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_भगवान शिव एवं पार्वती जी के विवाह का दिन

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                             महाशिवरात्रि कल

(प्रदीप पाण्डेय, गोंडा)...

◆ महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है, जो कल यानी 4 मार्च को है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। अधिकतर लोग यह मान्यता रखते है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वति के साथ हुआ था। मध्य भारत में शिव अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। 

महाकालेश्वर मंदिर, (उज्जैन) सबसे सम्माननीय भगवान शिव का मंदिर है जहाँ हर वर्ष शिव भक्तों की एक बड़ी मण्डली महा शिवरात्रि के दिन पूजा-अर्चना के लिए आती है। कश्मीरी ब्राह्मणों के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। यह शिव और पार्वती के विवाह के रूप में हर घर में मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के उत्सव के 3-4 दिन पहले यह शुरू हो जाता है और उसके दो दिन बाद तक जारी रहता है।

महाशिवरात्रि आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के सभी मंदिरों में व्यापक रूप से मनाई जाती है।
इस साल महाशिवरात्रि 4 मार्च को है और इस दिन सोमवार है। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है। इस वजह से सोमवार को महादेव की पूजा करना काफी महत्वपूर्ण है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान शिव तो मात्र बेल पत्र चढ़ाने से भी खुश होकर अपने भक्तों की मुराद पूरी करते हैं।

प्रयागराज में चल रहे कुंभ में भी महाशिवरात्रि के दिन आखिरी शाही स्नान होगा और इसी के साथ कुंभ मेले का समापन हो जाएगा। इस बार की महाशिवरात्रि सोमवार को पड़ने की वजह से और भी खास होगी। चार मार्च को सम्पूर्ण भारत में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव के भक्त मंदिरों में शिव शंकर की पूजा अर्चना करेंगे। लोग गीत गाएंगे, शिवलिंग पर बेल पत्थर चढ़ाएंगे। भांग का प्रसाद ग्रहण करेंगे और पूरे दिन उपवास रखेंगे। वहीं प्रयागराज में चल रहे कुम्भ में भी महाशिवरात्रि के दिन आखिरी शाही स्नान होगा और इसी के साथ कुंभ मेले का समापन हो जाएगा। हिंदू पुराणों में महाशिवरात्रि के लिए कोई एक नहीं बल्कि कई वजहें बताई गई हैं। किसी कथा में महाशिवरात्रि को भगवान शिव के जन्म का दिन बताया गया है। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इसी वजह से इस दिन शिवलिंग की खास पूजा की जाती है। वहीं, दूसरी प्रचलित कथा के मुताबिक ब्रह्मा ने महाशिवरात्रि के दिन ही शंकर भगवान का रुद्र रूप का अवतरण किया था। इन दोनों कथाओं से अलग कई स्थानों पर मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी।

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