UPPCL और उसकी सहयोगी कम्पनीयो मे अवैधरूप से नियुक्त (बड़ेबाबुओ) IAS की नियुक्ति पर इलाहाबाद उच्चन्यालय हुआ सख्त
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लखनऊ 7 फरवरी उपभोक्ता संरक्षण उत्थान समिति द्वारा इलाहाबाद उच्चन्यालय मे लगातार बढ़ रहे बिजली के दामो एव UPPCL मे सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पदो पर अनुभव ही (बड़ेबाबुओ)IAS की अवैध/ नियमविरूद्ध की गयी नियुक्तियो के विरुद्ध दायर याचिका पर 1 मार्च को सुनवाई करते हुए पिछली बार की ही तरह अपना कड़ा रुख कायम रखते हुए याचिका मे अंकित प्रतिवादी नम्बर 6 से 17 पर अंकित सभी को 25 अप्रैल तक जबाब देने के लिये और 10 दिनों मे नोटिस तमिल करने का सख्त आदेश देते हुए जनहित याचिका को मन्जूर कर दिया है साथ ही यह भी कहा है कि 25-4-2019 तक सारे लोग अपना जबाब न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है और *यह भी अपने आदेश में कहा है कि इन अधिकारियों के पास इस क्षेत्र मे कार्य करने का क्या अनुभव है और किस चयन समिति के माध्यम से इनको चयनित किया है उसका भी विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाये* ।
पिछली बार की तरह से इस बार भी कोर्ट मे वादी के वकीलों को बोलने की आवश्यकता नही पडी माननीय न्यायाधीश ने ही विषय की गम्भीरता को समझते हुए प्रतिवादीयो के विद्वान अधिवक्ताओ की बात से पूर्णतः असहमति जताते हुए PIL को ना सिर्फ स्वीकार किया बल्कि प्रतिवादी अधिवक्ताओं को यहाँ तक डाट लगते हुए कहा कि हम यहाँ पर न्याय करने के लिए बैठे है ना कि आप के अहम को असन्तुष्ट करने के लिए पिछली बार तो माननीय न्यायाधीश ने यहाँ तक टिप्पणी कर दी थी कि आप लोगों ने तो हाईकोर्ट कोर्ट को हैंगर मे टाँग दिया है जहाँ भी देखो वहाँ ब्यूरोक्रेटस एक अन्य मुकदमे का उदाहरण देते हुए यह तक टिप्पणी कर दी कि देखिये 25 मे 24 ब्यूरोक्रेटस की नियुक्ति क्या इनसे काबिल कोई नहीं है जहाँ देखो वही ब्यूरोक्रेटस ।
खैर अब देखना यह है कि 25 /4 /2019 को क्या जवाब दिया जाता है उपभोक्ताओं के हित मे यह युद्ध अभी आरम्भ ही हुआ है देखना यह है कि सच्चाई की यह लड़ाई कितनी लम्बी चलेगी ।
लखनऊ 7 फरवरी उपभोक्ता संरक्षण उत्थान समिति द्वारा इलाहाबाद उच्चन्यालय मे लगातार बढ़ रहे बिजली के दामो एव UPPCL मे सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पदो पर अनुभव ही (बड़ेबाबुओ)IAS की अवैध/ नियमविरूद्ध की गयी नियुक्तियो के विरुद्ध दायर याचिका पर 1 मार्च को सुनवाई करते हुए पिछली बार की ही तरह अपना कड़ा रुख कायम रखते हुए याचिका मे अंकित प्रतिवादी नम्बर 6 से 17 पर अंकित सभी को 25 अप्रैल तक जबाब देने के लिये और 10 दिनों मे नोटिस तमिल करने का सख्त आदेश देते हुए जनहित याचिका को मन्जूर कर दिया है साथ ही यह भी कहा है कि 25-4-2019 तक सारे लोग अपना जबाब न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है और *यह भी अपने आदेश में कहा है कि इन अधिकारियों के पास इस क्षेत्र मे कार्य करने का क्या अनुभव है और किस चयन समिति के माध्यम से इनको चयनित किया है उसका भी विवरण कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाये* ।
पिछली बार की तरह से इस बार भी कोर्ट मे वादी के वकीलों को बोलने की आवश्यकता नही पडी माननीय न्यायाधीश ने ही विषय की गम्भीरता को समझते हुए प्रतिवादीयो के विद्वान अधिवक्ताओ की बात से पूर्णतः असहमति जताते हुए PIL को ना सिर्फ स्वीकार किया बल्कि प्रतिवादी अधिवक्ताओं को यहाँ तक डाट लगते हुए कहा कि हम यहाँ पर न्याय करने के लिए बैठे है ना कि आप के अहम को असन्तुष्ट करने के लिए पिछली बार तो माननीय न्यायाधीश ने यहाँ तक टिप्पणी कर दी थी कि आप लोगों ने तो हाईकोर्ट कोर्ट को हैंगर मे टाँग दिया है जहाँ भी देखो वहाँ ब्यूरोक्रेटस एक अन्य मुकदमे का उदाहरण देते हुए यह तक टिप्पणी कर दी कि देखिये 25 मे 24 ब्यूरोक्रेटस की नियुक्ति क्या इनसे काबिल कोई नहीं है जहाँ देखो वही ब्यूरोक्रेटस ।
खैर अब देखना यह है कि 25 /4 /2019 को क्या जवाब दिया जाता है उपभोक्ताओं के हित मे यह युद्ध अभी आरम्भ ही हुआ है देखना यह है कि सच्चाई की यह लड़ाई कितनी लम्बी चलेगी ।
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