CPI-M : अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ हेट स्पीच मामले को एडिशनल मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा खारिज किया जो दुर्भाग्य पुर्ण है
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भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पोलित ब्यूरो सदस्य बृंदा करात ने अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के खिलाफ हेट स्पीच मामले को एडिशनल मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा खारिज किए जाने को बेहद आश्चर्यजनक और निराशाजनक बताया है।
कॉमरेड वृंदा करात ने कहा कि हमने बीजेपी नेताओं अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा द्वारा दिए गए भड़काऊ और नफ़रत भरे भाषण देने के खिलाफ जनवरी में दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज की थी और आईपीसी की धारा 153ए के तहत संबंधित प्रावधानों में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा था। पुलिस द्वारा जवाब देने से इनकार करने के बाद, हमने उपयुक्त प्रक्रिया के अनुसार मजिस्ट्रेट की अदालत में एक आवेदन दायर किया था।
अदालत ने शिकायतकर्ता होने के नाते हमारे साथ-साथ दिल्ली पुलिस से भी सारी दलीलें सुनीं, जिन्होंने तर्क दिया कि कोई संज्ञेय अपराध नहीं किया गया था। निर्णय सुरक्षित रखा गया था, लेकिन चूंकि अन्य लोग उच्च न्यायालय चले गए थे, इसलिए इसमें देरी हुई। अब जब हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को आवेदन के निपटान के लिए कहा, तो अब कोर्ट ने यह कहते हुए मामला खारिज कर दिया कि दोनों सांसदों पर मुकदमा चलाने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से सीआरपीसी की धारा 196 के तहत पहले इजाजत लेने की जरूरत थी। यह बेहद आश्चर्यजनक है कि पुलिस ने पहले यह आपत्ति नहीं जताई थी। कोर्ट में भी पहले बहस क्यों सुनी गई? यह बात फरवरी में ही सामने क्यों नहीं रखी गई?
यह बेहद अनुचित न्यायिक प्रक्रिया है, जिसके परिणामस्वरूप उन लोगों को खुले छूटने का मौका मिला है जिनके खिलाफ नफरत भरे भाषण देने के प्रथमदृष्टया साक्ष्य हैं।

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