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भरतकुंड में पिशाची का मेला आज संपन्न

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  स्नान कर मंदिर में दर्शन के साथ पुण्य लाभ अर्जित किए श्रद्धालु

_भरतकुंड_अयोध्या नौ सौ काशी न एक पिचाशी। इन्हीं किंवदंतियों के बीच नंदीग्राम का एतिहासिक पिशाची मेला आज लगा।
    भरत की तपोभूमि से सटे नंदीग्राम नामक पवित्र स्थल पर स्थित पिशाच मोचन कुंड में लोग स्नान कर मंदिर में दर्शन के साथ पुण्य लाभ अर्जित किए।
    पिशाच मोचन कुंड की महिमा बड़ी निराली है। कहते हैं सौ बार काशी स्नान से जो पुण्य मिलता है उसकी पूर्ति पिशाच मोचन कुंड में एक बार ही स्नान करने से ही हो जाती है। भरत की तपोभूमि नंदीग्राम से सटे इस स्थान पर हर साल चैत्र कृष्ण चतुर्दशी को मेला लगता है।
    मान्यता है कि इस सरोवर में स्नान से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं। श्रद्धालु स्नान के बाद भगवान के दर्शन, पिंडदान और गोदान करते हैं। पिशाची के बारे में दो तरह की किंवदंतिया हैं पहली यह कि लंका में युद्ध के दौरान जब मेघनाद के बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे तो हनुमान जी को संजीवनी बूटी लाने भेजा गया था। बूटी की पहचान न होने के कारण वह पहाड़ उठाकर ही लंका की ओर चल पड़े। जब वे अयोध्या के ऊपर से जा रहे थे तो कुछ देर के लिए समूचे क्षेत्र में अंधकार छा गया। आसमान की ओर देखने पर किसी दानव शक्ति द्वारा अयोध्या पर आक्रमण किए जाने की आशंका में भरत जी ने बाण चला दिया। बाण लगने के कारण हनुमान जी पर्वत समेत गिर गए थे।   
     पुजारी हनुमान दास कहते हैं कि जिस स्थान पर हनुमान जी गिरे थे वहां कुंड बन गया था। उसी को पिशाच मोचन कुंड के नाम से जाना जाता है। दूसरी किंवदंती है कि लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ब्रह्मा हत्या के पाप से मुक्त होने से लिए पिशाच मोचन कुंड में स्नान किया। इस कारण पिशाच मोचन कुंड की मान्यता है कि न सौ काशी न एक पिशाची।

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