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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान मजाक बन कर रह गया- संगीता त्रिवेदी

HTN ✍️ Live लखनऊ उत्तर प्रदेश

 वष्शिठ चौबे ब्यूरो प्रमुख लखनऊ
लखनऊ : राष्ट्रीय ब्राह्मण गौरव सभा,महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष श्रीमती संगीता त्रिवेदी ने कहा कि  मुझे  ऐसा लगता है कि जब से यह अभियान बना है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ  तब से  और भी हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं है अब तो आए दिन कहीं ना कहीं यह सुनने में आता है कहीं गैंगरेप, कहीं रेप करके मार डालना, कहीं पत्थरों से उसका सर कुचल देना , कहीं जला देना आए दिन बेटियों के साथ  वारदात होती रहती है कहने को यह अभियान बनाया गया है तो  जो भी हो या नेता का लड़का हो ,या अधिकारियों का लड़का हो, या किसी बड़े बिजनेसमैन का बेटा हो सबके लिए कानून एक होना चाहिए और तुरंत ही उसको सजा देनी चाहिए  मुझे ऐसा लगता है  कि इस केस में अपराधी के तरफ से कोई भी वकील नहीं होना चाहिए किसी को उस अपराधी के तरफ से वकालत नहीं करना चाहिए उसको बचाना नहीं चाहिए पर हमारे देश में कुछ ऐसे वकील हैं जो पैसे के लालच में अपराधी के तरफ केस लड़ते हैं  और उसको कहीं ना कहीं से बचाने की कोशिश करते हैं कहीं तो कोई बच जाता है और कहीं शायद भगवान के घर से नहीं बच पाता है और उसको सजा हो जाती है कईयों को तो मौत की सजा हुई पर उससे समाज में रहने वाले राक्षसों को कोई फर्क नहीं पड़ा और यह अपराध करने में सफल हो जाते हैं कुछ बेटियों का तो पता ही नहीं लग पाता कि उनके साथ कुछ ऐसा अपराध  जघन्य अपराध हुआ है वह न्यूज़ में नहीं आ पाता और उसके अपराधी को कोई सजा नहीं मिल पाती और वह बेटी और उसका परिवार जीते जी समाज मैं जिंदा लाश बन जाते हैं और उनके अपराधी समाज में फ्री होकर घूमते रहते हैं श्रीमती त्रिवेदी ने कहा कि  हमारे देश में क्यों ऐसा कानून नहीं बन रहा कि जो अपराध करें उसे तुरंत  मौत की सजा  सरेआम दी जाए
 अब तो हर मां बेटी को जन्म देने से डरती है क्योंकि आज समाज में परिवार ही गंदा हो गया है कहीं तो परिवारों में ही गंदगी होती है । और भी परिवारों के सदस्यों से हमेशा डर सा बना रहता है अब तो हमारे समाज की छोटी-छोटी बेटियां अबोधबालक जो कुछ नहीं जानता उनके साथ भी यह जघन्य अपराध हो रहे हैं कहीं तो ऐसा होता है कि समाज के डर से इज्जत के डर से लोग चुप होकर शांत होकर बैठ जाते हैं और  घुटते रहते हैं  उनका ना कोई कानून होता है और  ना कोई उनका रखवाला लिखने को तो बहुत कुछ है जिसकी कोई सीमा नहीं पर मैं अपनी कलम को यहीं विराम देती हूं और भगवान से यह प्रार्थना करती हूं कि हमारे समाज में हमारी बेटियों के साथ यह अपराध ना हो  और जो हो तो कानून उसे सख्त सजा दे जिससे कोई यह सोचने में भी कांप जाए और यह अपराध होने बंद हो जाए।

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