बुजुर्गों के साथ युवाओं को भी सताने लगा गठिया* *योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी
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विश्व अर्थराइटिस दिवस
रिपोर्ट सुशील कुमार द्विवेदी इटियाथोक गोंडा
वर्ल्ड आर्थराइटिस दिवस मनाने का उद्देश्य केवल लोगों में जोड़ों के दर्द के प्रति जागरुकता फैलाना है। पहले ये रोग की समस्या ज्यादातर बड़ी उम्र के लोगों को होती थी लेकिन अब इस बीमारी की चपेट में युवावर्ग भी आ गया है। अर्थराइटिस का मतलब गठिया होता है, जो कि जोड़ों की सूजन व दर्द से जुड़ा रोग है। यह रोग आमतौर पर ओस्टियो आर्थराइटिस और रुमेटॉयड आर्थराइटिस के रूप में होता है। बढ़ती उम्र के साथ रोग की आशंका भी बढ़ती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इस रोग की चपेट में ज्यादा आती हैं।
इसी क्रम में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के तत्वधान में योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी के मार्गदर्शन में चल रहे नियमित योग कक्षा सिसई बहलोलपुर में योग शिक्षक आदर्श गुप्ता ने आज विश्व आर्थराइटिस दिवस के अवसर पर बताया कि अर्थराइटिस अर्थात् गठिया आज की बदलती जीवन शैली,मोटापा,गलत खानपान आदि वजहों से बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। अर्थराइटिस का सबसे अधिक प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों पर पड़ता है। इससे बदन में दर्द और अकड़न महसूस होने लगती है।
कभी-कभी हाथों, कंधों और घुटने में सूजन और दर्द रहता है और हाथ मिलाने में तकलीफ होती है। ऐसे लोगों को अर्थराइटिस की समस्या हो सकती है।
योगाचार्य सुधांशु द्विवेदी ने बताया कि गठिया के लिए प्रमुख कारणों में मोटापा सबसे ऊपर है। शरीर पर सामान्य से अधिक वजन जोड़ों में सूजन पैदा करता है। अर्थराइटिस जोड़ों की सूजन है। सौ से अधिक प्रकार के गठिया से लोग परेशान हो रहे हैं। सामान्य स्थिति में आस्टियो अर्थराइटिस 50 साल की उम्र के बाद होता है। यह शरीर पर निर्भर करता है कि जोड़ो को कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया गया है। अर्थराइटिस के लक्षण आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ विकसित होते हैं, लेकिन ये अचानक भी समस्या बन सकते हैं। इसके अलावा गलत एंगल से अधिक देर तक झुककर काम करना, सिर पर नियमित तौर पर वजन उठाना*, झुककर कोई वजन उठाना, कंप्यूटर के सामने गलत तरीके से घंटों बैठे रहना, मोबाइल का अधिक इस्तेमाल करना, गर्दन झुकाकर घंटों काम करने से भी गठिया की शिकायत होती है।
उन्होंने बताया की इसके अलावा रुमेटोइड अर्थराइटिस में मरीज के शरीर के अंग अकड़ जाते हैं। इसी तरह यूरिक एसिड बढ़ने से भी गठिया (गाउट) की समस्या होती है। योगाचार्य ने बताया कि योगिक क्रियाओं में संधि संचालन,उदर संचालन,शवासन (10 मिनट), वज्रासन (अगर कर सके ), कोणआसन,त्रिकोणासन, गोमुखासन,भुजंगासन, अर्द्धमत्स्येंद्रआसन,धनुरासन, सर्वांगासन,अंत में शवासन के माध्यम से हम गठिया की समस्या में आराम पा सकते हैं।
योग प्रशिक्षक आशीष गुप्ता ने बताया कि दूध से बनी चीजों, जंक फूड तथा मैदे से बनी चीजों का सेवन ना करें, रोजाना संतुलित आहार ने,धूम्रपान और शराब का सेवन ना करें यह हड्डियों को कमजोर बनाता है, रोजाना सैर करें। और किसी भी योगिक क्रिया में यदि कोई परेशानी हो तो उसे ना करें।
शिविर में -आस्था सुमन श्रीवास्तव,माही गुप्ता,सलोनी गुप्ता,अखिल,अजय श्रीवास्तव,संतोष गुप्ता,हरिशंकर तिवारी,चंदन तिवारी,नरेंद्रश्रीवास्तव,सूरज,अंश,आदि कई योग साधक एवं ग्रामीण मौजूद रहे।

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