ग्राम प्रधान व सेक्रेटरी की मिलीभगत से अपात्रों को दिया गया आवास
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पात्रो को किया निराश
बसंत कुमार मांझी/ देवेंद्र कुमार लखीमपुर खीरी
जनपद लखीमपुर खीरी के व्लाक : रमियाबेहड़,मे सरकार पीएम आवास,स्वच्छ भारत मिशन योजना के अंतर्गत हर पात्र व्यक्तियों तक योजनाओं का लाभ पहुचाने का दावा कर रही है वहीं सरकारी कारिंदे सरकार के दावे को पलीता लगाने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं।
विकास खण्ड की ग्राम पंचायत नैनापुर के गांव जोधा पुरवा के ग्रामीणों का आरोप है की स्थानीय ग्राम पंचायत अधिकारी व प्रधान पीएम आवास योजना की सूची में आपत्रों का नाम शामिल कर योजना का लाभ उनको देना चाह रहे हैं जिनके पहले से पक्का मकान बना हुआ है वहीं पात्र लोग योजनाओं के लाभ से वंचित हैं इस बावत में ग्रामीणों ने सरकार के जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायती पत्र दिया है।
गांव के मुबारक अली का आरोप है कि वह साल भर से पीएम आवास योजना का लाभ लेने के लिये ग्राम पंचायत अधिकारी के ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं पर उनको पात्र होते हुये भी योजना का लाभ नही दिया जा रहा है जब उन्होंने आवास की मांग करते हुये जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई तो फर्जी आख्या देकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया कि आवेदक पात्र नही है आवेदक के पक्का मकान बना हुवा है जबकि वह घास फूस की बनी झोपड़ी में गुजर बसर कर रहे हैं जब उन्होंने पुनः शिकायत की तो ग्राम पंचायत अधिकारी ने यह आख्या लगाकर पल्ला झाड़ लिया कि आवेदक का नाम सूची में नही है आवास एप खुलने पर जियो टैग कर नाम सूची में सम्मिलित कर लिया जायेगा वहीं सज्जाक का आरोप है कि उन्होंने गत वर्ष में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत शौचालय का लाभ दिए जाने की मांग करते हुये ऑनलाइन शिकायत की थी जिसमें 23 सितंबर 2019 को ग्राम पंचायत अधिकारी ने यह आख्या लगाई थी कि आवेदक से आधार कार्ड लेकर यूनिवर्सल सेनीटेशन कवरेज में शामिल कर लिया गया है नई लिस्ट आने पर लाभ दे दिया जायेगा आरोप है कि एक साल बीतने के बाद उन्हें शौचालय का लाभ नही मिला है।
बताते चलें जनपद में कयी स्थानों पर यह एक आम समस्या वनी हुयी है जहां उन पात्रो को जो जिले के जंगलों के समीप बसे गांवों में रहते हैं और टाइगरों तेंदुओं की आमद होते रहनै के बाबजूद अपने बच्चों को एक विना बाउंड्री बाल व विना दरवाजे की फूंस की चारों तरफ से खुली झोपड़ी में लेकर रोज रात्रि में दहशत के बीच जाग जाग कर रात विताने को मजबूर हैं और आबास व शौचालय के वास्तविक हकदार हैं उन गरीबों को उनका हक नहीं मिलता क्यों कि वह इतने गरीब है कि किसी प्रधान या सेक्रेटरी को कुछ दे नहीं सकते ।

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