छत्तीस गढ मे सत्तारूढ कांग्रेसी गुंडो का आतंक खबर छापने के विरोध मे पत्रकार को सरेराह जम कर पीटा थाने के अंदर घुसकर कनपटी पर लगाई पिस्टल गले मे पेंचकस घुडकर जान से मारने का प्रयास एफआईआर दर्ज पत्रकारों मे रोष
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Adesh Sharma Bureau Chief HTN Live
छत्तीस गढ के कांकेर मे सत्तारूढ कांग्रेस के गुंडो ने अपने भृष्टाचार युक्त कुकर्मो के पर्दाफाश होने से छुव्ध होकर पहले तो जन न्यूज के रिपोर्टर को जानमाल की धमकी दी बाद मेआज सुबह सरेआम सडक पर गंदी गंदी गालियां देते हुये कयी कांग्रेसी नेता छाप गुंडो की मदद से जमकर पिटाई लगायी।
गौर तलब बात है कि केंद्र की सत्ता से जनमानस द्वारा निकाल फेंकी गयी कांग्रेस के आला कमान द्वारा अब पुन: सत्ता बापसी के लिये आम जनता के साथ पत्रकारो के साथ मधुर रिश्ते वनाने का ढोंग किया जारहा है वहीं छत्तीसगढ मे जहां कांग्रेस की सरकार है वहां
कांग्रेसी नेताछाप गुंडो द्वारा अपने विरुद्ध भृष्टाचार की खबरे छाप कर जनता व शाशन प्रसाशन को आगाह करने बाले मीडिया कर्मियो के मुंह पर जबरदस्ती ताला लगाने का क्रम जारी है अब न तो राहुल गांधी को मीडिया को दबाये जाने की आवाज सुनाई देरही है न प्रियंका गांधी और कांग्रेस माता सोनियां गांधी को
ताजा घटना छत्तीस गढ के कांकेर मे बीती 26 सितम्बर की शाम 3:50 बजे घटी जिसमे पत्रकार कमल शुक्ला को कांग्रेसी दबंग नेताओ जितेद्र सिंह,शादाव खान ,गफ्फार अहमद ने दिन दहाडे व्यस्त रोड पर गंदी गंदी गालियां देते हुये पकडा और बुरी तरह से उनकी पिटाई लगाई
यह घटना कांग्रेस के कुसाशन का नमूना व एकअविस्मरणीय घटना वन गयीहैं जिसकी छत्तीस गढ के अलावा अन्य प्रांतो के पत्रकार भी भर्तसना कर रहे है और आरोपी कांग्रेसी गुंडो के विरुद्ध कडी कार्यवाही किये जाने की मांग कर रहे हैं
वहीं कल छत्तीसगढ से ही जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि थाना परिसर के अंदर ही पुलिस की मौजूदगी में इन असामाजिक तत्वों द्वारा उनकी कनपटी पर पिस्तौल टिकायी गई है, उन्हें गाली-गलौच करते हुए घसीटकर बाहर लाया गया है और उनके गले में पेचकस घुसाकर जान से मारने का प्रयास किया गया है। इतना होने तक पुलिस के मूकदर्शक बने रहने से साफ है कि इन तत्वों को पुलिस और सत्ता का पूरा संरक्षण हासिल है।
उल्लेखनीय है कि कमल शुक्ल आदिवासी हितों के लिए संघर्षरत एक चर्चित पत्रकार है। पिछले भाजपा राज के समय भी सलवा जुडूम की ज्यादतियों को उजागर करने के कारण उन्हें सत्ता पक्ष का कोपभाजन बनना पड़ा है। पिछले कई वर्षों से वे पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग पर संघर्षरत है और चुनावों के समय कांग्रेस ने इस मांग को पूरा करने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आने के बाद वह इस वादे को पूरा करने से मुकर रही है। माकपा नेता ने कहा कि हमलावर कांग्रेसियों के साथ मंत्रिमंडल के एक नेता के घनिष्ठ संबंध है और यह मानने के पर्याप्त कारण है कि पूरा हमला सुनियोजित ढंग से किया गया है।पिछले कुछ दिनों से वे कांकेर में रहकर लॉक-डाउन के दौरान आम जनता को मिलने वाली सहायता में प्रशासन द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार, रेत खनन के नाम पर सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा किये जा रहे घोटालों और आदिवासी विकास योजनाओं के नाम पर हो रही लूट को उजागर कर रहे थे। इससे वे सत्ताधारी पार्टी के नेताओं, प्रशासन के भ्रष्ट अधिकारियों और स्थानीय माफिया — तीनो के निशाने पर थे और इन तीनों का गठजोड़ ही इस हमले के लिए जिम्मेदार है। इस घटना से साफ है कि प्रदेश में जनहित के मुद्दों पर ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकार पहले भाजपा राज में जितना असुरक्षित थे, उतना ही वे आज कांग्रेस राज में भी है।
माकपा ने कहा है कि इस घटनाक्रम का वायरल वीडियो हमलावरों की पहचान करने के लिए काफी है और इन्हें शीघ्र गिरफ्तार किया जाना चाहिए। पर्दे के पीछे सक्रिय दोषियों को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए और इन असामाजिक तत्वों से सांठगांठ करने वाले प्रशासन के अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए। सरकार यदि ईमानदार होगी, तो वह ऐसे भ्रष्ट तत्वों को संरक्षण देने वाले मंत्री को भी हटाना पसंद करेंगी।


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