सीमा पर460 रूसी टी-90 भीष्मक टैंक तैनात करेगा भारत
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ब्यूरो रिपोर्ट नागेश्वर सिंह✍️
भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और पाकिस्तान के साथ सीमा पर अपनी तैयारी को विस्तार देने के लिए भारत 13448 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त 464 रूसी मूल के उन्नत T-90 भीष्म युद्धक टैंक को तैनात करेगा. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा है कि टी -90 टैंकों का उत्पादन करने वाले इंडेंट को जल्द ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के तहत हैवी व्हीकल फैक्ट्री पर रखा जाएगा. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने एक महीने पहले रूस से लाइसेंस अधिग्रहण को मंजूरी दे दी थी. नए अधिग्रहण से नई टी -90 रेजिमेंटों में 10 और इकाइयां बढ़ेंगी और रात की लड़ाई के दौरान टैंक कमांडर को दुश्मन के स्थानों पर हमला करने की अनुमति देने के लिए थर्मल इमेजिंग नाइट से लैस किया जाएगा. इस नई कवायद से पाकिस्तान के साथ जम्मू से लेकर गुजरात में पश्चिमी तट तक सेना को मजबूती मिलेगी. भारत ने पहले से ही टी -90 टैंकों की 18 रेजिमेंटों को शामिल किया है, जो राजस्थान और पंजाब में पाकिस्तान के मोर्चे पर तैनात हैं. अब तक, भारतीय सेना के 67 बख्तरबंद रेजिमेंटों में लगभग 1,070 टी -90 टैंक और साथ ही 124 अर्जुन और 2,400 पुराने टी 72 टैंक हैं. भारतीय सेना ने अपनी पैदल सेना और बख्तरबंद कोर को आधुनिक बनाने के लिए एक मेगा योजना तैयार की थी. हालांकि, 60,000 करोड़ के फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल कार्यक्रम सहित लगभग सभी खरीद परियोजनाएं कई कारणों से अटकी हुई वर्तमान में, भारत की बख़्तरबंद रेजीमेंट्स, जिसमें मुख्य रूप से टी -90, टी 72 और अर्जुन टैंक शामिल हैं, की पाकिस्तान पर बढ़त हासिल है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि इस्लामाबाद जल्द से जल्द अंतर को पाटने की योजना बना रहा था. सूत्रों के कथन अनुसार भारतीय सेना की लगभग 67 बख्तरबंद रेजीमेंटों के खिलाफ पाकिस्तान आर्मी में इसी तरह की रेजीमेंट्स की संख्या 51 के आसपास है. वर्तमान में पाकिस्तान के शस्त्रागार में 70 प्रतिशत से अधिक टैंक रात के दौरान काम करने की क्षमता रखते हैं, जो उन्होंने कहा, चिंता का विषय था।
ब्यूरो रिपोर्ट नागेश्वर सिंह✍️
भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण और पाकिस्तान के साथ सीमा पर अपनी तैयारी को विस्तार देने के लिए भारत 13448 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त 464 रूसी मूल के उन्नत T-90 भीष्म युद्धक टैंक को तैनात करेगा. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से कहा है कि टी -90 टैंकों का उत्पादन करने वाले इंडेंट को जल्द ही ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के तहत हैवी व्हीकल फैक्ट्री पर रखा जाएगा. सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने एक महीने पहले रूस से लाइसेंस अधिग्रहण को मंजूरी दे दी थी. नए अधिग्रहण से नई टी -90 रेजिमेंटों में 10 और इकाइयां बढ़ेंगी और रात की लड़ाई के दौरान टैंक कमांडर को दुश्मन के स्थानों पर हमला करने की अनुमति देने के लिए थर्मल इमेजिंग नाइट से लैस किया जाएगा. इस नई कवायद से पाकिस्तान के साथ जम्मू से लेकर गुजरात में पश्चिमी तट तक सेना को मजबूती मिलेगी. भारत ने पहले से ही टी -90 टैंकों की 18 रेजिमेंटों को शामिल किया है, जो राजस्थान और पंजाब में पाकिस्तान के मोर्चे पर तैनात हैं. अब तक, भारतीय सेना के 67 बख्तरबंद रेजिमेंटों में लगभग 1,070 टी -90 टैंक और साथ ही 124 अर्जुन और 2,400 पुराने टी 72 टैंक हैं. भारतीय सेना ने अपनी पैदल सेना और बख्तरबंद कोर को आधुनिक बनाने के लिए एक मेगा योजना तैयार की थी. हालांकि, 60,000 करोड़ के फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल कार्यक्रम सहित लगभग सभी खरीद परियोजनाएं कई कारणों से अटकी हुई वर्तमान में, भारत की बख़्तरबंद रेजीमेंट्स, जिसमें मुख्य रूप से टी -90, टी 72 और अर्जुन टैंक शामिल हैं, की पाकिस्तान पर बढ़त हासिल है, लेकिन सूत्रों ने कहा कि इस्लामाबाद जल्द से जल्द अंतर को पाटने की योजना बना रहा था. सूत्रों के कथन अनुसार भारतीय सेना की लगभग 67 बख्तरबंद रेजीमेंटों के खिलाफ पाकिस्तान आर्मी में इसी तरह की रेजीमेंट्स की संख्या 51 के आसपास है. वर्तमान में पाकिस्तान के शस्त्रागार में 70 प्रतिशत से अधिक टैंक रात के दौरान काम करने की क्षमता रखते हैं, जो उन्होंने कहा, चिंता का विषय था।

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