रस्तुत की और संयोजक प्रो. अंशु केडिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस कार्यशाला में देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों से प्रतिभागियों ने भाग लिया और इसे एक सफल एवं ज्ञानवर्धक शैक्षणिक आयोजन बनाया। इस कार्यशाला ने शोधार्थियों, शिक्षकों एवं छात्रों को SPSS के व्यावहारिक उपयोग में दक्षता प्रदान की।कार्यशाला आयोजन में डॉ शाम्भवी मिश्रा, प्रो अर्चना सिन्हा, डॉ नेहा कुमारी, डॉ सुचित्रा शर्मा, डॉ एस के ढल, डॉ अर्चना पांडेय, डॉ जिया जाफरी, डॉ प्रज्ञा चतुर्वेदी, गौरव मिश्रा शोध छात्राएं आशना वर्मा, जेबा अंजुम, शशि रावत, नेहा कनौजिया, राज नंदिनी, अदिति सिंह आदि ने अपना सहयोग दिया ।

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