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कोरोना ने बहुत कुछ बदला , ज़िंदगी के कई आयाम को भी प्रभावित किया । राजनीतिक संस्कृति भी इससे अछूती नही रही

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         डा 0 प्रदीप शर्मा विभाध्यक्ष एम जे एम सी 
कोरोना ने बहुत कुछ बदला , ज़िंदगी के कई आयाम को भी प्रभावित किया । राजनीतिक संस्कृति भी इससे अछूती नही रही । 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद से lockdown से जो गतिविधियां रुकी  तो तमाम राजनीतिक संस्कृति में बदलाव आया ।  राजनीति सोशल मीडिया तक सीमित हो गयी ।  फेसबुक_लाइव ने प्रतिरोध का स्थान ले लिया । lockdown खत्म होने के   महीनों बाद भी  लोग इस सोशल मीडिया लाइव पैशन से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं ।  कोरोना_काल मोदी सरकार द्वारा द्वारा किसान , छात्र , नौजवान और मजदूर विरोधी नीतियों को लागू करने के लिए भी याद रखा जाएगा  और जब इस चौतरफ़ा हमले के खिलाफ जनता को लामबद्ध कर व्यापक जुझारू संघर्ष को विकसित करने की ज़रूरत  है  तो तमाम राजनैतिक ताकते अपने को सोशल मीडिया या फ़ोटो खिंचाने की   रस्म अदायगी तक सीमित किये है।  उस ज़मीनी संघर्ष को प्रचारित करने और आगे बढ़ाने के लिए तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो हो सकता है लेकिन सोशल मीडिया या फेसबुक लाइव या ट्वीटर   उस व्यापक ज़मीनी प्रतिरोध की  जगह नहीं ले सकता है ।
दो दिन पहले हम मित्रों  में बात हो रही थी राजनीति किस तरह बदलती है , जो राजनैतिक ताक़त सड़क पर लड़ने  के लिए जानी जाती थी वो आज ट्वीटर से प्रतिरोध  कर सत्ता के हस्तांतरण का इंतज़ार कर रहे है और वहीं ड्राइंग_रूम और मीडिया से  राजनीति करने वाले सड़क पर पसीना बहा रहे है । विडंबना यह है कि जिन राजनीतिक ताकतों ने  हमेशा आंदोलन की धुरी बनते हुए उत्प्रेरक  की भूमिका निभाई वो लोग आज  विश्लेषक और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट बने हुए है । 
यह catalyst से analyst की यात्रा कोरोना की आड़  में भी छुपेगी नही ।

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