चिलचिलाती धूप में सरकारी राशन की दुकान पर लगी गरीब असहाय लोगों के झोला और चप्पल की लाइन
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उत्तर प्रदेश (लखनऊ)
( रिपोर्टर ) :- अमन मिश्रा
चिलचिलाती धूप में सरकारी राशन की दुकान पर लगी गरीब असहाय लोगो के झोला और चप्पलों की लाईन
लखनऊ :- कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के दूसरे चक्र में गरीबी की मुंह बोलती दास्तान का एक ऐसा दुखद नज़ारा राजधानी के काकोरी,मलिहाबाद,माल कस्बों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के गांवों में सरकारी राशन की दुकानों पर देखने को मिली।जिसे देख कर पत्थर दिल वाले इन्सानो की आॅखो में भी शायद आॅसू आ जाएंगे।
बुधवार की दोपहर तेज़ धूप थी | और सड़क पर एक-एक मीटर की दूरी पर सफेद रंग के गोले बने हुए थे| किसी गोले मे झोला रखा था, तो किसी मे प्लास्टिक की छोटी बोरी रखी हुई थी,किसी मे जूता-चप्पल रखे हुए थे| सड़क के किनारे छाव मे खड़े गरीब गोलो पर निगाह बनाए हुए थे | सड़क के किनारे खड़ी महिलाएं,बच्चे,युवकों से जब गोलो मे रखे झोलो,बोरी,जूता, चप्पल के बिषय में पूछा गया तो पता चला कि ये सब लोग आसपास की बस्तियो मे रहने वाले लोग है | सुबह से लाईन मे लगे-लगे दोपहर के दो से तीन बज गये थे | जोकि अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे |लाईन मे लगी कुछ गरीब अनपढ़ लोगों में यह बेचैनी थी| कि पता नही उन्हे राशन मिलेगा भी या नही | आज सुबह जब राशन के लिए लाईन लगी थी |
उत्तर प्रदेश (लखनऊ)
( रिपोर्टर ) :- अमन मिश्रा
चिलचिलाती धूप में सरकारी राशन की दुकान पर लगी गरीब असहाय लोगो के झोला और चप्पलों की लाईन
लखनऊ :- कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लागू किए गए लॉकडाउन के दूसरे चक्र में गरीबी की मुंह बोलती दास्तान का एक ऐसा दुखद नज़ारा राजधानी के काकोरी,मलिहाबाद,माल कस्बों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के गांवों में सरकारी राशन की दुकानों पर देखने को मिली।जिसे देख कर पत्थर दिल वाले इन्सानो की आॅखो में भी शायद आॅसू आ जाएंगे।
बुधवार की दोपहर तेज़ धूप थी | और सड़क पर एक-एक मीटर की दूरी पर सफेद रंग के गोले बने हुए थे| किसी गोले मे झोला रखा था, तो किसी मे प्लास्टिक की छोटी बोरी रखी हुई थी,किसी मे जूता-चप्पल रखे हुए थे| सड़क के किनारे छाव मे खड़े गरीब गोलो पर निगाह बनाए हुए थे | सड़क के किनारे खड़ी महिलाएं,बच्चे,युवकों से जब गोलो मे रखे झोलो,बोरी,जूता, चप्पल के बिषय में पूछा गया तो पता चला कि ये सब लोग आसपास की बस्तियो मे रहने वाले लोग है | सुबह से लाईन मे लगे-लगे दोपहर के दो से तीन बज गये थे | जोकि अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे |लाईन मे लगी कुछ गरीब अनपढ़ लोगों में यह बेचैनी थी| कि पता नही उन्हे राशन मिलेगा भी या नही | आज सुबह जब राशन के लिए लाईन लगी थी |


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